राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव: चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर, कृष्ण मोहन को मिली अंतरिम जिम्मेदारी

गोविंद देव गिरी ने कहा कि कुछ अधिकारियों की नियुक्ति के लिए एक समिति का गठन किया गया है. साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई को आयोजित होगी. तब तक विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट भी आने की उम्मीद है.

राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव: चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर, कृष्ण मोहन को मिली अंतरिम जिम्मेदारी

राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव

चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर

कृष्ण मोहन को सौंपी गई अंतरिम जिम्मेदारी

ट्रस्ट बैठक में दान अनियमितता पर चर्चा

अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सोमवार (6 जुलाई) को हुई अहम बैठक में बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिला। करीब तीन घंटे तक चली इस बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे को मंजूरी दे दी गई। बैठक के बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए मंदिर प्रशासन के संचालन के लिए अंतरिम व्यवस्था की गई है। इसके तहत ट्रस्ट के ही सदस्य कृष्ण मोहन को तत्काल प्रभाव से जिम्मेदारी सौंपी गई है। कृष्ण मोहन अब अंतरिम रूप से चंपत राय के स्थान पर ट्रस्ट के कामकाज का संचालन देखेंगे।

बैठक में क्या हुआ फैसला

राम जन्मभूमि परिसर में हुई इस बैठक को ट्रस्ट के लिहाज से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लगभग तीन घंटे चली इस बैठक में कई प्रशासनिक और वित्तीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार, बैठक का मुख्य एजेंडा हाल ही में सामने आए कथित दान और चढ़ावे से जुड़ी अनियमितताओं की जांच और ट्रस्ट के संचालन को पारदर्शी बनाना था।

बैठक के दौरान यह भी तय किया गया कि ट्रस्ट की आंतरिक प्रक्रियाओं को और मजबूत किया जाएगा ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता की संभावना को समाप्त किया जा सके।

इस्तीफों की मंजूरी और उसके मायने

बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे को मंजूरी दिए जाने को ट्रस्ट के भीतर एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव माना जा रहा है। दोनों ही लंबे समय से राम मंदिर निर्माण और ट्रस्ट के संचालन से जुड़े प्रमुख चेहरे रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, यह निर्णय हाल के विवादों और जांच प्रक्रियाओं के बीच ट्रस्ट की छवि को स्थिर और पारदर्शी बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। हालांकि आधिकारिक तौर पर ट्रस्ट की ओर से इस्तीफे के कारणों पर विस्तृत बयान नहीं दिया गया है।

कृष्ण मोहन को क्यों मिली जिम्मेदारी

अंतरिम जिम्मेदारी संभालने वाले कृष्ण मोहन प्रशासनिक अनुभव वाले अधिकारी रह चुके हैं। वे भारतीय वन सेवा (IFS) के वरिष्ठ अधिकारी रहे हैं और 2012 में सेवानिवृत्त हुए थे।

सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की। वे हरदोई के रहने वाले हैं और लखनऊ विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की है। अपने करियर के शुरुआती वर्षों में उन्होंने परमाणु ऊर्जा विभाग में भी कार्य किया था।

बाद में वन सेवा के दौरान उन्होंने महाराष्ट्र में विभिन्न प्रशासनिक पदों पर काम किया। सेवा से निवृत्त होने के बाद वे सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे और बाद में ट्रस्ट में शामिल हुए।

पिछले वर्ष उन्हें ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया था, जब एक अन्य ट्रस्टी के निधन से सीट खाली हुई थी। उनकी नियुक्ति प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक क्षमता को देखते हुए की गई थी।

कथित चढ़ावा अनियमितता पर विवाद

बैठक में सबसे अहम मुद्दा मंदिर में मिले चढ़ावे और दान से जुड़ी कथित अनियमितताओं का रहा। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कुछ मामलों में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आई थीं, जिन पर जांच चल रही है।

उन्होंने कहा कि ट्रस्ट का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भक्तों द्वारा दिए गए दान का एक-एक रुपया सही तरीके से उपयोग हो और किसी भी प्रकार की चोरी या हेराफेरी करने वालों को बख्शा न जाए।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जांच के दौरान सामने आए सभी संदिग्ध मामलों को सार्वजनिक किया जाएगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।

गिरफ्तारियां और जांच प्रक्रिया

सूत्रों के अनुसार, इस मामले में जांच एजेंसियों द्वारा शुरुआती कार्रवाई के आधार पर आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह गिरफ्तारी मंदिर परिसर में कथित रूप से चढ़ावे से जुड़ी वस्तुओं और धन के दुरुपयोग की जांच के बाद की गई है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया है, जो पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कर रहा है। ट्रस्ट प्रशासन का कहना है कि जांच एजेंसियों को पूरी स्वतंत्रता दी गई है ताकि सच्चाई सामने आ सके।

सुरक्षा और बैठक का माहौल

बैठक के दौरान अयोध्या में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। मंदिर परिसर के आसपास आम लोगों और मीडिया की आवाजाही को नियंत्रित किया गया था। यहां तक कि बैठक स्थल को भी बदलकर मणि राम दास छावनी के बजाय मंदिर परिसर के अंदर स्थित गेस्ट हाउस में किया गया।

बैठक में ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास सहित सात स्थायी सदस्य मौजूद रहे, जबकि चंपत राय और अनिल मिश्रा अनुपस्थित रहे।

ट्रस्ट का रुख और आगे की दिशा

ट्रस्ट नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार या अनियमितता को समाप्त करना है। कोषाध्यक्ष ने कहा कि जो लोग इस पूरे मामले को धार्मिक या राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं, वे वास्तविक मुद्दे से ध्यान भटका रहे हैं।

ट्रस्ट का मानना है कि राम मंदिर निर्माण और संचालन एक ऐतिहासिक और संवेदनशील परियोजना है, जिसमें पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता है

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में हुए इस बड़े प्रशासनिक बदलाव ने पूरे मामले को एक नए मोड़ पर ला दिया है। चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे की मंजूरी और कृष्ण मोहन को अंतरिम जिम्मेदारी मिलने के बाद अब ट्रस्ट के संचालन की दिशा और स्पष्ट हो गई है।

साथ ही, चढ़ावे में कथित अनियमितताओं की जांच और गिरफ्तारियों ने मामले को और गंभीर बना दिया है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और ट्रस्ट के अगले फैसले इस पूरे प्रकरण की दिशा तय करेंगे।