प्रीतम लोधी का दिग्विजय सिंह को ऑफर: बोले- "जोर का झटका धीरे से लगाइए और चुपचाप भाजपा में आ जाइए", कांग्रेस की अंदरूनी कलह पर सियासत तेज

MP कांग्रेस में दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी के बीच विवाद से अंतर्कलह सामने आ गई है. बीजेपी की ओर से जमकर तंज कसा जा रहा है.

प्रीतम लोधी का दिग्विजय सिंह को ऑफर: बोले- "जोर का झटका धीरे से लगाइए और चुपचाप भाजपा में आ जाइए", कांग्रेस की अंदरूनी कलह पर सियासत तेज

उज्जैन की जमीन के मुद्दे से शुरू हुआ पूरा विवाद

जीतू पटवारी के आरोपों को दिग्विजय सिंह ने किया खारिज

कांग्रेस की PAC बैठक में गूंजा मामला, बढ़ी नाराजगी

डैमेज कंट्रोल में साथ दिखे दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी

भाजपा विधायक प्रीतम लोधी ने दिया भाजपा में शामिल होने का न्योता

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह तथा प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के बीच हालिया घटनाक्रम ने सियासी हलकों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है। इस विवाद ने न केवल कांग्रेस के भीतर असहज स्थिति पैदा की है, बल्कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को भी विपक्ष पर निशाना साधने का मौका दे दिया है। इसी क्रम में भाजपा विधायक प्रीतम सिंह लोधी ने दिग्विजय सिंह को भाजपा में शामिल होने का खुला न्योता देकर राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया।

उज्जैन की जमीन को लेकर शुरू हुआ विवाद

पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोहन यादव सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उज्जैन स्थित वीर भारत न्यास को लगभग 500 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन महज एक रुपये में दे दी गई। कांग्रेस ने इसे सरकार की बड़ी अनियमितता बताते हुए सवाल खड़े किए।

लेकिन इसके कुछ समय बाद ही उज्जैन में आयोजित एक अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने दस्तावेजों के आधार पर जीतू पटवारी के आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि बिना पूरी जानकारी और तथ्य जुटाए किसी भी मुद्दे पर आरोप लगाना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि बिना प्रमाण के आरोप लगाने वाले लोग "दलाली" की राजनीति करते हैं। हालांकि बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका बयान किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं था।

कांग्रेस के भीतर बढ़ी नाराजगी

दिग्विजय सिंह के इस बयान के बाद कांग्रेस के अंदर ही विरोध के स्वर सुनाई देने लगे। पार्टी के कई नेताओं का मानना था कि यदि किसी मुद्दे पर मतभेद था तो उसे सार्वजनिक मंच पर रखने के बजाय संगठन के भीतर सुलझाया जाना चाहिए था। इससे विपक्ष की लड़ाई कमजोर हुई और भाजपा को कांग्रेस पर हमला करने का अवसर मिल गया।

बताया गया कि कांग्रेस की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी (PAC) की बैठक में भी इस मुद्दे पर तीखी चर्चा हुई। कई नेताओं ने सार्वजनिक बयानबाजी पर नाराजगी जताई और संगठनात्मक अनुशासन बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया।

डैमेज कंट्रोल की कोशिश

विवाद बढ़ने के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने स्थिति संभालने का प्रयास किया। बैठक के बाद दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी मीडिया के सामने एक साथ नजर आए। दिग्विजय सिंह ने कहा कि जीतू पटवारी उनके बेटे जैसे हैं और कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया और पार्टी में किसी प्रकार का मतभेद नहीं है।

इस संयुक्त उपस्थिति को कांग्रेस की ओर से डैमेज कंट्रोल की कोशिश माना गया, ताकि पार्टी के भीतर किसी बड़े संकट का संदेश बाहर न जाए।

भाजपा विधायक प्रीतम लोधी का तंज

कांग्रेस के भीतर चल रहे विवाद पर भाजपा नेताओं ने जमकर चुटकी ली। भाजपा विधायक प्रीतम सिंह लोधी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यदि दिग्विजय सिंह अपनी ही पार्टी से असहज हैं तो उन्हें भाजपा में शामिल हो जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, "आप उनसे धीरे से कहो, जोर का झटका धीरे से लगा दें और चुपचाप भाजपा में आ जाएं।"

प्रीतम लोधी ने आगे कहा कि "महाराज तो भाजपा में आ चुके हैं, अब राजा भी आ जाएं। फिर भाजपा में राजा और महाराजा की जोड़ी बन जाएगी।" उनका इशारा केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर था, जो पहले कांग्रेस में थे और अब भाजपा का हिस्सा हैं।

लोधी ने दिग्विजय सिंह को अनुभवी और अच्छा नेता बताते हुए जीतू पटवारी पर भी निशाना साधा। उन्होंने जीतू पटवारी को "फर्जी पटवारी" बताते हुए कहा कि उन्हें दिग्विजय सिंह के राजनीतिक अनुभव से सीख लेनी चाहिए।

कांग्रेस नेत्री निधि चतुर्वेदी ने भी साधा निशाना

कांग्रेस की प्रदेश महासचिव निधि चतुर्वेदी ने भी दिग्विजय सिंह की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट और वीडियो जारी कर कहा कि यदि दिग्विजय सिंह के पास जमीन से जुड़े दस्तावेज और तथ्य थे तो उन्हें पहले प्रदेश अध्यक्ष या पार्टी नेतृत्व के साथ साझा करना चाहिए था।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक रूप से अपने ही प्रदेश अध्यक्ष के दावों को गलत साबित करने से पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा है। उनके अनुसार, इससे भाजपा को कांग्रेस पर हमला करने का मौका मिला और संगठन की एकजुटता पर सवाल खड़े हुए।

निधि चतुर्वेदी ने यह भी कहा कि वरिष्ठ नेताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे संगठन को मजबूत करें, न कि सार्वजनिक मंचों पर भ्रम की स्थिति पैदा करें।

भाजपा ने साधा कांग्रेस पर निशाना

कांग्रेस की इस अंदरूनी खींचतान को लेकर भाजपा लगातार हमलावर बनी हुई है। प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने भी कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस अपने ही नेताओं के बयानों से परेशान है और पार्टी के भीतर कोई समन्वय नहीं बचा है।

भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस पहले अपने संगठन को संभाले, उसके बाद सरकार पर सवाल उठाए। भाजपा का दावा है कि कांग्रेस की अंदरूनी कलह जनता के सामने उजागर हो चुकी है और इससे पार्टी की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है।

कांग्रेस का बचाव

दूसरी ओर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने दिग्विजय सिंह का बचाव किया। उन्होंने कहा कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और कुछ लोग व्यक्तिगत पहचान बनाने के लिए अनावश्यक बयानबाजी कर रहे हैं।

पीसी शर्मा ने कहा कि दिग्विजय सिंह कांग्रेस के सबसे अनुभवी नेताओं में से हैं और उनके योगदान पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। उन्होंने निधि चतुर्वेदी की पार्टी में राजनीतिक भूमिका पर भी प्रश्न उठाते हुए कहा कि वरिष्ठ नेताओं पर टिप्पणी करने से पहले संगठनात्मक मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए।

राजनीतिक मायने

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस के भीतर सामने आए इस विवाद ने विपक्ष की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि पार्टी नेतृत्व लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि सभी नेता एक साथ हैं, लेकिन सार्वजनिक बयानबाजी ने राजनीतिक विरोधियों को हमला करने का पर्याप्त अवसर दे दिया है।

भाजपा इस मुद्दे को कांग्रेस की कमजोरी के रूप में पेश कर रही है, जबकि कांग्रेस इसे सामान्य वैचारिक मतभेद बताकर विवाद को शांत करने में जुटी है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इस विवाद को पूरी तरह समाप्त कर पाती है या फिर यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में आगे भी चर्चा का विषय बना रहता है।