आईजीआरएस में फर्जी निस्तारण और लापरवाही पर बड़ी कार्रवाई: लेखपाल निलंबित, विभागीय जांच शुरू
उरई। जन शिकायतों के फर्जी निस्तारण और शासकीय कार्यों में लापरवाही के मामले में तहसील जालौन के लेखपाल नीटू यादव को निलंबित कर दिया गया है। आईजीआरएस शिकायतों की समीक्षा में बिना तथ्यात्मक जांच के शिकायतों का निस्तारण किए जाने और ओलावृष्टि राहत कार्य में भी लापरवाही सामने आने पर जिलाधिकारी के निर्देश पर जांच हुई।
आईजीआरएस में फर्जी निस्तारण पर बड़ी कार्रवाई, लेखपाल नीटू यादव निलंबित
जन शिकायतों में लापरवाही भारी पड़ी, जालौन के लेखपाल पर गिरी निलंबन की गाज
फर्जी रिपोर्टिंग का खुलासा, आईजीआरएस मामले में लेखपाल सस्पेंड
जिलाधिकारी की सख्ती, शिकायतों के गलत निस्तारण पर लेखपाल निलंबित
उरई। जन शिकायतों के त्वरित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण को लेकर जिला प्रशासन ने एक बार फिर सख्त संदेश दिया है। आईजीआरएस (इंटीग्रेटेड ग्रिवांस रिड्रेसल सिस्टम) पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के निस्तारण में गंभीर लापरवाही और फर्जी रिपोर्टिंग के मामले में तहसील जालौन के लेखपाल नीटू यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर हुई जांच में प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई। साथ ही संबंधित लेखपाल के विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई भी प्रारंभ कर दी गई है।
जिलाधिकारी द्वारा आईजीआरएस पोर्टल पर लंबित एवं निस्तारित शिकायतों की वर्चुअल समीक्षा के दौरान यह मामला सामने आया। समीक्षा में पाया गया कि तहसील जालौन क्षेत्र से संबंधित सीमांकन तथा ओलावृष्टि से जुड़ी शिकायतों का नियमानुसार और तथ्यात्मक निस्तारण नहीं किया गया। शिकायतों की वास्तविक स्थिति का मौके पर परीक्षण किए बिना उन्हें जल्दबाजी में निस्तारित दिखा दिया गया। प्रशासन को इस कार्यप्रणाली पर गंभीर संदेह हुआ, जिसके बाद संबंधित शिकायतों की क्रॉस जांच कराई गई।
जांच के दौरान शिकायतकर्ताओं से सीधे संपर्क कर वास्तविक स्थिति की जानकारी ली गई। शिकायतकर्ताओं ने बताया कि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ था, जबकि पोर्टल पर शिकायतों को निस्तारित दिखा दिया गया था। इससे यह स्पष्ट हुआ कि आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज रिपोर्ट और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर था। इस तथ्य को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने तत्काल उप जिलाधिकारी जालौन राकेश सोनी को मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए।
उप जिलाधिकारी द्वारा की गई जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। जांच रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया कि संबंधित लेखपाल ने शासन के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया तथा शिकायतों के निस्तारण में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई। इसके बाद तहसीलदार जालौन की संस्तुति पर लेखपाल नीटू यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
प्रशासनिक जांच में केवल आईजीआरएस शिकायतों के निस्तारण में ही नहीं, बल्कि अन्य शासकीय कार्यों में भी संबंधित लेखपाल की लापरवाही सामने आई। जांच रिपोर्ट के अनुसार ओलावृष्टि राहत से जुड़े मामलों में भी उन्होंने समय पर आवश्यक अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए। प्रभावित किसानों के बैंक खातों की सही जानकारी और अन्य जरूरी दस्तावेज समय से प्रस्तुत न किए जाने के कारण राहत सहायता वितरण की प्रक्रिया प्रभावित हुई। इससे किसानों को समय पर राहत राशि मिलने में भी बाधा उत्पन्न हुई।
जांच में यह भी सामने आया कि जिला प्रशासन द्वारा कई बार आवश्यक निर्देश दिए जाने के बावजूद संबंधित लेखपाल ने अपेक्षित सहयोग नहीं किया। बार-बार निर्देशों की अनदेखी करने तथा प्रशासनिक कार्यों में उदासीनता बरतने के कारण शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। अधिकारियों ने इसे सरकारी दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही माना।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में जन शिकायतों का समयबद्ध, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण शामिल है। आईजीआरएस पोर्टल का उद्देश्य आम नागरिकों की शिकायतों का निष्पक्ष और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी बिना वास्तविक जांच के शिकायतों का निस्तारण दर्शाता है या तथ्यों को छिपाकर फर्जी रिपोर्ट प्रस्तुत करता है तो यह न केवल प्रशासनिक व्यवस्था के साथ धोखा है, बल्कि जनता के विश्वास को भी कमजोर करता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा फर्जी रिपोर्टिंग, तथ्यों को छिपाने अथवा शासकीय कार्यों में लापरवाही किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में कोई भी कर्मचारी इस प्रकार की लापरवाही करने का साहस न कर सके।
निलंबन आदेश के अनुसार लेखपाल नीटू यादव का मुख्यालय तहसीलदार कार्यालय, जालौन निर्धारित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान वे बिना सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। साथ ही विभागीय जांच को निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए नायब तहसीलदार, जालौन को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। जांच पूरी होने के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
जिला प्रशासन की इस कार्रवाई को सरकारी कार्यों में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि यदि शिकायतों का वास्तविक और निष्पक्ष निस्तारण नहीं होगा तो आईजीआरएस जैसी व्यवस्था का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा। इसलिए शिकायतों के समाधान में लापरवाही या फर्जी निस्तारण करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध आगे भी इसी प्रकार सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
प्रशासन ने सभी राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों को भी निर्देशित किया है कि वे आईजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त प्रत्येक शिकायत का नियमानुसार स्थल निरीक्षण, तथ्यात्मक जांच और निर्धारित समय सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करें। साथ ही शिकायतकर्ताओं से संवाद स्थापित कर उनकी संतुष्टि भी सुनिश्चित की जाए, ताकि शासन की जनकल्याणकारी व्यवस्था पर जनता का विश्वास और अधिक मजबूत हो सके।
इस कार्रवाई से स्पष्ट संदेश गया है कि जिला प्रशासन जन शिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही, फर्जीवाड़े या गैर-जिम्मेदाराना रवैये को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगा। भविष्य में भी यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा ऐसी अनियमितता सामने आती है तो उसके विरुद्ध कठोर विभागीय एवं प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस