CM मोहन यादव के लोकार्पण के दो दिन बाद बह गई 3.93 करोड़ की सड़क, पहली बारिश में खुली निर्माण गुणवत्ता की पोल

सिवनी जिले के केवलारी विकासखंड में मोहबर्रा-सारसडोल के बीच लगभग 3.93 करोड़ रुपये की लागत से बनी 3 किमी लंबी डामरीकृत सड़क मुख्यमंत्री Mohan Yadav द्वारा 1 जुलाई को लोकार्पित किए जाने के महज दो दिन बाद 2 जुलाई की तेज बारिश में बह गई। पुलिया सहित सड़क का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त होने से कई गांवों का संपर्क टूट गया और आवागमन बंद हो गया।

CM मोहन यादव के लोकार्पण के दो दिन बाद बह गई 3.93 करोड़ की सड़क, पहली बारिश में खुली निर्माण गुणवत्ता की पोल

सड़क में पानी निकासी के लिए डाले गए सीमेंट पाइप सहित पूरी सड़क का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त होने से 3 किमी लंबी सड़क दो हिस्सों में बंट गई

सिवनी। मध्यप्रदेश के सिवनी जिले के केवलारी विकासखंड में करोड़ों रुपये की लागत से बनी एक नई सड़क पहली ही तेज बारिश में क्षतिग्रस्त हो गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 1 जुलाई को जिस मोहबर्रा–सारसडोल मार्ग का लोकार्पण किया गया था, वह 2 जुलाई की मूसलाधार बारिश के दौरान कई जगह से टूट गया। करीब 3 करोड़ 93 लाख रुपये की लागत से तैयार इस सड़क का बड़ा हिस्सा पानी के तेज बहाव में बह जाने से क्षेत्र के कई गांवों का संपर्क टूट गया और निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा स्वीकृत यह सड़क लगभग तीन किलोमीटर लंबी है। सड़क का निर्माण कार्य बारिश शुरू होने से लगभग एक माह पहले पूरा किया गया था। लेकिन मानसून की पहली ही तेज बारिश सड़क के लिए भारी साबित हुई। खेतों से निकले पानी का दबाव बढ़ने पर सड़क के नीचे डाली गई सीमेंट पाइप पुलिया टूट गई और उसके साथ सड़क का बड़ा हिस्सा भी बह गया। इससे सड़क दो हिस्सों में बंट गई और आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया।

मुख्यमंत्री ने किया था लोकार्पण

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 1 जुलाई को सिवनी में आयोजित धान महोत्सव कार्यक्रम के दौरान लगभग 500 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का भूमिपूजन और लोकार्पण किया था। इन्हीं परियोजनाओं में मोहबर्रा–सारसडोल मार्ग भी शामिल था। इसके अलावा दौंदीवाड़ा–बरटोला–ओखाटोला–अमुरला मार्ग तथा पांडिया छपारा–जेवनारा मार्ग का भी लोकार्पण किया गया था।

हालांकि लोकार्पण के महज दो दिन बाद सड़क के क्षतिग्रस्त होने से शासन की निर्माण गुणवत्ता और विभागीय निगरानी दोनों पर सवाल उठने लगे हैं।

कई गांवों का संपर्क टूटा

सड़क टूटने से आसपास के कई गांवों के बीच सीधा संपर्क समाप्त हो गया है। ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के कारण वैकल्पिक रास्ते भी प्रभावित हैं, जिससे किसानों, विद्यार्थियों और आम लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण के दौरान पानी निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई। खेतों का पानी सड़क पर जमा होता रहा और आखिरकार तेज बहाव ने पूरी संरचना को नुकसान पहुंचा दिया।

निर्माणाधीन पुल से पहले टूटी सड़क

जिस स्थान पर सड़क बही है, वहां से लगभग 200 मीटर दूर नदी पर करीब एक करोड़ रुपये की लागत से चार मीटर ऊंचे पुल का निर्माण कार्य अभी जारी है। पुल बनने तक पानी निकासी के लिए सीमेंट पाइप डालकर उसके ऊपर सड़क बनाई गई थी। लगातार बारिश के बाद खेतों का पानी तेजी से बहा और पाइप दबाव नहीं झेल सके। परिणामस्वरूप पाइपों के साथ सड़क का बड़ा हिस्सा भी बह गया।

ठेकेदार ने दी सफाई

इस सड़क निर्माण का ठेका बालाघाट जिले के लामता निवासी ठेकेदार आशीष जायसवाल को दिया गया था। सड़क क्षतिग्रस्त होने के बाद ठेकेदार ने सफाई देते हुए कहा कि जहां सीमेंट पाइप डाले गए थे, वह कार्य मूल निर्माण स्टीमेट में स्वीकृत नहीं था। विभाग द्वारा जितना कार्य स्वीकृत किया गया था, उसी के अनुरूप निर्माण कराया गया। उन्होंने कहा कि किसानों की मांग पर वहां अस्थायी व्यवस्था की गई थी।

किसानों को भी हुआ नुकसान

सड़क टूटने का असर केवल यातायात तक सीमित नहीं रहा। क्षेत्रीय किसानों का कहना है कि पानी के तेज बहाव में सीमेंट पाइप बहने से उनके खेतों के तालाब टूट गए और खरीफ की फसल पानी में डूबकर खराब हो गई। कई किसानों ने आर्थिक नुकसान की बात कही है।

ग्राम मोहबर्रा के लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण के दौरान उचित नाली और जल निकासी की व्यवस्था नहीं की गई, जिसके कारण बारिश का पानी गांव में भर गया। कई घरों में पानी घुसने से घरेलू सामान और अन्य संपत्ति को भी नुकसान पहुंचा है।

गुणवत्ता और तकनीकी मापदंडों पर सवाल

सड़क के पहली ही बारिश में बह जाने से लोक निर्माण विभाग के तकनीकी मापदंडों और निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप किया गया होता तो सड़क इतनी जल्दी क्षतिग्रस्त नहीं होती।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण के दौरान निगरानी में लापरवाही बरती गई और पानी निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं बनाई गई। यदि पर्याप्त संख्या में पुलिया और नालियां बनाई जातीं तो यह स्थिति नहीं बनती।

अधिकारियों से नहीं हो सका संपर्क

मामले में केवलारी अनुविभाग के सहायक यंत्री राजगुरू चौबे से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने मोबाइल कॉल रिसीव नहीं की। विभाग की ओर से घटना पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

जांच और कार्रवाई की मांग

घटना के बाद क्षेत्रवासियों ने पूरे निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़क दो दिन भी नहीं टिक सकी, जिससे सरकारी धन की बर्बादी और निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होते हैं।

ग्रामीणों ने दोषी अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करने के साथ-साथ सड़क का पुनर्निर्माण गुणवत्ता मानकों के अनुसार कराने की मांग की है। उनका कहना है कि मानसून अभी शुरुआती दौर में है और यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में क्षेत्र के लोगों की परेशानियां और बढ़ सकती हैं।

सड़क के क्षतिग्रस्त होने की यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाली सरकारी परियोजनाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है। पहली ही बारिश में सड़क का बह जाना न केवल निर्माण कार्य की खामियों को उजागर करता है, बल्कि भविष्य