लाल किले पर रचा गया इतिहास: पहली बार राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ से पहले गूंजा पूरा ‘वंदे मातरम्’, 21 तोपों की सलामी और आसमान से हुई पुष्पवर्षा

80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में लाल किले पर प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में पहली बार राष्ट्रगीत वंदे मातरम् का पूरा संस्करण बजाया गया।

लाल किले पर रचा गया इतिहास: पहली बार राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ से पहले गूंजा पूरा ‘वंदे मातरम्’, 21 तोपों की सलामी और आसमान से हुई पुष्पवर्षा

पहली बार लाल किले के इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में वंदे मातरम् को औपचारिक रूप से गाया गया. समारोह में देश की युवा शक्ति की ऊर्जा और उम्मीदों पर खास ध्यान दिया जा रहा है और यह भी दिखाया जा रहा है कि युवा पीढ़ी किस तरह भारत को साल 2047 तक विकसित भारत बनाने के सफर में योगदान दे रही है.

नई दिल्ली। भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर ने इस बार एक ऐतिहासिक क्षण देखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में पहली बार लाल किले पर राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ से पहले राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का पूरा संस्करण प्रस्तुत किया गया। राष्ट्रगीत की गूंज के बाद राष्ट्रगान बजाया गया और इसके साथ देश के स्वतंत्रता दिवस समारोह का यह महत्वपूर्ण चरण पूरा हुआ।

इस वर्ष ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं। ऐसे में स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में इसके पूरे संस्करण का प्रस्तुत किया जाना विशेष महत्व रखता है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपने संबोधन में इस बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि आजादी के बाद यह पहली बार है जब लाल किले पर पूरा ‘वंदे मातरम्’ बजाया गया है।

तिरंगा फहराते ही 21 तोपों की सलामी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जैसे ही लाल किले की प्राचीर पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया, 1721 फील्ड बैटरी (सेरेमोनियल) ने स्वदेशी 105 मिमी लाइट फील्ड गन से 21 तोपों की सलामी दी। यह सलामी स्वतंत्रता दिवस समारोह की परंपरा और सैन्य गौरव का प्रतीक बनी।

इसके बाद सेना के बैंड ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की धुन प्रस्तुत की। लाल किले की ऐतिहासिक प्राचीर से उठती राष्ट्रगीत की धुन ने समारोह में मौजूद लोगों के साथ देशभर में इसे देखने वाले करोड़ों नागरिकों के बीच देशभक्ति का भाव और गहरा कर दिया।

आसमान से हुई तिरंगे की पुष्पवर्षा

समारोह के दौरान भारतीय वायु सेना के दो Mi-17 हेलीकॉप्टरों ने लाल किले पर फूलों की वर्षा की। दोनों हेलीकॉप्टरों पर राष्ट्रीय भावनाओं को प्रदर्शित करने वाले झंडे दिखाई दिए। एक हेलीकॉप्टर पर तिरंगा लहरा रहा था, जबकि दूसरे पर ‘वंदे मातरम्’ लिखा झंडा नजर आया।

जमीन पर तिरंगे की शान और आसमान में हेलीकॉप्टरों से होती पुष्पवर्षा ने स्वतंत्रता दिवस समारोह को भव्य बना दिया।

‘वंदे मातरम्’ के 150 साल पूरे

‘वंदे मातरम्’ इस वर्ष अपनी रचना के 150 वर्ष पूरे कर रहा है। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में इस गीत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ‘वंदे मातरम्’ ने लोगों में राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति की भावना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

समय के साथ ‘वंदे मातरम्’ भारतीय राष्ट्रीय जीवन का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया। वर्तमान में यह देश का राष्ट्रगीत है, जबकि ‘जन गण मन’ राष्ट्रगान है। स्वतंत्रता दिवस समारोह में दोनों की प्रस्तुति ने भारत की राष्ट्रीय परंपरा के इन दोनों प्रतीकों को एक साथ सामने ला दिया।

राष्ट्रपति के संदेश में भी सुनाई दिया राष्ट्रगीत

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के राष्ट्र के नाम संदेश में भी ‘वंदे मातरम्’ को प्रमुख स्थान मिला। राष्ट्रपति के संदेश की शुरुआत और समापन पर इसे बजाया गया।

यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब ‘वंदे मातरम्’ के पूरे संस्करण को लेकर देश में व्यापक चर्चा चल रही है। सरकार की ओर से राष्ट्रगीत को लेकर कानूनी प्रावधानों में बदलाव किए जाने के बाद इसके सार्वजनिक और आधिकारिक कार्यक्रमों में इस्तेमाल को लेकर भी बहस तेज हुई है।

कानून में बदलाव के बाद बढ़ी चर्चा

हाल ही में राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम से जुड़े कानून में संशोधन को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली। संशोधित प्रावधानों के तहत राष्ट्रगीत के अपमान या उसके गायन में जानबूझकर बाधा डालने पर कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार ऐसे मामलों में जुर्माना, तीन वर्ष तक की जेल या दोनों का प्रावधान हो सकता है।

इस बदलाव को राष्ट्रगीत के सम्मान और राष्ट्रीय प्रतीकों की गरिमा से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं, कानून के कुछ प्रावधानों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सवाल भी उठाए गए हैं।

शशि थरूर ने जताई आपत्ति

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद शशि थरूर ने संशोधन को लेकर आपत्ति जताई थी। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा था कि संशोधन संसद में बिना चर्चा के पारित किया गया और इसके तहत राष्ट्रगीत को लेकर नए प्रावधान किए गए हैं।

थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि वह ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रगान दोनों का सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि वह ‘वंदे मातरम्’ के पहले दो पद गा सकते हैं, लेकिन इसके बाकी पदों को लेकर उनकी जानकारी सीमित है, क्योंकि अब तक उन्हें गाना अनिवार्य नहीं था।

उन्होंने अपने बयान में इस विषय को केवल कानून या राजनीति के नजरिए से नहीं, बल्कि व्यवहारिक पहलू से देखने की बात कही। उनका तर्क था कि राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान के साथ-साथ लोगों की व्यावहारिक परिस्थितियों और मानवीय स्वभाव को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान की प्रस्तुति ने खींचा ध्यान

लाल किले पर इस वर्ष ‘वंदे मातरम्’ के पूरे संस्करण की प्रस्तुति ने स्वतंत्रता दिवस समारोह की परंपरा में एक नया अध्याय जोड़ दिया। इसके बाद राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ बजाया गया।

इस क्रम ने राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों को लेकर देश में नई चर्चा को जन्म दिया है। जहां एक ओर समर्थकों का कहना है कि ‘वंदे मातरम्’ स्वतंत्रता आंदोलन की ऐतिहासिक विरासत और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक है, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसके पूरे संस्करण को लेकर कानूनी अनिवार्यता और व्यवहारिक पहलुओं पर सवाल उठा रहे हैं।

इतिहास, परंपरा और वर्तमान का संगम

80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से ‘वंदे मातरम्’ का पूरा संस्करण गूंजना केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं, बल्कि देश के स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत को याद करने का अवसर भी बना। तिरंगे की शान, 21 तोपों की सलामी, सेना के बैंड की धुन और वायुसेना के हेलीकॉप्टरों से हुई पुष्पवर्षा के बीच राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान की प्रस्तुति ने समारोह को ऐतिहासिक रूप दिया।

एक तरफ देश आजादी के 80वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का अवसर भी सामने है। ऐसे में लाल किले पर पूरे राष्ट्रगीत की प्रस्तुति ने इन दोनों ऐतिहासिक पड़ावों को एक साथ जोड़ दिया।

स्वतंत्रता दिवस का यह समारोह इस बात का भी प्रतीक बना कि भारत अपने स्वतंत्रता आंदोलन की स्मृतियों, राष्ट्रीय प्रतीकों और लोकतांत्रिक परंपराओं को लेकर लगातार नई बहस और नए विमर्श से गुजर रहा है। लाल किले से गूंजा ‘वंदे मातरम्’ और उसके बाद राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ की धुन ने इसी राष्ट्रीय भावना को एक साथ अभिव्यक्त किया।