NH-719 पर लगातार हादसों से आक्रोश: राष्ट्रपति के नाम भिण्ड के नागरिकों का गंभीर प्रतिवेदन, 6 लेन निर्माण की मांग
NH-719 पर लगातार मौतों से भिण्ड में आक्रोश: राष्ट्रपति को भेजा गंभीर प्रतिवेदन, 6 लेन निर्माण की मांग
हालिया हादसे में 8 की मौत और 23 घायल होने के बाद उठी निर्णायक कार्रवाई की मांग
हादसों पर अब सिर्फ मुआवजा नहीं, स्थायी समाधान चाहती है जनता
संत समाज, युवा और सामाजिक संगठनों के बाद नागरिकों ने राष्ट्रपति से लगाई गुहार
भिण्ड। ग्वालियर-इटावा राष्ट्रीय राजमार्ग NH-719 की बदहाल स्थिति और इस मार्ग पर लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं को लेकर भिण्ड जिले के नागरिकों ने अब राष्ट्रपति महोदय से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि NH-719 अब केवल आवागमन का मार्ग नहीं रह गया है, बल्कि लगातार हादसों और जनहानि के कारण लोगों के लिए गंभीर खतरे का पर्याय बनता जा रहा है। हाल ही में हुए दर्दनाक हादसे में 8 लोगों की मौत और 23 लोगों के घायल होने की घटना ने एक बार फिर सड़क की सुरक्षा व्यवस्था और चौड़ीकरण की मांग को मजबूती से सामने ला दिया है।
भिण्ड जिले के गोहद क्षेत्र के नागरिकों की ओर से पुखराज भटेले और गौरव राज तेजस्वी ने राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली के नाम गंभीर प्रतिवेदन एवं करुण निवेदन भेजते हुए NH-719 की स्थिति का संज्ञान लेने और संबंधित सक्षम अधिकारियों से रिपोर्ट तलब कराने का आग्रह किया है।
प्रतिवेदन में कहा गया है कि ग्वालियर-इटावा राष्ट्रीय राजमार्ग क्षेत्र के हजारों लोगों के दैनिक आवागमन का प्रमुख मार्ग है। इसके बावजूद सड़क की स्थिति, यातायात दबाव और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि बार-बार हादसों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
हादसे ने फिर झकझोरा
हालिया सड़क हादसे में आठ लोगों की मौत और 23 से अधिक लोगों के घायल होने की घटना के बाद क्षेत्र में गहरा आक्रोश और चिंता है। प्रतिवेदन में कहा गया है कि प्रत्येक दुर्घटना के बाद कई परिवारों की जिंदगी बदल जाती है। किसी परिवार का बेटा, किसी का पिता, पति या घर का मुख्य सहारा हादसे का शिकार हो जाता है।
नागरिकों ने स्पष्ट कहा कि दुर्घटना के बाद मिलने वाला मुआवजा किसी मृत व्यक्ति को वापस नहीं ला सकता। शासन की वास्तविक जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि सड़क की कमियों और दुर्घटनाओं के कारणों को दूर किया जाए, ताकि भविष्य में दूसरे परिवारों को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।
वर्षों से उठ रही 6 लेन की मांग
क्षेत्रवासियों का कहना है कि NH-719 को सुरक्षित और पर्याप्त चौड़ा करने की मांग लंबे समय से उठती रही है। संत समाज, सामाजिक संगठनों, युवाओं, व्यापारियों और आम नागरिकों ने अलग-अलग स्तर पर सड़क की समस्या को उठाया है।
प्रतिवेदन में सवाल किया गया है कि आखिर किसी सड़क को गंभीर समस्या मानने के लिए कितने हादसे और कितनी मौतें जरूरी हैं। नागरिकों का कहना है कि दुर्घटनाओं के बाद केवल संवेदना व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है। अब दुर्घटनाओं के मूल कारणों को खत्म करने के लिए स्थायी और समयबद्ध कार्रवाई की जरूरत है।
क्षेत्रवासी विशेष रूप से NH-719 के चौड़ीकरण और 6 लेन निर्माण की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक सड़क की क्षमता और सुरक्षा व्यवस्था में स्थायी सुधार नहीं होगा, तब तक दुर्घटनाओं का खतरा बना रहेगा।
आश्वासन नहीं, जमीन पर काम चाहिए
प्रतिवेदन में कहा गया है कि जनता लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग सरकार तक पहुंचा चुकी है। संत समाज ने आवाज उठाई, युवाओं ने आंदोलन किए और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन तक समस्या पहुंचाई, लेकिन सड़क पर वास्तविक परिवर्तन दिखाई देना जरूरी है।
नागरिकों का कहना है कि लंबे समय से मिल रहे आश्वासन अब उनके लिए पर्याप्त नहीं हैं। जनता चाहती है कि परियोजना की वास्तविक स्थिति, स्वीकृति, डीपीआर, निर्माण की समयसीमा और अब तक हुई कार्रवाई को सार्वजनिक किया जाए।
प्रतिवेदन में यहां तक कहा गया है कि यदि आर्थिक संसाधनों की कमी सड़क निर्माण में बाधा है तो क्षेत्रवासी अपनी सामर्थ्य के अनुसार जनसहयोग देने के लिए भी तैयार हैं। हालांकि नागरिकों ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण जनता के चंदे से नहीं, बल्कि शासन की प्राथमिकता और संवैधानिक जिम्मेदारी के तहत होना चाहिए।
राष्ट्रपति से छह प्रमुख मांगें
भिण्ड के नागरिकों ने राष्ट्रपति महोदय से मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित सक्षम प्राधिकारियों से वस्तुस्थिति की रिपोर्ट प्राप्त कराने का आग्रह किया है। प्रतिवेदन में मुख्य रूप से छह मांगें रखी गई हैं।
पहली, NH-719 की वर्तमान स्थिति और इस पर होने वाली दुर्घटनाओं की स्वतंत्र समीक्षा कराई जाए।
दूसरी, दुर्घटना संभावित स्थानों पर तत्काल सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं।
तीसरी, प्रस्तावित चौड़ीकरण अथवा 6 लेन परियोजना की स्पष्ट समयसीमा सार्वजनिक की जाए।
चौथी, निर्माण प्रक्रिया में देरी के कारणों की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए।
पांचवीं, हादसों में मृतकों और घायलों के परिवारों को उपलब्ध सहायता एवं राहत व्यवस्था की समीक्षा की जाए।
छठी, भविष्य में दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्थायी और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए।
‘किसी सरकार के खिलाफ नहीं, मौत के खिलाफ संघर्ष’
प्रतिवेदन में नागरिकों ने स्पष्ट किया है कि उनकी मांग किसी राजनीतिक दल या सरकार के विरोध में नहीं है। उनका कहना है कि यह संघर्ष असुरक्षित सड़क और लगातार हो रही मौतों के खिलाफ है।
नागरिकों ने कहा कि भिण्ड की जनता विकास चाहती है, लेकिन उससे पहले सुरक्षित जीवन और आवागमन का अधिकार चाहती है। उनका कहना है कि सड़क ऐसी होनी चाहिए जहां लोगों को केवल अपनी मंजिल की चिंता हो, न कि इस बात का डर कि वे सुरक्षित रूप से मंजिल तक पहुंच भी पाएंगे या नहीं।
अब ‘सुरक्षित NH-719’ की मांग
प्रतिवेदन के अंत में नागरिकों ने कहा कि यदि लगातार दुर्घटनाओं वाले इस मार्ग पर निर्णायक कदम उठाए जाते हैं तो यह केवल भिण्ड जिले की जनता की जीत नहीं होगी, बल्कि मानवीय जीवन की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।
पुखराज भटेले और गौरव राज तेजस्वी के साथ सुनील फौजी, जयदीप फौजी, महेश करारिया, पिंकी उचड़िया, कुलदीप सिंह गुर्जर, अभिषेक सिंह गुर्जर सहित भिण्ड जिले के जागरूक नागरिकों ने इस मांग का समर्थन किया है।
जनता का संदेश साफ है—“अब और मौतें नहीं, अब सुरक्षित NH-719 चाहिए।”
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस