पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण ‎यादव की 40 साल पुरानी कॉटन मिल होगी नीलाम, NCDC की 24.16 करोड़ की देनदारी; 23 सितंबर को जमीन-भवन और मशीनरी की लगेगी बोली

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव की 40 साल पुरानी कॉटन मिल नीलाम होने वाली है। जवाहरलाल नेहरू सहकारी एग्रीकल्चर प्रोड्यूज प्रोसेसिंग सोसायटी लिमिटेड, खरगोन के नाम से चल रही इस मिल पर नेशनल को-ऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एनसीडीसी) ने ब्याज समेत 24 करोड़ 16 लाख रुपए का बकाया निकाला है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण ‎यादव की  40 साल पुरानी कॉटन मिल होगी नीलाम, NCDC की 24.16 करोड़ की देनदारी; 23 सितंबर को जमीन-भवन और मशीनरी की लगेगी बोली

मध्य प्रदेश के खरगोन जिले की बड़ी सहकारी संस्थाओं में शुमार जवाहरलाल नेहरू सहकारी एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस प्रोसेसिंग सोसाइटी लिमिटेड (सूत मिल) पर वित्तीय संकट के बादल गहरा गए हैं।

खरगोन। मध्यप्रदेश कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव की अध्यक्षता वाली जवाहरलाल नेहरू सहकारी एग्रीकल्चर प्रोड्यूस प्रोसेसिंग सोसायटी लिमिटेड से जुड़ी कॉटन मिल अब नीलामी की प्रक्रिया में पहुंच गई है। करीब 40 साल पुरानी इस मिल पर नेशनल को-ऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NCDC) की बड़ी देनदारी सामने आने के बाद उसकी जमीन, भवन और मशीनरी को नीलाम करने की तैयारी है। NCDC ने ब्याज समेत सोसायटी पर 24 करोड़ 16 लाख 39 हजार 17 रुपए की देनदारी बताई है।

NCDC की क्षेत्रीय निदेशक इंद्रजीत कौर की ओर से जारी नीलामी सूचना के मुताबिक मिल की संपत्ति की नीलामी 23 सितंबर को प्रस्तावित है। इस कार्रवाई का उद्देश्य सोसायटी पर बकाया राशि की वसूली करना है। नीलामी में सोसायटी की करीब 19.25 एकड़ जमीन, उस पर बने भवन और मिल की मशीनरी शामिल होगी। पूरी संपत्ति को दो हिस्सों में बांटकर नीलामी की जाएगी।

पहले हिस्से के लिए करीब 4.25 करोड़ रुपए का रिजर्व प्राइस निर्धारित किया गया है, जबकि दूसरे हिस्से का रिजर्व प्राइस करीब 3.83 करोड़ रुपए रखा गया है। इस तरह दोनों हिस्सों की न्यूनतम निर्धारित कीमत लगभग 8 करोड़ रुपए के आसपास बैठती है। हालांकि, नीलामी में संपत्ति की वास्तविक कीमत बोली प्रक्रिया के दौरान तय होगी।

20.97 करोड़ से बढ़कर 24.16 करोड़ हुई देनदारी

जानकारी के अनुसार NCDC ने 6 मई 2025 को सोसायटी से करीब 20.97 करोड़ रुपए की वसूली की मांग रखी थी। इसके बाद 25 अगस्त 2025 को निगम ने मिल की संपत्ति पर कब्जा ले लिया। समय के साथ ब्याज जुड़ने के कारण बकाया राशि बढ़ती चली गई। 16 जुलाई तक ब्याज सहित यह देनदारी बढ़कर 24 करोड़ 16 लाख 39 हजार 17 रुपए हो गई।

सोसायटी पर केवल NCDC का ही कर्ज नहीं है। जानकारी के मुताबिक यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और NABARD की भी देनदारियां हैं। ऐसे में नीलामी से मिलने वाली रकम को लेकर यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि अलग-अलग वित्तीय संस्थानों के बकाये का निपटारा किस तरह किया जाएगा।

करीब 40 साल पुरानी है कॉटन मिल

खरगोन जिले में स्थित यह कॉटन मिल करीब चार दशक पुरानी बताई जाती है। लंबे समय तक यहां कपास से जुड़े उत्पादन और प्रसंस्करण का काम होता रहा। सोसायटी के अधीन शुगर मिल भी संचालित होती थी, लेकिन वह लंबे समय से बंद है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2023-24 में सोसायटी ने 25.56 करोड़ रुपए का मुनाफा दर्ज किया था। इसके बाद हुए चुनाव में अरुण यादव अध्यक्ष बने और दीपक कट्टी को प्रबंध निदेशक की जिम्मेदारी मिली। हालांकि, इसके बाद मिल की आर्थिक स्थिति खराब होने और लगातार घाटे में जाने की बात सामने आई।

दिसंबर 2023 में कॉटन मिल बंद हो गई। इसके बाद यूनिट दोबारा शुरू नहीं हो सकी। प्रबंधन के मुताबिक मिल पिछले करीब एक साल से बंद पड़ी है। लंबे समय तक उत्पादन बंद रहने के कारण मशीनरी और अन्य परिसंपत्तियों के उपयोग पर भी असर पड़ा है।

राजनीतिक और सहकारी क्षेत्र में रहा है प्रभाव

जवाहरलाल नेहरू सहकारी एग्रीकल्चर प्रोड्यूस प्रोसेसिंग सोसायटी लिमिटेड का संबंध लंबे समय से यादव परिवार से रहा है। सोसायटी की कमान पहले अरुण यादव और सचिन यादव के पिता सुभाष यादव के पास रही है। बाद में उनकी पत्नी ने भी चेयरपर्सन की जिम्मेदारी संभाली।

वर्तमान में अरुण यादव सोसायटी के अध्यक्ष हैं। मौजूदा बोर्ड में डिप्टी चेयरमैन भूपेंद्र भरत यादव और संगीता सिलदर पटेल सहित कुल नौ निदेशक शामिल हैं। सहकारी क्षेत्र में इस संस्था का लंबे समय से प्रभाव रहा है और इसकी गतिविधियों पर स्थानीय स्तर पर राजनीतिक नजर भी बनी रही है।

घाटे के बाद बढ़ी मुश्किलें

कॉटन मिल के बंद होने के बाद सोसायटी की वित्तीय स्थिति को लेकर सवाल उठते रहे हैं। एक ओर संस्था के लाभ में रहने की जानकारी सामने आई थी, वहीं बाद के दौर में मिल के बंद होने और देनदारियों के बढ़ने से स्थिति बदल गई। अब NCDC की ओर से नीलामी की कार्रवाई शुरू किए जाने के बाद सोसायटी की वित्तीय स्थिति एक बार फिर चर्चा में है।

नीलामी की प्रक्रिया के तहत जमीन, भवन और मशीनरी को अलग-अलग हिस्सों में रखा गया है। इससे संभावित खरीदारों को परिसंपत्तियों के अनुसार बोली लगाने का अवसर मिलेगा। नीलामी से प्राप्त राशि का इस्तेमाल NCDC की बकाया राशि की वसूली के लिए किया जाएगा।

अन्य संस्थानों का कर्ज भी बड़ी चुनौती

सोसायटी पर NCDC के अलावा यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और NABARD की देनदारियां होने की जानकारी सामने आने से मामला और महत्वपूर्ण हो गया है। यदि नीलामी से मिलने वाली रकम NCDC की पूरी देनदारी से कम रहती है, तो बाकी रकम की वसूली किस प्रक्रिया के तहत होगी, यह भी देखने वाली बात होगी।

वहीं, यदि संपत्ति की नीलामी से पर्याप्त राशि प्राप्त होती है तो संबंधित वित्तीय संस्थानों के दावों और बकाये के निपटारे की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। सहकारी क्षेत्र से जुड़े लोगों की नजर अब 23 सितंबर को होने वाली प्रस्तावित नीलामी पर है।

अरुण यादव से संपर्क की कोशिश, प्रबंध निदेशक ने दी जानकारी

मामले को लेकर अरुण यादव से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। वहीं सोसायटी के प्रबंध निदेशक दीपक कट्टी ने नीलामी की प्रक्रिया शुरू होने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि NCDC ने नीलामी की कार्रवाई शुरू कर दी है और इसकी सूचना साइट पर अपलोड की गई है।

दीपक कट्टी ने यह भी माना कि यूनिट पिछले करीब एक साल से बंद पड़ी है। ऐसे में अब नीलामी के जरिए संपत्ति से बकाया रकम की वसूली की कोशिश की जा रही है।

23 सितंबर की नीलामी पर टिकी नजर

करीब 19.25 एकड़ जमीन, भवन और मशीनरी की प्रस्तावित नीलामी सहकारी क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एक समय उत्पादन और लाभ से जुड़ी रही यह संस्था अब बड़ी वित्तीय देनदारी और बंद पड़ी औद्योगिक इकाई के कारण चर्चा में है।

23 सितंबर को प्रस्तावित नीलामी में कितनी बोली लगती है और संपत्ति से कितनी राशि प्राप्त होती है, इससे आगे की वसूली प्रक्रिया की दिशा तय होगी। फिलहाल NCDC की कार्रवाई के बाद अरुण यादव की अध्यक्षता वाली इस सहकारी संस्था की वित्तीय स्थिति और बंद पड़ी कॉटन मिल एक बार फिर राजनीतिक और सहकारी क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई है।