राम मंदिर दान विवाद पर मायावती का बड़ा बयान: 'सपा, कांग्रेस और AAP से गबन के सबूत लेने चाहिए', बद्रीनाथ मामले की भी निष्पक्ष जांच की मांग
राम मंदिर दान चोरी मामले पर बीएसपी की मुखिया और पूर्व सीएम मायावती ने मुख्य प्रबंधकों की जांच की मांग उठाई है। साथ ही सपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी से इस मामले में सबूत दिखाने को भी कहा है।
राम मंदिर दान विवाद पर मायावती का बड़ा बयान: सपा, कांग्रेस और AAP से गबन के सबूत लेने की मांग
दान चोरी केस में मायावती का अलग दांव: आरोप लगाने वालों से मांगे पुख्ता सबूत
अयोध्या/लखनऊ। अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में दान और चढ़ावे में कथित गड़बड़ी को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष Mayawati ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच होनी चाहिए तथा जिन राजनीतिक दलों और नेताओं ने दान में चोरी या गबन के आरोप लगाए हैं, उनसे भी पुख्ता सबूत लिए जाने चाहिए। मायावती ने यह भी कहा कि यदि आरोपों के समर्थन में पर्याप्त प्रमाण नहीं दिए जाते हैं, तो इसे केवल राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश माना जाएगा।
मायावती ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर सिलसिलेवार पोस्ट करते हुए कहा कि केवल अयोध्या का राम मंदिर ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम में भी चढ़ावे और दान के प्रबंधन को लेकर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। इसलिए दोनों प्रमुख धार्मिक स्थलों से जुड़े ट्रस्टों के शीर्ष प्रबंधन की भूमिका की भी गंभीरता से जांच की जानी चाहिए।
ट्रस्ट के शीर्ष प्रबंधन की भूमिका की जांच की मांग
बसपा प्रमुख ने अपने बयान में कहा कि यदि किसी धार्मिक ट्रस्ट में वित्तीय अनियमितता या दान के प्रबंधन में गड़बड़ी सामने आती है, तो केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक जांच सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह भी देखा जाना चाहिए कि कहीं शीर्ष प्रबंधन की मिलीभगत या लापरवाही तो इसके पीछे जिम्मेदार नहीं है।
उन्होंने लिखा कि यदि समय रहते पूरी सच्चाई सामने नहीं लाई गई तो भविष्य में भी ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति हो सकती है और नए प्रबंधक भी इसी तरह के दुरुपयोग का रास्ता अपना सकते हैं। इसलिए सरकार और जांच एजेंसियों को पूरी निष्पक्षता के साथ मामले की जांच करनी चाहिए।
सरकार और एसआईटी से विशेष ध्यान देने की अपील
मायावती ने कहा कि इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार और गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। उनके अनुसार, यदि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होगी, तभी लोगों का धार्मिक संस्थाओं पर विश्वास बना रहेगा।
उन्होंने कहा कि देश के करोड़ों श्रद्धालु अपनी आस्था के कारण मंदिरों में दान देते हैं। ऐसे में यदि दान के प्रबंधन को लेकर किसी प्रकार की शंका उत्पन्न होती है तो उसका समयबद्ध और निष्पक्ष समाधान आवश्यक है।
सपा, कांग्रेस और AAP पर भी साधा निशाना
बसपा सुप्रीमो ने इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इन दलों के वरिष्ठ नेताओं द्वारा राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी और गबन के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। ऐसे में इन नेताओं को अपने आरोपों के समर्थन में ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराने चाहिए।
मायावती ने कहा कि यदि किसी के पास वास्तविक प्रमाण हैं तो दोषियों को कानून के अनुसार सजा मिलनी चाहिए और कोई भी आरोपी बचना नहीं चाहिए। लेकिन यदि बिना सबूत केवल राजनीतिक बयानबाजी की जा रही है, तो इसे जनता और श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़ी गंभीर समस्या की बजाय राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास माना जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी चर्चाएं हो रही हैं कि कुछ राजनीतिक दल इस मुद्दे को चुनावी राजनीति के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं। इसलिए आवश्यक है कि तथ्यों के आधार पर जांच हो और किसी भी प्रकार की अफवाह या राजनीतिक प्रचार से बचा जाए।
बद्रीनाथ धाम का मामला भी चर्चा में
मायावती ने अपने बयान में उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम का भी उल्लेख किया। हाल ही में वहां तीर्थयात्रियों द्वारा चढ़ाए गए प्रसाद और दान के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। इसके बाद संबंधित मंदिर समिति ने मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय समिति गठित की है।
उन्होंने कहा कि देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में आने वाले दान का प्रबंधन पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।
कैसे सामने आया राम मंदिर दान विवाद?
राम मंदिर में दान और चढ़ावे से जुड़ा विवाद नियमित ऑडिट प्रक्रिया के दौरान सामने आया। ऑडिट में दानपात्र से प्राप्त नकदी और अन्य सामग्री के रिकॉर्ड में कथित अंतर पाए जाने का संदेह व्यक्त किया गया। इसके बाद मंदिर परिसर के सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरू की गई और ट्रस्ट स्तर पर प्रारंभिक पड़ताल की गई।
जैसे-जैसे मामला सार्वजनिक हुआ, इसने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया। विपक्षी दलों ने मामले में गंभीर आरोप लगाए, जबकि ट्रस्ट की ओर से जांच प्रक्रिया में सहयोग की बात कही गई।
एसआईटी कर रही जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। एसआईटी पूरे घटनाक्रम, वित्तीय रिकॉर्ड, ऑडिट रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज तथा संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों से पूछताछ के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।
जांच एजेंसियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि यदि कोई वित्तीय अनियमितता हुई है तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है और क्या यह किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत हरकत थी या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क अथवा प्रशासनिक लापरवाही थी।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच जांच पर सबकी नजर
राम मंदिर देश की करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में दान और चढ़ावे से जुड़े किसी भी आरोप ने स्वाभाविक रूप से राजनीतिक और सामाजिक बहस को जन्म दिया है। एक ओर विपक्ष निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है, वहीं विभिन्न राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप भी लगा रहे हैं।
इसी बीच मायावती ने अपने बयान के माध्यम से दोहरी मांग रखी है—एक तरफ दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और दूसरी ओर आरोप लगाने वाले नेताओं से भी ठोस प्रमाण प्रस्तुत करने की अपेक्षा। अब सबकी नजर एसआईटी की जांच और उसके निष्कर्षों पर टिकी हुई है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि कथित अनियमितताओं के पीछे वास्तविक तथ्य क्या हैं और जिम्मेदारी किसकी बनती है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस