दतिया में बीजेपी के टिकट पर संग्राम: नरोत्तम मिश्रा का पत्ता कटते ही सड़कों पर उतरे समर्थक, NH-44 जाम से मचा हड़कंप; जिलाध्यक्ष समेत कई नेताओं के इस्तीफे से हलचल
दतिया विधानसभा उपचुनाव से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी के अंदर असंतोष खुलकर सामने आ गया। शुक्रवार को पार्टी द्वारा आशुतोष तिवारी को प्रत्याशी घोषित करते ही सैकड़ों कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने दतिया-झांसी हाईवे पर करीब 3 किलोमीटर लंबा जाम लगा दिया। घंटे भर तक आवागमन ठप रहा।
दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए BJP ने जैसे ही पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित किया, दतिया की सियासी फिजा में भूचाल आ गया।
दतिया उपचुनाव में बीजेपी का फैसला बना बवाल: नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने से भड़के समर्थक, NH-44 जाम; कई पदाधिकारियों के इस्तीफे से बढ़ी सियासी हलचल
मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी में बड़ा राजनीतिक घमासान देखने को मिल रहा है। बीजेपी द्वारा आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद पूर्व मंत्री और दतिया के दिग्गज नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा के समर्थक खुलकर विरोध में उतर आए हैं। टिकट नहीं मिलने से नाराज कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया, झांसी-दतिया हाईवे (NH-44) को जाम कर दिया और पार्टी नेतृत्व के फैसले के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
दतिया में भाजपा के टिकट को लेकर शुरू हुआ विवाद अब संगठनात्मक संकट में बदलता नजर आ रहा है। भाजपा जिलाध्यक्ष रघुवीर सरण सहित कई पदाधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। वहीं, कई भाजपा पार्षदों के भी इस्तीफे देने की चर्चाएं सामने आ रही हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी ने स्थानीय भावनाओं और जमीनी कार्यकर्ताओं की राय को नजरअंदाज किया है।
नरोत्तम मिश्रा समर्थकों का सड़कों पर विरोध
बीजेपी की केंद्रीय चुनाव समिति की मंजूरी के बाद दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए आशुतोष तिवारी के नाम का ऐलान किया गया। इसके बाद नरोत्तम मिश्रा समर्थकों में नाराजगी फैल गई। शाम होते-होते दतिया शहर के अलग-अलग इलाकों से बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता झांसी हाईवे पर पहुंच गए और धरना शुरू कर दिया।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने "नरोत्तम मिश्रा जिंदाबाद", "टिकट बदलो" और "आशुतोष वापस जाओ" जैसे नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि दतिया विधानसभा क्षेत्र में नरोत्तम मिश्रा की मजबूत पकड़ रही है और उन्होंने लंबे समय तक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है। कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि दतिया में भाजपा की पहचान नरोत्तम मिश्रा के नेतृत्व से जुड़ी हुई है।
हाईवे पर लगा लंबा जाम, यात्री परेशान
प्रदर्शन के चलते NH-44 पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें दिखाई दीं। राहगीरों और यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रशासन को यातायात व्यवस्था संभालने के लिए मौके पर सक्रिय होना पड़ा।
प्रदर्शनकारियों का गुस्सा केवल टिकट घोषणा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने पार्टी संगठन के फैसले पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि चुनावी मैदान में ऐसे उम्मीदवार को उतारा गया है, जिसे स्थानीय कार्यकर्ता अच्छी तरह नहीं जानते।
दतिया में नरोत्तम मिश्रा का रहा है दबदबा
दतिया विधानसभा सीट को लंबे समय से बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। डॉ. नरोत्तम मिश्रा इस सीट से तीन बार विधायक रह चुके हैं और क्षेत्र की राजनीति में उनका खासा प्रभाव रहा है। हालांकि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
उपचुनाव की घोषणा के बाद नरोत्तम मिश्रा लगातार क्षेत्र में सक्रिय थे। समर्थकों का दावा था कि वे ही इस सीट पर बीजेपी को मजबूत स्थिति में ला सकते हैं। टिकट की उम्मीद के बीच उनका नाम सबसे आगे माना जा रहा था, लेकिन पार्टी ने अंतिम समय में आशुतोष तिवारी को प्रत्याशी घोषित कर दिया।
संगठन में बढ़ी नाराजगी
टिकट घोषणा के बाद भाजपा के अंदर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। जिलाध्यक्ष समेत कई पदाधिकारियों के इस्तीफे से पार्टी संगठन के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दतिया उपचुनाव में टिकट चयन का मुद्दा बीजेपी के लिए चुनावी चुनौती बन सकता है।
हालांकि पार्टी नेतृत्व ने आशुतोष तिवारी के नाम पर भरोसा जताया है। बीजेपी का कहना है कि उम्मीदवार का चयन संगठन और जीत की रणनीति को ध्यान में रखकर किया गया है।
30 जुलाई को मतदान, 3 अगस्त को आएंगे नतीजे
दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए मतदान 30 जुलाई को होगा, जबकि मतगणना और परिणाम की घोषणा 3 अगस्त को की जाएगी। अब देखने वाली बात होगी कि टिकट को लेकर शुरू हुआ यह विरोध चुनावी मैदान में कितना असर डालता है और बीजेपी अपने गढ़ को बचाने में कितनी सफल होती है।
दतिया की सियासत में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या नरोत्तम मिश्रा समर्थकों की नाराजगी चुनावी समीकरण बदल पाएगी या फिर बीजेपी का नया चेहरा पार्टी को जीत दिलाने में कामयाब होगा।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस