दतिया उपचुनाव: राजेंद्र भारती के बयान से बदले कांग्रेस के समीकरण, अवधेश नायक-घनश्याम सिंह की दावेदारी तेज

कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती ने पार्टी हाईकमान से आग्रह किया है कि यदि पार्टी चाहे तो उनके परिवार के बजाय किसी अन्य नेता को उम्मीदवार बनाया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि पार्टी जिस भी उम्मीदवार को मैदान में उतारेगी, वह उसके समर्थन में पूरी ताकत से चुनाव प्रचार करेंगे।

दतिया उपचुनाव: राजेंद्र भारती के बयान से बदले कांग्रेस के समीकरण, अवधेश नायक-घनश्याम सिंह की दावेदारी तेज

अब उपचुनाव में कांग्रेस किस चेहरे पर दांव लगाएगी, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। वहीं भाजपा ने भी अभी तक अपने प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है, जिससे दतिया का राजनीतिक मुकाबला और रोचक होता जा रहा है।

दतिया। मध्यप्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां लगातार तेज होती जा रही हैं। मतदान की तारीख 30 जुलाई तय होने और नामांकन की अंतिम तिथि 13 जुलाई नजदीक आने के बावजूद कांग्रेस और भाजपा दोनों ने अब तक अपने अधिकृत उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है। इसी बीच कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती के एक बड़े बयान ने पार्टी के अंदर चल रही संभावित दावेदारियों और चुनावी समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है।

राजेंद्र भारती ने साफ शब्दों में कहा है कि टिकट मिलना उनकी व्यक्तिगत इच्छा या शर्त नहीं है। उन्होंने पार्टी हाईकमान से कहा है कि यदि उनके परिवार के बजाय कोई दूसरा उम्मीदवार जीत दिलाने में अधिक सक्षम है तो पार्टी उसे टिकट दे सकती है। उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण कांग्रेस की जीत है, न कि परिवार या व्यक्तिगत दावेदारी।

पार्टी नेतृत्व के फैसले के साथ खड़े रहने का भरोसा

राजेंद्र भारती ने कहा कि कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है और उम्मीदवार तय करने का अधिकार पार्टी नेतृत्व को है। उन्होंने कहा कि जरूरी नहीं है कि टिकट उनकी इच्छा के अनुसार ही दिया जाए। यदि हाईकमान किसी अन्य नेता पर भरोसा जताता है तो वह उसका पूरी निष्ठा के साथ समर्थन करेंगे।

उन्होंने कहा, "मैंने पार्टी नेतृत्व से स्पष्ट कहा है कि मेरे परिवार के बजाय यदि कोई और उम्मीदवार ज्यादा मजबूत है तो उसे मौका दिया जाए। मेरा उद्देश्य केवल कांग्रेस की जीत सुनिश्चित करना है। पार्टी जिसका भी चयन करेगी, मैं तन, मन और धन से उसके साथ खड़ा रहूंगा।"

राजेंद्र भारती के इस बयान को कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक एकता और चुनावी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इससे टिकट को लेकर संभावित गुटबाजी कम करने का संदेश भी गया है।

कांग्रेस में नए नामों की चर्चा तेज

राजेंद्र भारती के इस रुख के बाद कांग्रेस में अब दो प्रमुख नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। इनमें मध्य प्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम के पूर्व उपाध्यक्ष अवधेश नायक और दतिया के पूर्व विधायक घनश्याम सिंह प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार पार्टी इन दोनों नेताओं के सामाजिक समीकरण, संगठन में पकड़ और चुनाव जीतने की क्षमता का आकलन कर रही है। कांग्रेस नेतृत्व इस बार ऐसा उम्मीदवार उतारना चाहता है जो भाजपा को कड़ी टक्कर दे सके।

गौरतलब है कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान अवधेश नायक को टिकट दिए जाने के बाद पार्टी के भीतर विरोध की स्थिति बनी थी, जिसके चलते अंतिम समय में बदलाव करना पड़ा था। हालांकि उपचुनाव की परिस्थितियां अलग हैं और इस बार अवधेश नायक का नाम फिर से गंभीरता से लिया जा रहा है।

भाजपा ने भी नहीं खोले पत्ते

दूसरी ओर भाजपा ने भी अभी तक अपने उम्मीदवार की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। हालांकि पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम लगातार चर्चाओं में बना हुआ है, लेकिन पार्टी ने अभी अंतिम फैसला सार्वजनिक नहीं किया है।

दोनों प्रमुख दलों द्वारा उम्मीदवार घोषित करने में हो रही देरी ने दतिया उपचुनाव को और अधिक रोचक बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दोनों दल पहले एक-दूसरे की रणनीति और सामाजिक समीकरणों का आकलन कर रहे हैं, जिसके बाद उम्मीदवारों के नाम घोषित किए जाएंगे।

नामांकन प्रक्रिया जारी, 9 लोगों ने खरीदे फॉर्म

दतिया में नामांकन प्रक्रिया लगातार जारी है और तहसील कार्यालय चुनावी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। अब तक तीन दिनों के भीतर कुल नौ लोगों ने नामांकन पत्र खरीदे हैं।

तीसरे दिन पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के अलावा बालकिशन विश्वकर्मा, वेदराम कुर्मी और हंशमुखी लोधी ने नामांकन पत्र लिया। इससे पहले आजाद समाज पार्टी के दामोदर यादव और केशव यादव भी फॉर्म खरीद चुके हैं।

कांग्रेस की ओर से अवधेश नायक, हरदास बघेल और रामसिंह ने भी नामांकन पत्र खरीदे हैं। हालांकि अब तक किसी भी उम्मीदवार ने अपना नामांकन दाखिल नहीं किया है।

13 जुलाई तक दाखिल करने होंगे नामांकन

निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 13 जुलाई निर्धारित की गई है। ऐसे में राजनीतिक दलों के पास उम्मीदवार तय करने के लिए बहुत कम समय बचा है।

माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों के भीतर भाजपा और कांग्रेस दोनों अपने-अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर देंगे। उम्मीदवार घोषित होते ही चुनाव प्रचार भी पूरी रफ्तार पकड़ लेगा।

जातीय समीकरणों पर दोनों दलों की नजर

दतिया विधानसभा सीट पर जातीय और सामाजिक समीकरण हमेशा से चुनाव परिणामों को प्रभावित करते रहे हैं। यही कारण है कि कांग्रेस और भाजपा दोनों ही उम्मीदवार चयन में बेहद सावधानी बरत रहे हैं।

कांग्रेस जहां संगठन और स्थानीय नेतृत्व के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है, वहीं भाजपा भी जीत सुनिश्चित करने के लिए ऐसा चेहरा तलाश रही है जो सभी वर्गों में स्वीकार्य हो।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि उम्मीदवार चयन में स्थानीय लोकप्रियता, संगठन में पकड़, जातीय संतुलन और पिछले चुनावों का प्रदर्शन महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।

कांग्रेस के लिए एकजुटता का संदेश

राजेंद्र भारती के बयान को कांग्रेस के भीतर एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। आमतौर पर टिकट वितरण के समय असंतोष और विरोध की स्थिति बनती है, लेकिन भारती ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि उनके लिए पार्टी की जीत सबसे महत्वपूर्ण है।

यदि कांग्रेस इस एकजुटता को चुनाव मैदान तक बनाए रखने में सफल रहती है तो इसका लाभ उसे चुनाव में मिल सकता है।

दतिया में बढ़ी चुनावी हलचल

जैसे-जैसे नामांकन की अंतिम तिथि करीब आ रही है, दतिया का राजनीतिक माहौल गर्माता जा रहा है। कार्यकर्ता अपने-अपने नेताओं के नामों को लेकर सक्रिय हैं, जबकि आम जनता भी दोनों प्रमुख दलों की पहली सूची का इंतजार कर रही है।

अब सबकी निगाहें कांग्रेस हाईकमान और भाजपा नेतृत्व के अंतिम फैसले पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों दल किस उम्मीदवार पर भरोसा जताते हैं और दतिया विधानसभा उपचुनाव में मुख्य मुकाबला किन चेहरों के बीच होता है। उम्मीदवारों की घोषणा के बाद चुनाव प्रचार नई गति पकड़ेगा और राजनीतिक तस्वीर पहले से अधिक स्पष्ट हो जाएगी।