दतिया उपचुनाव में कांग्रेस में टिकट को लेकर घमासान: मंच पर छलका 2023 का दर्द, कई दिग्गज दावेदार, बंद कमरे की बैठक में प्रत्याशी पर मंथन
विधानसभा उपचुनाव को लेकर आज (शनिवार) होने वाले कांग्रेस के विशाल कार्यकर्ता सम्मेलन के लिए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी दोपहर करीब दो बजे दतिया की मोटल होटल पहुंच गए। इस दौरान दोनों ने कार्यकर्ताओं का अभिनंदन किया। निर्धारित कार्यक्रम समय से दोनों नेता करीब 4 घंटे की देरी इस कार्यक्रम में पहुंचे।
दोनों नेता अपने निर्धारित समय से करीब साढ़े तीन घंटे की देरी से कार्यक्रम स्थल पहुंचे, लेकिन उनके आगमन की सूचना मिलते ही कांग्रेस कार्यकर्ता सम्मेलन स्थल पर भारी संख्या में जुट गए।
दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर कांग्रेस में सियासी हलचल तेज हो गई है। टिकट की दौड़ में कई बड़े नेताओं के उतरने से पार्टी के भीतर गुटबाजी और अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आने लगी है। इसी बीच संगठन को एकजुट करने और चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने के उद्देश्य से दतिया में कांग्रेस का बड़ा कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया गया, जहां नेताओं के भाषणों के साथ-साथ 2023 विधानसभा चुनाव में टिकट कटने का दर्द भी मंच से खुलकर सामने आया।
यह सम्मेलन पहले गुरुवार को प्रस्तावित था, लेकिन प्रदेश स्तर के दिग्गज नेताओं की मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए इसकी तारीख बदली गई। सम्मेलन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव और सांसद अशोक सिंह के शामिल होने की चर्चा रही। पार्टी नेतृत्व का उद्देश्य स्पष्ट था कि उपचुनाव से पहले संगठन की नाराजगी दूर कर कार्यकर्ताओं को एकजुट किया जाए।
टिकट की दौड़ में कई दावेदार
दतिया उपचुनाव के लिए कांग्रेस में टिकट के कई दावेदार सामने आए हैं। पूर्व विधायक घनश्याम सिंह और पूर्व राज्य मंत्री अवधेश नायक का नाम सबसे प्रमुख माना जा रहा है। इसके अलावा पूर्व विधायक राजेंद्र भारती के परिवार की ओर से भी टिकट की मजबूत दावेदारी की जा रही है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष अशोक दांगी बगदा और शहर कांग्रेस अध्यक्ष अजय शुक्ला भी अपनी-अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं।
इसी वजह से पार्टी के भीतर लगातार बैठकों और रणनीतिक चर्चाओं का दौर जारी है। माना जा रहा है कि अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व की सहमति से होगा।
मंच से फिर छलका अवधेश नायक का दर्द
कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान सबसे अधिक चर्चा पूर्व राज्य मंत्री अवधेश नायक के बयान की रही। उन्होंने सार्वजनिक मंच से 2023 विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि उनका टिकट लगभग तय हो चुका था, लेकिन अंतिम समय में परिस्थितियां बदल गईं।
अवधेश नायक ने कहा कि पूरा दतिया जानता है कि उनका टिकट किस तरह काटा गया था। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी इस बार जिसे भी उम्मीदवार बनाएगी, वह पूरी निष्ठा से कांग्रेस के लिए काम करेंगे और भाजपा को हराने का प्रयास करेंगे।
उनके इस बयान के बाद एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में 2023 के टिकट विवाद की चर्चा तेज हो गई।
2023 का टिकट विवाद फिर बना चर्चा का विषय
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में अंतिम समय पर बड़ा घटनाक्रम हुआ था। चर्चा रही कि राजेंद्र भारती ने अंतिम समय में पार्टी का चुनाव चिन्ह हासिल कर लिया था, जबकि अवधेश नायक टिकट मिलने की उम्मीद लगाए बैठे थे।
इसी वजह से इस बार अवधेश नायक पूरी ताकत से अपनी दावेदारी मजबूत करने में लगे हुए हैं। माना जा रहा है कि उन्होंने संगठन के भीतर भी व्यापक स्तर पर समर्थन जुटाने की कोशिश तेज कर दी है।
घनश्याम सिंह ने दिया एकजुटता का संदेश
पूर्व विधायक घनश्याम सिंह ने सम्मेलन के दौरान संतुलित बयान दिया। उन्होंने कहा कि उनकी व्यक्तिगत इच्छा चुनाव लड़ने की नहीं है, लेकिन यदि पार्टी उन्हें जिम्मेदारी सौंपती है तो वह पूरी निष्ठा से चुनाव लड़ेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि टिकट पर सबसे पहले अधिकार राजेंद्र भारती के परिवार और अवधेश नायक का बनता है। साथ ही उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस जिसे भी उम्मीदवार बनाएगी, वह उसके समर्थन में पूरी ताकत से काम करेंगे।
कार्यकर्ता सम्मेलन में संगठन की कमजोरी भी उजागर
सम्मेलन के दौरान केवल टिकट की राजनीति ही नहीं, बल्कि संगठन की कमजोरियां भी खुलकर सामने आईं। वरिष्ठ कांग्रेस नेता राजू दांगी ने मंच से ही बूथ स्तर पर पार्टी की स्थिति पर सवाल उठा दिए।
उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद बूथ अध्यक्षों की गिनती कराई, जिसकी संख्या बेहद कम निकली। इस पर उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री की मौजूदगी में कहा कि चुनाव के समय कार्यकर्ताओं को याद किया जाता है, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद उनकी कोई सुध नहीं ली जाती।
राजू दांगी ने कहा कि यदि बूथ स्तर पर संगठन मजबूत नहीं होगा तो चुनाव जीतना आसान नहीं होगा। उनके बयान को सम्मेलन का सबसे स्पष्ट संगठनात्मक संदेश माना जा रहा है।
राजेंद्र भारती दिल्ली में, 8 जुलाई को अहम सुनवाई
इधर पूर्व विधायक राजेंद्र भारती इन दिनों दिल्ली में डेरा जमाए हुए हैं। उनके मामले में 8 जुलाई को हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है। अदालत ने निर्वाचन आयोग से जवाब भी तलब किया है।
इसी वजह से वे लंबे समय से दतिया में आयोजित कांग्रेस की बैठकों और कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो पाए हैं। जिला कांग्रेस अध्यक्ष अशोक दांगी ने बताया कि राजेंद्र भारती का दिल्ली में ऑपरेशन हुआ है और स्वास्थ्य में सुधार के बाद वे जल्द ही पार्टी गतिविधियों में सक्रिय होंगे।
बंद कमरे की बैठक में प्रत्याशी पर मंथन
कांग्रेस नेतृत्व ने सभी पदाधिकारियों, मोर्चा संगठनों और कार्यकर्ताओं को सुबह 10:30 बजे मोटल होटल पहुंचने के निर्देश दिए थे। सम्मेलन के बाद वरिष्ठ नेताओं की बंद कमरे में बैठक भी हुई, जिसमें दतिया उपचुनाव की रणनीति और संभावित प्रत्याशी के नाम पर विस्तार से चर्चा की गई।
पार्टी सूत्रों का मानना है कि कांग्रेस अब जल्द ही उम्मीदवार के नाम पर अंतिम निर्णय ले सकती है ताकि चुनाव प्रचार समय रहते शुरू किया जा सके।
भाजपा को घेरने की तैयारी
कांग्रेस नेतृत्व का पूरा प्रयास है कि टिकट वितरण के बाद किसी भी तरह की नाराजगी सामने न आए। यही कारण है कि सभी प्रमुख दावेदारों से संगठन के प्रति प्रतिबद्ध रहने का संदेश दिलवाया गया। मंच से लगभग सभी नेताओं ने कहा कि पार्टी जिसे भी उम्मीदवार बनाएगी, सभी मिलकर भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे।
हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि टिकट घोषित होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कांग्रेस वास्तव में गुटबाजी पर नियंत्रण पाने में सफल हुई है या नहीं। फिलहाल दतिया उपचुनाव में कांग्रेस का सबसे बड़ा संघर्ष भाजपा से पहले अपने संगठन को पूरी तरह एकजुट रखने का माना जा रहा है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस