JPSC-JSSC परीक्षा गड़बड़ी पर छात्रों का आंदोलन तेज, धरनास्थल पहुंचे संजय सेठ और आदित्य साहू; राहुल गांधी पर साधा निशाना
केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने रांची में प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात की और राहुल गांधी को 'झूठ की सबसे बड़ी फैक्ट्री' बताया। उन्होंने JPSC/JSSC परीक्षाओं की CBI जांच और रद्द करने, साथ ही मृत छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ मुआवजे की मांग की।
केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। साथ ही उन्हें रांची आने की चुनौती दी है।
रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और अनियमितताओं को लेकर छात्रों का विरोध-प्रदर्शन लगातार जारी है। रविवार को आंदोलन कर रहे छात्रों के समर्थन में केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और झारखंड भाजपा अध्यक्ष आदित्य साहू रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंचे। दोनों नेताओं ने धरने पर बैठे छात्रों से मुलाकात कर उनकी मांगों को सुना और आंदोलन को समर्थन देने की बात कही।
प्रदर्शनकारी छात्र परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी से मेहनत कर परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। इसी मुद्दे को लेकर बड़ी संख्या में छात्र धरने पर बैठे हैं और सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।
16 दिनों से प्रदर्शन, सरकार पर लगाया छात्रों की अनदेखी का आरोप
धरना स्थल पर छात्रों से मुलाकात के बाद केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने झारखंड सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि छात्रों का आंदोलन शुरू होने के बाद सरकार को तत्काल उनसे बातचीत करनी चाहिए थी। संजय सेठ ने कहा कि मुख्यमंत्री को आंदोलन के पहले ही दिन 24 घंटे के भीतर छात्रों के बीच पहुंचना चाहिए था।
उन्होंने कहा कि ये आंदोलन करने वाले छात्र किसी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता नहीं हैं, बल्कि राज्य के युवा हैं, जो अपने भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "ये हमारे बच्चे हैं, हमारी बेटियां हैं और सरकार 16 दिनों तक चुप रही।"
संजय सेठ ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि छात्रों की मांगों का समाधान निकालने के बजाय उन्हें अलग-अलग समूहों में बांटकर बातचीत की जा रही है।
'फूट डालो और राज करो' की नीति अपनाने का आरोप
केंद्रीय मंत्री ने झारखंड सरकार पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार छात्रों के आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इसकी तुलना अंग्रेजों की 'फूट डालो और राज करो' की नीति से की।
संजय सेठ ने कहा कि सरकार अलग-अलग संगठनों से अलग-अलग बातचीत कर रही है और इसे समाधान की दिशा में वास्तविक प्रयास के बजाय एक तरह का राजनीतिक नाटक बताया। उनके मुताबिक, सरकार को सभी प्रदर्शनकारी छात्रों की मांगों को एक साथ सुनना चाहिए और परीक्षा विवाद का पारदर्शी तरीके से समाधान करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लंबे समय तक छात्रों की बात नहीं सुने जाने से उनमें नाराजगी बढ़ रही है। सरकार को टकराव की स्थिति पैदा करने के बजाय छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकर बातचीत करनी चाहिए।
राहुल गांधी पर भी संजय सेठ का हमला
छात्रों के आंदोलन के बीच केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने राहुल गांधी से झारखंड सरकार के साथ इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की।
संजय सेठ ने कहा, "राहुल गांधी, झारखंड की जनता आपको बुला रही है।" उन्होंने राहुल गांधी पर तीखा राजनीतिक हमला करते हुए उन्हें देश में झूठ की सबसे बड़ी फैक्ट्री का मालिक बताया। संजय सेठ ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी हर मुद्दे को राजनीतिक नजरिए से देखते हैं।
उन्होंने कहा कि झारखंड में कांग्रेस सत्ता में शामिल है, इसलिए यदि कांग्रेस नेतृत्व वास्तव में छात्रों की मांगों को लेकर गंभीर है तो उसे राज्य सरकार से जवाब मांगना चाहिए।
'जहां चुनाव होते हैं, वहीं जाते हैं'—संजय सेठ
केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी की राजनीतिक सक्रियता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी उन मुद्दों पर ज्यादा सक्रिय नजर आते हैं, जहां राजनीतिक फायदा मिलने की संभावना होती है।
संजय सेठ ने कहा कि छात्रों का मुद्दा किसी राजनीतिक दल के फायदे या नुकसान का विषय नहीं है। यह हजारों युवाओं के भविष्य से जुड़ा मामला है। उन्होंने कहा कि विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस और उसके नेता अलग-अलग मुद्दों पर सरकार से सवाल करते हैं, लेकिन झारखंड में सरकार में भागीदार होने के कारण उन्हें अपनी जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए।
उन्होंने राहुल गांधी से सीधे तौर पर झारखंड के मुख्यमंत्री से बातचीत करने की अपील की।
'सीबीआई जांच कराएं, नहीं तो समर्थन वापस लें'
संजय सेठ ने राहुल गांधी के सामने एक राजनीतिक मांग भी रखी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को मुख्यमंत्री से बात करनी चाहिए और साफ तौर पर कहना चाहिए कि परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों की सीबीआई जांच कराई जाए।
उन्होंने कहा कि यदि झारखंड सरकार इस मामले में सीबीआई जांच कराने के लिए तैयार नहीं है तो कांग्रेस को सरकार से अपना समर्थन वापस लेने पर विचार करना चाहिए। संजय सेठ के इस बयान के बाद परीक्षा विवाद के साथ-साथ राज्य की सियासत भी गरमा गई है।
भाजपा नेता ने कहा कि छात्रों की मांगों को राजनीतिक विवाद में उलझाने के बजाय सरकार को उनके सवालों का जवाब देना चाहिए। परीक्षा प्रक्रिया में यदि कोई गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
छात्रों के बीच पहुंचे भाजपा नेता
रविवार सुबह संजय सेठ और झारखंड भाजपा अध्यक्ष आदित्य साहू जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंचे। यहां प्रदर्शनकारी छात्र धरने पर बैठे थे। दोनों नेताओं ने छात्रों से बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं।
भाजपा नेताओं के धरना स्थल पर पहुंचने को छात्रों के आंदोलन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पहले भी परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर छात्र संगठनों की ओर से सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए जाते रहे हैं। इस बार JPSC और JSSC से जुड़े विवाद ने युवाओं के बीच नाराजगी को फिर सामने ला दिया है।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले अभ्यर्थी वर्षों तक तैयारी करते हैं। परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता या पारदर्शिता की कमी उनके करियर को प्रभावित कर सकती है। इसलिए वे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
आंदोलन ने बढ़ाई सरकार की चुनौती
JPSC और JSSC परीक्षा विवाद को लेकर जारी आंदोलन अब केवल परीक्षा संबंधी शिकायत तक सीमित नहीं रह गया है। भाजपा नेताओं के धरना स्थल पर पहुंचने और सरकार पर हमले के बाद यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी ज्यादा मुखर हो गया है।
एक तरफ छात्र सरकार से अपनी मांगों पर ठोस कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं भाजपा इस पूरे मामले को लेकर राज्य सरकार और कांग्रेस पर दबाव बढ़ाने में जुट गई है। केंद्रीय मंत्री संजय सेठ के बयान से यह भी स्पष्ट है कि भाजपा आने वाले दिनों में इस मुद्दे को राजनीतिक तौर पर प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है।
छात्रों के आंदोलन के बीच अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन्हें भरोसे में लेने और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का स्पष्ट जवाब देने की है। यदि सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच जल्द बातचीत नहीं होती है तो आंदोलन के और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल छात्रों की नजर सरकार के अगले कदम पर है। वहीं भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस मुद्दे पर प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों के साथ खड़ी रहेगी और परीक्षा विवाद को लेकर सरकार पर दबाव बनाएगी। दूसरी ओर, संजय सेठ द्वारा राहुल गांधी से हस्तक्षेप और सीबीआई जांच की मांग करने के बाद इस पूरे मामले में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज होने के संकेत हैं।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस