दूध और पनीर पर खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, चार नमूने जांच के लिए भेजे गए; स्कूलों में 24 खाद्य नमूने मानक अनुरूप मिले

दूध-पनीर की शुद्धता पर खाद्य विभाग का शिकंजा, जालौन में डेयरियों और पनीर यूनिट पर छापेमारी; 4 नमूने जांच के लिए भेजे, स्कूलों में 24 खाद्य नमूने मानक अनुरूप मिले

दूध और पनीर पर खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, चार नमूने जांच के लिए भेजे गए; स्कूलों में 24 खाद्य नमूने मानक अनुरूप मिले

माधौगढ़ और कालपी क्षेत्र में दूध-पनीर के नमूने लिए गए, जांच रिपोर्ट के बाद होगी विधिक कार्रवाई; स्कूलों में मध्यान्ह भोजन सामग्री के 24 नमूने मानक अनुरूप मिले

उरई। जनपद जालौन में मिलावटी दूध और दुग्ध उत्पादों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने अभियान तेज कर दिया है। जिलाधिकारी के निर्देशों के अनुपालन में विभाग की टीमों ने गुरुवार, 20 अगस्त को अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई करते हुए दूध, मिश्रित दूध और पनीर के कुल चार नमूने संग्रहित किए। इन सभी नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। जांच रिपोर्ट आने के बाद संबंधित खाद्य कारोबारियों के खिलाफ नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जाएगी।

मिलावटखोरी पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए डॉ. सी.आर. प्रजापति, सहायक आयुक्त (खाद्य)-द्वितीय, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, जालौन के निर्देशन में दो टीमों का गठन किया गया था। टीमों को जिले में दूध और दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता की जांच करने तथा संदिग्ध खाद्य पदार्थों के नमूने लेने के निर्देश दिए गए थे।

अभियान के तहत प्रथम टीम ने तहसील माधौगढ़ क्षेत्र के जगम्मनपुर में स्थित कामधेनु डेयरी और केशव डेयरी का निरीक्षण किया। टीम ने दोनों डेयरियों से दूध के एक-एक नमूने संग्रहित किए। अधिकारियों ने डेयरी संचालकों को खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता बनाए रखने तथा किसी भी प्रकार की मिलावट नहीं करने की स्पष्ट हिदायत दी।

वहीं, दूसरी टीम ने तहसील कालपी क्षेत्र में कार्रवाई की। नियामतपुर स्थित जितेन्द्र सिंह की पनीर निर्माण इकाई से पनीर का एक नमूना लिया गया। इसके अलावा काशीराम खेड़ा स्थित अनन्त प्रताप डेयरी से मिश्रित दूध का एक नमूना संग्रहित किया गया। इस तरह दोनों टीमों द्वारा कुल चार नमूने लिए गए हैं।

खाद्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक संग्रहित सभी नमूनों को नियमानुसार जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। प्रयोगशाला से जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि संबंधित खाद्य पदार्थ निर्धारित गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर खरे उतरते हैं या नहीं। यदि जांच में किसी प्रकार की मिलावट या मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित खाद्य कारोबारियों के विरुद्ध खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत विधिक कार्रवाई की जाएगी।

अभियान दल में मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी विनोद कुमार राय, खाद्य सुरक्षा अधिकारी अनिल कुमार कटियार, कन्हैया लाल यादव, सुनील कुमार एवं महेश प्रसाद शामिल रहे। टीम ने कार्रवाई के दौरान खाद्य कारोबारियों को साफ तौर पर निर्देश दिए कि दूध, पनीर और अन्य खाद्य पदार्थों में किसी भी तरह की मिलावट न की जाए। अधिकारियों ने कहा कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ विभाग सख्ती से कार्रवाई करेगा।

सहायक आयुक्त (खाद्य)-द्वितीय डॉ. सी.आर. प्रजापति ने बताया कि जनपदवासियों को शुद्ध और सुरक्षित दूध तथा दुग्ध उत्पाद उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से जिले में लगातार निरीक्षण और नमूना संग्रहण की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने खाद्य कारोबारियों से भी अपील की कि वे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता न करें और निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करें।

खाद्य सचल प्रयोगशाला से स्कूलों में जांच

इसी दिन खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की खाद्य सचल प्रयोगशाला ने जिले के सरकारी विद्यालयों में भी खाद्य सुरक्षा को लेकर जागरूकता और जांच अभियान चलाया। प्राथमिक विद्यालय गढ़र, प्राथमिक विद्यालय कुकरगांव तथा कन्या प्राथमिक विद्यालय गढ़र में विद्यार्थियों को खाद्य सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया।

अधिकारियों ने विद्यार्थियों को भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और सुरक्षित खाद्य पदार्थों के महत्व के बारे में जानकारी दी। बच्चों को बताया गया कि भोजन तैयार करने से लेकर उसे खाने तक स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। साफ पानी, स्वच्छ बर्तन और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री का इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

इसके साथ ही विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली खाद्य सामग्री की जांच भी खाद्य सचल प्रयोगशाला के माध्यम से की गई। विभाग के अनुसार कुल 24 नमूनों की प्राथमिक जांच की गई और सभी नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए गए। इससे विद्यालयों में विद्यार्थियों को दिए जा रहे मध्यान्ह भोजन की सामग्री की गुणवत्ता को लेकर राहत मिली है।

खाद्य विभाग का यह अभियान एक ओर जहां दूध और पनीर जैसे रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों में मिलावट पर नजर रखने के उद्देश्य से चलाया गया, वहीं दूसरी ओर स्कूलों में बच्चों को सुरक्षित भोजन के प्रति जागरूक करने पर भी जोर दिया गया। विभाग का कहना है कि खाद्य सुरक्षा केवल बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यालयों और सार्वजनिक संस्थानों में इस्तेमाल होने वाली खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की निगरानी भी जरूरी है।

अधिकारियों ने बताया कि खाद्य पदार्थों में मिलावट से आम लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए समय-समय पर नमूने लेकर उनकी जांच कराना और मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई करना विभाग की नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है।

जिले में दूध और दुग्ध उत्पादों के खिलाफ शुरू किए गए इस अभियान से डेयरी संचालकों और पनीर निर्माताओं में भी सतर्कता बढ़ने की उम्मीद है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अभियान आगे भी जारी रहेगा और अलग-अलग क्षेत्रों में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच की जाएगी।

डॉ. प्रजापति ने कहा कि जनपदवासियों को शुद्ध एवं सुरक्षित खाद्य और पेय पदार्थ उपलब्ध कराने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है। खाद्य कारोबारियों को भी निर्देशित किया जा रहा है कि वे नियमों का पालन करें और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ न करें।

इस कार्रवाई के दौरान लिए गए दूध, मिश्रित दूध और पनीर के चार नमूनों की प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट का इंतजार रहेगा। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। वहीं, स्कूलों में जांचे गए 24 खाद्य नमूनों के मानक अनुरूप पाए जाने से विभाग के अभियान के एक महत्वपूर्ण हिस्से को सकारात्मक परिणाम मिला है। जिले में खाद्य सुरक्षा को लेकर विभाग की यह कार्रवाई आगे भी जारी रहने की बात कही गई है।