दतिया उपचुनाव: भाजपा में टिकट को लेकर बढ़ी हलचल, मुकेश मुड़ोतिया ने ठोकी दावेदारी; 13 साल बाद नरोत्तम मिश्रा के गढ़ में खुली चुनौती

दतिया उपचुनाव से पहले भाजपा में टिकट को लेकर हलचल तेज है। पूर्व भाजयुमो जिलाध्यक्ष मुकेश मुड़ोतिया ने राष्ट्रीय नेतृत्व से टिकट मांगकर डॉ. नरोत्तम मिश्रा को चुनौती दी है। उन्होंने स्थानीय उम्मीदवार की पैरवी की है, जबकि नरोत्तम मिश्रा का नाम अब भी सबसे मजबूत दावेदारों में माना जा रहा है।

दतिया उपचुनाव: भाजपा में टिकट को लेकर बढ़ी हलचल, मुकेश मुड़ोतिया ने ठोकी दावेदारी; 13 साल बाद नरोत्तम मिश्रा के गढ़ में खुली चुनौती

भाजपा में दतिया उपचुनाव को लेकर टिकट की दौड़ तेज, पूर्व BJYM जिला अध्यक्ष पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को पत्र लिखकर मांगा टिकट।

दतिया। मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। लंबे समय से यह माना जा रहा था कि भाजपा की ओर से पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम लगभग तय है, लेकिन अब पार्टी के भीतर से ही एक नई दावेदारी सामने आने के बाद चुनावी समीकरणों पर चर्चा शुरू हो गई है। भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के पूर्व जिला अध्यक्ष मुकेश मुड़ोतिया ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को पत्र लिखकर दतिया विधानसभा सीट से टिकट की औपचारिक मांग की है।

मुड़ोतिया की इस पहल को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि वर्ष 2008 के बाद पहली बार डॉ. नरोत्तम मिश्रा के प्रभाव वाले दतिया क्षेत्र में किसी भाजपा नेता ने सार्वजनिक रूप से टिकट की दावेदारी पेश की है। इससे भाजपा के अंदर स्थानीय नेतृत्व और बाहरी चेहरे को लेकर बहस भी तेज हो गई है।

शीर्ष नेतृत्व को भेजा पत्र

मुकेश मुड़ोतिया ने 6 जुलाई को पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को पत्र भेजकर अपनी दावेदारी रखी। पत्र राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, केंद्रीय संसदीय बोर्ड के सदस्य भूपेंद्र यादव, सत्यनारायण जटिया, राष्ट्रीय संगठन महासचिव बीएल संतोष, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल तथा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं को संबोधित किया गया है।

पत्र में उन्होंने आग्रह किया कि दतिया जैसी महत्वपूर्ण सीट पर इस बार किसी स्थानीय और लंबे समय से संगठन के लिए कार्य कर रहे कार्यकर्ता को अवसर दिया जाए।

स्थानीय बनाम बाहरी उम्मीदवार का मुद्दा

अपने पत्र में मुड़ोतिया ने स्थानीय बनाम बाहरी प्रत्याशी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने लिखा कि जिस चेहरे को टिकट दिए जाने की चर्चा चल रही है, वह दतिया का स्थायी निवासी नहीं है। ऐसे में पार्टी को ऐसे व्यक्ति पर भरोसा करना चाहिए, जो वर्षों से क्षेत्र में सक्रिय हो और जनता के बीच लगातार काम करता रहा हो।

उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय कार्यकर्ता को टिकट मिलता है तो इससे संगठन के समर्पित कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और जनता के बीच भी सकारात्मक संदेश जाएगा कि भाजपा अपने जमीनी कार्यकर्ताओं को सम्मान देती है।

चार दशक की संगठनात्मक सक्रियता का हवाला

मुकेश मुड़ोतिया ने अपनी दावेदारी को मजबूत बनाने के लिए पार्टी में अपने लंबे राजनीतिक और संगठनात्मक अनुभव का भी उल्लेख किया है। उन्होंने बताया कि वे लगभग चार दशक से भाजपा से जुड़े हुए हैं और संगठन के लिए लगातार कार्य करते रहे हैं।

उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि वर्ष 2000 से 2005 तक लगातार दो कार्यकाल के लिए भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष के रूप में सफलतापूर्वक दायित्व निभाया। इस दौरान संगठन विस्तार, सदस्यता अभियान और विभिन्न आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई।

दूसरे राज्यों में भी निभाई जिम्मेदारी

मुड़ोतिया ने यह भी बताया कि उन्हें उत्तर प्रदेश और हरियाणा विधानसभा चुनावों में प्रवासी सह प्रभारी के रूप में पार्टी ने जिम्मेदारी सौंपी थी। उन्होंने दावा किया कि उन चुनावों में संगठन को मजबूत करने और पार्टी की जीत सुनिश्चित करने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने कहा कि पार्टी ने जब भी जिम्मेदारी दी, उसे पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निभाया। इसलिए अब उन्हें दतिया से चुनाव लड़ने का अवसर मिलना चाहिए।

सामाजिक कार्यों का भी दिया ब्यौरा

पत्र में मुड़ोतिया ने केवल राजनीतिक अनुभव ही नहीं, बल्कि अपने सामाजिक कार्यों का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि वर्षों से वे क्षेत्र में जनसेवा, सामाजिक गतिविधियों और लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए सक्रिय रहे हैं।

उनका कहना है कि जनता के बीच लगातार रहने और स्थानीय मुद्दों पर काम करने के कारण उन्हें क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं की बेहतर जानकारी है।

भाजपा में पहली खुली दावेदारी

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि वर्ष 2008 के बाद पहली बार दतिया में भाजपा के भीतर से किसी नेता ने इस तरह खुलकर टिकट की मांग की है। अब तक डॉ. नरोत्तम मिश्रा का इस क्षेत्र में मजबूत प्रभाव माना जाता रहा है और टिकट को लेकर शायद ही कभी खुला विरोध या वैकल्पिक दावेदारी सामने आई हो।

ऐसे में मुकेश मुड़ोतिया की पहल को भाजपा के अंदर बदलते राजनीतिक समीकरणों के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।

नरोत्तम मिश्रा अब भी सबसे मजबूत दावेदार

हालांकि, पार्टी सूत्रों का कहना है कि भाजपा उम्मीदवार के रूप में पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम अभी भी सबसे मजबूत माना जा रहा है। वे लगातार दतिया क्षेत्र में सक्रिय हैं और कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क बनाए हुए हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी नेतृत्व जीत की संभावना, संगठनात्मक समीकरण और क्षेत्रीय प्रभाव को ध्यान में रखकर अंतिम फैसला करेगा।

प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा— टिकट मांगना हर कार्यकर्ता का अधिकार

भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष रणवीर सिंह रावत ने मुकेश मुड़ोतिया की दावेदारी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी का प्रत्येक कार्यकर्ता टिकट मांग सकता है और यह उसका लोकतांत्रिक अधिकार है।

उन्होंने कहा कि अंतिम निर्णय पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व करता है। उम्मीदवार का चयन संगठन, जीत की संभावना, राजनीतिक परिस्थितियों और विभिन्न पहलुओं का आकलन करने के बाद किया जाता है।

कांग्रेस भी बढ़ा रही सक्रियता

दूसरी ओर कांग्रेस ने अभी तक अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है, लेकिन संभावित दावेदार लगातार जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं। पार्टी के कई नेता क्षेत्र में सक्रिय होकर कार्यकर्ताओं और मतदाताओं से संपर्क साध रहे हैं।

कांग्रेस की रणनीति स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की है, जबकि भाजपा अपने संगठनात्मक नेटवर्क और नेतृत्व के अनुभव के सहारे चुनावी तैयारी कर रही है।

सड़कों पर उतर चुका चुनावी माहौल

हालांकि दोनों प्रमुख दलों ने अभी अपने प्रत्याशियों की औपचारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन दतिया में चुनावी माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका है। भाजपा और कांग्रेस दोनों के संभावित उम्मीदवार लगातार जनसंपर्क, बैठकें और कार्यकर्ता सम्मेलन कर रहे हैं।

भाजपा के भीतर मुकेश मुड़ोतिया की दावेदारी ने टिकट को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है, वहीं डॉ. नरोत्तम मिश्रा की सक्रियता भी लगातार बनी हुई है। अब सभी की नजर पार्टी हाईकमान के अंतिम फैसले पर टिकी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा अनुभव और संगठनात्मक प्रभाव को प्राथमिकता देती है या स्थानीय कार्यकर्ता को मौका देकर नया राजनीतिक संदेश देने की कोशिश करती है।