"मोड़ा-मोड़ी की शादी नहीं कराते क्या": पन्नालाल शाक्य के बयान से सियासत गरमाई, बोले- कोई नेता संबंध नहीं कराता

भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने कहा कि ‘क्या बच्चों की शादी छोड़ हर वक्त मीटिंग में ही जाएं?’ उनके बयान के बाद जिले की राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सिंधिया की ओर से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

"मोड़ा-मोड़ी की शादी नहीं कराते क्या": पन्नालाल शाक्य के बयान से सियासत गरमाई, बोले- कोई नेता संबंध नहीं कराता

भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने कहा कि ‘क्या बच्चों की शादी छोड़ हर वक्त मीटिंग में ही जाएं?’ उनके बयान के बाद जिले की राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सिंधिया की ओर से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

गुना। मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बार फिर गुना चर्चा का केंद्र बन गया है। केंद्रीय मंत्री के चार दिवसीय गुना दौरे के दौरान अधिकांश कार्यक्रमों से विधायक की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलों को जन्म दिया। विपक्ष ने इसे भाजपा की अंदरूनी खींचतान से जोड़कर देखा, वहीं पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच भी चर्चा का विषय बना रहा कि आखिर विधायक सिंधिया के कार्यक्रमों से दूरी क्यों बनाए रहे।

मंगलवार को जल गंगा संवर्धन अभियान के समापन कार्यक्रम में शामिल हुए पन्नालाल शाक्य ने पहली बार खुलकर अपनी अनुपस्थिति पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अपने अंदाज में कहा, "क्या हम मोड़ा-मोड़ी की शादी नहीं कराते क्या? क्या सिर्फ मीटिंगों में ही जाते रहें? बच्चों के संबंध हमें ही कराने हैं। कोई नेता शादी नहीं कराता।" उनके इस बयान के बाद राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गईं।

चार दिवसीय दौरे से रहे दूर

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया 26 से 29 जून तक गुना जिले के दौरे पर रहे। इस दौरान उन्होंने कई सरकारी और संगठनात्मक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। बमोरी में करीब 280 करोड़ रुपये की लागत वाले विद्युत सब स्टेशन का भूमिपूजन किया, विभिन्न विकास कार्यों की समीक्षा की और कार्यकर्ताओं से भी मुलाकात की।

हालांकि पूरे दौरे में विधायक पन्नालाल शाक्य केवल 27 जून को सर्किट हाउस में सिंधिया की अगवानी करने पहुंचे। इसके बाद आयोजित अधिकांश कार्यक्रमों में वह नजर नहीं आए। उनकी गैरहाजिरी ने राजनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए।

पहले भोपाल में व्यस्तता बताई थी

जब विधायक की अनुपस्थिति पर सवाल उठे थे, तब उन्होंने कहा था कि वह पार्टी के कार्य से भोपाल गए हुए थे। लेकिन बाद में उन्होंने विस्तृत रूप से सफाई देते हुए बताया कि उसी दौरान परिवार में बच्चों के विवाह संबंधी कार्यक्रम और सामाजिक जिम्मेदारियां भी थीं, जिनकी वजह से सभी कार्यक्रमों में शामिल होना संभव नहीं हो सका।

"बच्चों की शादी भी हमारी जिम्मेदारी"

जल गंगा संवर्धन अभियान के समापन कार्यक्रम में मीडिया से चर्चा करते हुए पन्नालाल शाक्य ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की सिर्फ राजनीतिक जिम्मेदारियां ही नहीं होतीं, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक दायित्व भी निभाने पड़ते हैं।

उन्होंने कहा, "क्या हम अपनी लड़की-लड़कों की शादी नहीं कराएं? सिर्फ मीटिंगों में ही जाते रहें? समाज में जाकर बच्चों के संबंध हमें ही कराने हैं। कोई नेता हमारी शादी नहीं कराता।"

उनके इस बयान को राजनीतिक हलकों में अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है। कुछ लोग इसे सामान्य पारिवारिक जिम्मेदारी बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे पार्टी के भीतर चल रही नाराजगी का संकेत मान रहे हैं।

"5 साल पहले भी देख लिया, अब भी देख लिया"

अपने बयान के दौरान विधायक ने एक और टिप्पणी की, जिसने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी। उन्होंने कहा, "हमें सब पता है। पांच साल पहले भी देख लिया और अब भी देख लिया।"

हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनका इशारा किस ओर था, लेकिन उनके इस बयान के बाद राजनीतिक विश्लेषक अलग-अलग अर्थ निकाल रहे हैं। विपक्षी दलों ने भी इसे भाजपा के भीतर मतभेदों का संकेत बताया है।

भोपाल के निर्देश पर पहुंचे कार्यक्रम में

कूनो नदी के उद्गम स्थल पर आयोजित जल गंगा संवर्धन अभियान के समापन समारोह में विधायक मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि वह अपनी इच्छा से कार्यक्रम में नहीं आए थे, बल्कि भोपाल से नाम तय होने के बाद उन्हें मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया गया था।

उन्होंने कहा, "भोपाल से निर्देश आया, इसलिए मैं कार्यक्रम में आया हूं। ऐसा नहीं है कि मैं जबरन यहां आ गया हूं।"

इस बयान के भी कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।

भाजपा में अंदरूनी चर्चाएं तेज

गुना क्षेत्र को ज्योतिरादित्य सिंधिया का मजबूत राजनीतिक गढ़ माना जाता है। ऐसे में उनके महत्वपूर्ण दौरे के दौरान स्थानीय विधायक की लगातार गैरमौजूदगी ने पार्टी के भीतर भी चर्चाओं को जन्म दिया है। हालांकि भाजपा की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि पार्टी नेतृत्व इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहता, तब भी इस तरह की घटनाएं संगठन के भीतर संवाद और समन्वय को लेकर सवाल खड़े करती हैं।

विपक्ष को मिला मुद्दा

विधायक के बयान के बाद विपक्ष ने भी भाजपा पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि भाजपा में सब कुछ सामान्य नहीं है और अलग-अलग नेताओं के बीच समन्वय की कमी दिखाई दे रही है। हालांकि भाजपा नेताओं का कहना है कि इसे अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग दिया जा रहा है और विधायक ने केवल अपनी पारिवारिक व्यस्तता का जिक्र किया है।

राजनीतिक संदेश या सामान्य सफाई?

पन्नालाल शाक्य के बयान को लेकर अब राजनीतिक हलकों में बहस जारी है। एक पक्ष इसे सामान्य पारिवारिक जिम्मेदारियों का हवाला मान रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे भाजपा के भीतर चल रही असहजता का संकेत बता रहा है।

फिलहाल इतना तय है कि विधायक का "मोड़ा-मोड़ी की शादी नहीं कराते क्या" वाला बयान सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में यदि पार्टी नेतृत्व या स्वयं ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया आती है, तो यह विवाद और अधिक स्पष्ट हो सकता है।