सिंधिया राजघराने में संपत्ति विवाद का होगा अंत,40 हजार करोड़ की सिंधिया संपत्ति का विवाद खत्म होने की कगार पर, 8 जुलाई को होगा ऐतिहासिक समझौता
सिंधिया राजघराने की करीब 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति को लेकर लगभग चार दशक से चला आ रहा पारिवारिक विवाद अब समाधान की ओर बढ़ गया है।
सिंधिया राजघराने का चार दशक पुराना 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक का संपत्ति विवाद अब सुलझने जा रहा है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं के बीच हुए समझौते को ग्वालियर कोर्ट में औपचारिक रूप दिया जाएगा।
ग्वालियर। देश के सबसे प्रतिष्ठित राजघरानों में शामिल सिंधिया परिवार की करीब 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति को लेकर लगभग चार दशक से चला आ रहा पारिवारिक विवाद अब समाप्ति की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। केंद्रीय मंत्री Jyotiraditya Scindia और उनकी तीनों बुआओं—Vasundhara Raje, Yashodhara Raje Scindia तथा Usha Raje Scindia के बीच संपत्ति बंटवारे को लेकर आपसी सहमति बनने के बाद अब इस विवाद के औपचारिक समाधान की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
सूत्रों के अनुसार, 8 जुलाई को दोनों पक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से न्यायालय के समक्ष उपस्थित होकर समझौते की पुष्टि करेंगे। इसके साथ ही वर्षों से चली आ रही कानूनी लड़ाई का पटाक्षेप होने की संभावना है।
यह मामला केवल एक पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि देश के सबसे चर्चित राजघरानों में से एक की विरासत से जुड़ा मामला रहा है। लंबे समय से अदालतों में चल रही इस लड़ाई ने कई कानूनी और सामाजिक पहलुओं को जन्म दिया। अब आपसी सहमति से समाधान होने की खबर ने इस बहुचर्चित मामले को नया मोड़ दे दिया है।
न्यायालय के निर्देश के बाद बनी सहमति
जानकारी के मुताबिक, अदालत के निर्देशों के बाद दोनों पक्षों ने विवाद को आपसी समझौते से समाप्त करने का निर्णय लिया। समझौते का प्रार्थनापत्र ग्वालियर जिला न्यायालय में पहले ही प्रस्तुत किया जा चुका है। पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने पक्षकारों को राजीनामा दाखिल करने के निर्देश दिए थे और 90 दिनों के भीतर पूरे विवाद का निपटारा कर पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा था।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि निर्धारित समय सीमा में समझौते की प्रक्रिया पूरी नहीं होती है तो संबंधित याचिका को पुनः बहाल किया जा सकता है। अब 8 जुलाई को होने वाली कार्यवाही इस पूरे मामले में निर्णायक मानी जा रही है।
कैसे शुरू हुआ था विवाद
संपत्ति विवाद की शुरुआत वर्ष 1988-89 में हुई थी। उस समय स्वर्गीय Madhavrao Scindia और उनकी तीनों बहनों के बीच पैतृक संपत्ति के अधिकार को लेकर मतभेद सामने आए थे।
साल 2001 में विमान दुर्घटना में माधवराव सिंधिया के निधन के बाद भी विवाद समाप्त नहीं हुआ। इसके बाद परिवार के विभिन्न सदस्यों के बीच संपत्ति के अधिकार को लेकर कानूनी प्रक्रिया लगातार चलती रही।
2010 में बेटियों ने ठोका दावा
वर्ष 2010 में राजमाता Vijaya Raje Scindia की बेटियों—ऊषा राजे, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे ने ग्वालियर जिला न्यायालय में दावा प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि उनके पिता और ग्वालियर रियासत के अंतिम महाराज Jivajirao Scindia की पैतृक संपत्ति में बेटियों का भी समान वैधानिक अधिकार है और उन्हें उनका हिस्सा मिलना चाहिए।
इसके बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी अपने अधिकारों को लेकर अलग दावा दायर किया। दोनों मामलों की सुनवाई लंबे समय तक जिला न्यायालय में चलती रही।
2017 में हाईकोर्ट पहुंचा मामला
करीब 16 वर्षों तक चली कानूनी लड़ाई के बाद यह मामला वर्ष 2017 में Madhya Pradesh High Court पहुंचा, जहां इसे सिविल रिवीजन के रूप में दर्ज किया गया। इसके बाद समय-समय पर विभिन्न कानूनी प्रक्रियाएं चलीं और अंततः दोनों पक्ष समझौते के लिए तैयार हुए।
देशभर में फैली है हजारों करोड़ की संपत्ति
सिंधिया राजघराने की संपत्तियां देश के कई राज्यों और शहरों में फैली हुई हैं। इनकी कुल अनुमानित कीमत 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक बताई जाती है। इनमें सबसे प्रमुख Jai Vilas Palace है, जो लगभग 12.40 लाख वर्गफीट क्षेत्र में फैला हुआ है। इसकी अनुमानित कीमत करीब 10 हजार करोड़ रुपये आंकी जाती है।
इसके अलावा संपत्ति में शिवपुरी स्थित माधव विलास पैलेस, हैप्पी विलास, जार्ज कैसल कोठी, उज्जैन का Kaliyadeh Palace, दिल्ली का ग्वालियर हाउस, राजपुर रोड स्थित प्लॉट और सिंधिया विला, पुणे का पद्म विलास पैलेस, वाराणसी का Scindia Ghat, गोवा स्थित विठोबा मंदिर सहित कई ऐतिहासिक और व्यावसायिक संपत्तियां शामिल हैं।
बताया जाता है कि आजादी के समय सिंधिया परिवार की 100 से अधिक कंपनियों में हिस्सेदारी और अनेक निवेश भी इस विवाद का हिस्सा रहे हैं।
ऐतिहासिक विवाद के अंत की उम्मीद
करीब चार दशक से चले आ रहे इस विवाद का समाधान केवल सिंधिया परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि देश के सबसे चर्चित राजघरानों से जुड़े एक ऐतिहासिक कानूनी मामले के अंत के रूप में भी देखा जा रहा है। यदि 8 जुलाई को अदालत में समझौते की प्रक्रिया पूरी हो जाती है तो यह विवाद हमेशा के लिए समाप्त हो सकता है और वर्षों से लंबित संपत्ति बंटवारे का रास्ता साफ हो जाएगा।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस