SAGA ग्रुप के ₹10 हजार करोड़ के पोंजी घोटाले पर ED का बड़ा शिकंजा, ₹30 करोड़ की संपत्ति फ्रीज; 9 लग्जरी कारें और करोड़ों का सोना-चांदी जब्त

सागा ग्रुप पर ईडी की छापेमारी में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच में पता चला है कि सागा ग्रुप ने 50 से ज्यादा शैल कंपनियों की मदद से धोखे से हजारों करोड़ रुपये की रकम जमा की। ईडी की छापेमारी में भारी मात्रा में नकदी, सोन और चांदी के गहने मिले हैं।

SAGA ग्रुप के ₹10 हजार करोड़ के पोंजी घोटाले पर ED का बड़ा शिकंजा, ₹30 करोड़ की संपत्ति फ्रीज; 9 लग्जरी कारें और करोड़ों का सोना-चांदी जब्त

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए SAGA ग्रुप से जुड़े ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया है। ED के हेडक्वार्टर यूनिट नई दिल्ली ने मुंबई और भोपाल में समीर अग्रवाल तथा उनके सहयोगियों से जुड़े कई आवासीय और कमर्शियल कैम्पर पर छापेमारी की है।

नई दिल्ली/मुंबई/भोपाल। सागा ग्रुप से जुड़े कथित पोंजी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत ED की हेडक्वार्टर यूनिट ने 13 से 16 अगस्त तक मुंबई और भोपाल में समीर अग्रवाल और उनके सहयोगियों से जुड़े कई रिहायशी और व्यावसायिक ठिकानों पर तलाशी ली। यह कार्रवाई लोनी अर्बन मल्टी-स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी (LUCC) और उससे जुड़ी अन्य सहकारी समितियों के कथित पोंजी स्कैम की जांच के तहत की गई।

जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपियों ने लोगों को 3 से 5 साल में रकम दोगुनी या तिगुनी करने और कार जैसे महंगे उपहार देने का लालच देकर निवेश कराया। ED का आरोप है कि इस तरीके से 10,000 करोड़ रुपये से अधिक की रकम जुटाई गई। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए रिकरिंग डिपॉजिट, फिक्स्ड डिपॉजिट और मंथली इनकम स्कीम जैसी योजनाओं का इस्तेमाल किया गया।

नकली बैंकिंग ढांचे से जुटाई रकम

ED के अनुसार, निवेशकों को शुरुआती दौर में कुछ भुगतान किए गए, लेकिन कथित तौर पर बड़ी रकम प्रमोटरों और उनके सहयोगियों ने निजी फायदे के लिए इस्तेमाल की। एजेंटों, सहयोगियों और मार्केट कमीशन के नाम पर भी रकम निकाली गई। जांच में यह भी सामने आया कि आम लोगों से बड़ी मात्रा में नकद पैसा जुटाकर उसे क्षेत्रीय कैश-चेस्ट के जरिए आगे भेजा गया।

इसके बाद कथित तौर पर शेल कंपनियों और हवाला चैनलों के माध्यम से रकम को देश-विदेश की चल-अचल संपत्तियों में लगाने के नाम पर खपाया गया। जांच एजेंसी ने 50 से ज्यादा शेल कंपनियों के नेटवर्क का पता लगाने का दावा किया है।

30 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति फ्रीज

तलाशी के दौरान ED ने बड़ी संख्या में आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल सामग्री जब्त की। एजेंसी ने अपराध से अर्जित मानी जा रही 30 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियों और वित्तीय निवेशों को फ्रीज किया है। इनमें लिस्टेड शेयर और सिक्योरिटीज, म्यूचुअल फंड, LIC पॉलिसियां, बैंक बैलेंस और 9 महंगी गाड़ियां शामिल हैं।

इसके अलावा तलाशी में 1.53 करोड़ रुपये नकद, करीब 35 लाख रुपये की विदेशी मुद्रा तथा लगभग 5.25 करोड़ रुपये मूल्य के सोने के आभूषण और चांदी की सिल्लियां जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है।

2009 से निवेश के नाम पर जुटाई जा रही थी रकम

ED ने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों की पुलिस द्वारा दर्ज FIR के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। इन मामलों में आरोप लगाया गया था कि वर्ष 2009 से समीर अग्रवाल यानी सागा ग्रुप द्वारा प्रचारित विभिन्न जमा योजनाओं में लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया गया।

जांच एजेंसी के अनुसार, निवेशकों को निश्चित और असामान्य रूप से ऊंचे रिटर्न का भरोसा दिलाया गया, जबकि ऐसे रिटर्न देने के लिए कोई वास्तविक और पर्याप्त कारोबारी गतिविधि मौजूद नहीं थी। इसी कथित व्यवस्था के जरिए हजारों करोड़ रुपये जमा किए गए।

समीर अग्रवाल फरार

ED के मुताबिक, सागा ग्रुप के CMD और मुख्य नियंत्रक बताए जा रहे समीर अग्रवाल देश छोड़कर फरार हैं। जांच एजेंसी ने मामले में पहले भी दो अलग-अलग प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के तहत संपत्तियां अटैच की हैं।

ग्रुप के एक प्रमुख अधिकारी रवि शंकर तिवारी को 14 जुलाई को PMLA के तहत गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद ED ने 24 जुलाई को विशेष अदालत में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट भी दाखिल की।

ED की कार्रवाई से कथित पोंजी नेटवर्क में शामिल लोगों और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन पर जांच का शिकंजा और कस गया है। एजेंसी अब जब्त दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड, शेल कंपनियों और कथित हवाला नेटवर्क के जरिए धन के प्रवाह की पड़ताल कर रही है।