दुर्रानी अकादमी और अनअकैडमी सेंटर सील: फायर सुरक्षा में लापरवाही पर नगर निगम की बड़ी कार्रवाई, हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित

भोपाल नगर निगम ने फायर सेफ्टी नियमों के उल्लंघन पर MP नगर स्थित दुर्रानी अकादमी और अनअकैडमी सेंटर को सील कर दिया है. प्रशासन ने 60 अन्य कोचिंग सेंटरों और लाइब्रेरियों को भी नोटिस जारी कर सुरक्षा मानकों का पालन करने के निर्देश दिए हैं.

दुर्रानी अकादमी और अनअकैडमी सेंटर सील: फायर सुरक्षा में लापरवाही पर नगर निगम की बड़ी कार्रवाई, हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित

भोपाल नगर निगम ने फायर सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर एमपी नगर स्थित अनअकेडमी और दुर्रानी कोचिंग संस्थानों को सील कर दिया है। नोटिस के बावजूद कमियां दूर न करने पर यह कार्रवाई की गई, जिससे हजारों छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होगी।

भोपाल। राजधानी भोपाल में फायर सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वाले कोचिंग संस्थानों के खिलाफ नगर निगम ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। बुधवार को एमपी नगर स्थित दुर्रानी अकादमी और अनअकैडमी सेंटर को सील कर दिया गया। दोनों संस्थानों में फायर सेफ्टी से जुड़ी गंभीर खामियां मिलने के बाद पहले नोटिस जारी कर सुधार के लिए समय दिया गया था, लेकिन निर्धारित अवधि बीतने के बाद भी व्यवस्थाओं में अपेक्षित सुधार नहीं होने पर निगम ने भवन खाली कराकर सीलिंग की कार्रवाई की।

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब देश के विभिन्न शहरों में आगजनी की घटनाओं ने शिक्षण संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली के एक होटल और लखनऊ के एक कोचिंग संस्थान में हुई आग की घटनाओं के बाद प्रशासन ने राजधानी भोपाल में भी सुरक्षा मानकों की व्यापक जांच शुरू की थी।

नोटिस के बावजूद नहीं सुधरी व्यवस्थाएं

नगर निगम ने 25 जून को दोनों संस्थानों सहित शहर के 40 से अधिक कोचिंग सेंटरों को नोटिस जारी किए थे। इन संस्थानों में फायर सुरक्षा से जुड़ी कई गंभीर कमियां पाई गई थीं। निगम ने सात दिन के भीतर सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद बुधवार को दोबारा निरीक्षण किया गया, लेकिन दुर्रानी अकादमी और अनअकैडमी सेंटर में अधिकांश खामियां जस की तस मिलीं।

स्थिति को गंभीर मानते हुए नगर निगम के अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों कोचिंग संस्थानों को खाली कराया और भवनों को सील कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।

अनअकैडमी सेंटर में मिलीं कई गंभीर खामियां

निरीक्षण के दौरान अनअकैडमी सेंटर में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर पाई गई। अधिकारियों के अनुसार संस्थान में आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) की समुचित व्यवस्था नहीं थी। आग लगने की स्थिति में विद्यार्थियों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध नहीं था।

इसके अलावा मैनुअल कॉल प्वाइंट (एमसीपी) बंद मिले, जिससे आपात स्थिति में तुरंत अलार्म सक्रिय करना संभव नहीं था। फायर हाइड्रेंट ऑटो मोड पर संचालित नहीं हो रहा था और उसे जनरेटर से भी नहीं जोड़ा गया था। भवन के कई हिस्सों में पर्याप्त वेंटिलेशन नहीं था, जिससे धुआं भरने की स्थिति में खतरा और बढ़ सकता था। वहीं अग्निशमन यंत्रों की वैधता भी समाप्त हो चुकी थी।

दुर्रानी अकादमी में भी सामने आई लापरवाही

दुर्रानी अकादमी में भी निरीक्षण के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं मिलीं। यहां लगे अग्निशमन यंत्रों की वैधता समाप्त हो चुकी थी। फायर हाइड्रेंट का जल कनेक्शन बंद था और उसका उपयोग अन्य कार्यों के लिए किया जा रहा था।

निरीक्षण में यह भी सामने आया कि भवन में आपातकालीन सीढ़ियों की व्यवस्था नहीं थी। ऊपरी मंजिलों पर पर्याप्त वेंटिलेशन का अभाव पाया गया, जिससे किसी भी आपात स्थिति में विद्यार्थियों के सुरक्षित बाहर निकलने में कठिनाई हो सकती थी।

शहरभर में चला विशेष जांच अभियान

फायर सुरक्षा को लेकर नगर निगम ने हाल ही में शहर के विभिन्न कोचिंग संस्थानों का विशेष निरीक्षण अभियान चलाया। जांच के दौरान कई संस्थानों में फायर सिस्टम बंद मिले। कई जगह अग्निशमन उपकरण अनुपयोगी पाए गए, जबकि अनेक भवनों में आपातकालीन निकास की समुचित व्यवस्था नहीं थी।

नगर निगम ने इन कमियों को गंभीर मानते हुए 40 से अधिक कोचिंग संस्थानों को नोटिस जारी किए और निर्धारित समय सीमा के भीतर सुधार करने के निर्देश दिए। कई संस्थानों ने सुधार कार्य शुरू कर दिए, लेकिन कुछ संस्थानों ने लापरवाही बरती, जिसके चलते अब उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।

विद्यार्थियों और अभिभावकों की बढ़ी चिंता

दोनों प्रमुख कोचिंग संस्थानों के सील होने से हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका है। दुर्रानी अकादमी और अनअकैडमी सेंटर में प्रतिदिन लगभग दो से तीन हजार विद्यार्थी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं।

कोचिंग बंद होने से नियमित कक्षाएं, टेस्ट सीरीज, डाउट सेशन और परीक्षा की तैयारी प्रभावित हो सकती है। कई अभिभावकों ने चिंता जताई कि बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं होनी चाहिए, लेकिन साथ ही उनका कहना है कि सुरक्षा से समझौता भी स्वीकार्य नहीं है। उनका मानना है कि संस्थानों को समय रहते सभी सुरक्षा मानकों का पालन करना चाहिए था।

सुरक्षा को लेकर प्रशासन का सख्त संदेश

नगर निगम अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई केवल दो संस्थानों तक सीमित नहीं रहेगी। जिन कोचिंग संस्थानों, स्कूलों, व्यावसायिक भवनों या अन्य प्रतिष्ठानों में फायर सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया जाएगा, उनके खिलाफ भी इसी प्रकार की कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन का कहना है कि भवनों में फायर अलार्म, अग्निशमन यंत्र, फायर हाइड्रेंट, इमरजेंसी एग्जिट, पर्याप्त वेंटिलेशन और नियमित सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य केवल नियमों का पालन करना नहीं, बल्कि किसी भी दुर्घटना की स्थिति में लोगों की जान बचाना है।

राजधानी में कोचिंग संस्थानों की बड़ी संख्या

भोपाल में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले कोचिंग संस्थानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अनुमानित रूप से शहर में 300 से अधिक कोचिंग संस्थान संचालित हैं, जहां करीब ढाई लाख विद्यार्थी विभिन्न परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।

इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन और संस्थानों दोनों की जिम्मेदारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल आधुनिक भवन बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनमें फायर सुरक्षा के सभी मानकों का पालन भी अनिवार्य होना चाहिए।

आगे भी जारी रहेगा अभियान

नगर निगम ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में शहरभर के अन्य कोचिंग संस्थानों, व्यावसायिक भवनों और सार्वजनिक परिसरों का भी निरीक्षण किया जाएगा। जिन संस्थानों में सुरक्षा संबंधी कमियां पाई जाएंगी, उनके खिलाफ नोटिस, जुर्माना और आवश्यकता पड़ने पर सीलिंग जैसी कार्रवाई भी की जाएगी।

प्रशासन का कहना है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वहीं अभिभावकों को भी सलाह दी गई है कि वे अपने बच्चों के कोचिंग संस्थानों में उपलब्ध सुरक्षा व्यवस्थाओं के प्रति जागरूक रहें और आवश्यक होने पर संबंधित अधिकारियों को जानकारी दें।