नर्सिंग छात्रों का प्रदर्शन: सीएम हाउस घेराव से पहले पुलिस ने रोका, लिखित आश्वासन पर अड़े विद्यार्थी

मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए नर्सिंग छात्र-छात्राएं बुधवार को भी प्रदर्शन कर रहे हैं। वे रैली के रूप में सीएम हाउस का घेराव करने पहुंचे। इसी बीच पॉलिटेक्निक चौाराहे पर पुलिस ने उन्हें रोक लिया। छात्रों की मांग है कि उन्हें सीएम हाउस जाने दिया जाए, जबकि पुलिस यहां से हटने का कह रही है। शाम 6 बजे तक वे नहीं हटे हैं।

नर्सिंग छात्रों का प्रदर्शन: सीएम हाउस घेराव से पहले पुलिस ने रोका, लिखित आश्वासन पर अड़े विद्यार्थी

भोपाल में बीएससी नर्सिंग और जीएनएम छात्रों का प्रदर्शन जारी है। मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे छात्रों को पुलिस ने पॉलीटेक्निक चौराहे पर रोक दिया। छात्र छह साल से लंबित परीक्षा, डिग्री, रजिस्ट्रेशन और छात्रवृत्ति की समस्याओं का समाधान चाहते हैं। उन्होंने लिखित आश्वासन और नर्सिंग मामले में शीघ्र निर्णय की मांग की है।

उरई/भोपाल। मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से राजधानी भोपाल पहुंचे बीएससी नर्सिंग और जीएनएम के छात्र-छात्राओं ने अपनी लंबित मांगों को लेकर बुधवार को जोरदार प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के लिए निकले प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने पॉलीटेक्निक चौराहे पर रोक दिया। इसके बाद छात्र-छात्राएं सड़क पर बैठ गए और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करने लगे। काफी देर तक प्रदर्शन जारी रहने के बावजूद विद्यार्थी मौके से हटने को तैयार नहीं हुए।

प्रदर्शन के दौरान कई विद्यार्थी भावुक नजर आए। छात्रों ने कहा कि वे लंबे समय से अपनी पढ़ाई, परीक्षा, डिग्री और रजिस्ट्रेशन से जुड़ी समस्याओं का समाधान कराने के लिए सरकार और संबंधित विभागों से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें ठोस राहत नहीं मिल पाई है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनका भविष्य किसी कॉलेज या व्यवस्था की कथित अनियमितता की वजह से प्रभावित नहीं होना चाहिए।

छह साल से भविष्य अधर में होने का आरोप

प्रदर्शनकारी नर्सिंग छात्रों का आरोप है कि नर्सिंग शिक्षा से जुड़ी अनियमितताओं और न्यायिक प्रक्रिया के कारण उनका भविष्य करीब छह साल से अटका हुआ है। विद्यार्थियों के मुताबिक समय पर परीक्षाएं नहीं होने से उनके शैक्षणिक सत्र प्रभावित हुए हैं। कई विद्यार्थी पढ़ाई पूरी करने के बाद भी परीक्षा, डिग्री और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में उलझे हुए हैं।

छात्रों का कहना है कि डिग्री और रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं मिलने के कारण उनके सामने नौकरी और आगे की पढ़ाई के अवसर भी प्रभावित हो रहे हैं। नर्सिंग जैसे पेशे में रजिस्ट्रेशन महत्वपूर्ण होने के कारण विद्यार्थियों को अपने करियर को लेकर लगातार चिंता बनी हुई है।

प्रदर्शनकारियों ने छात्रवृत्ति में देरी और उससे जुड़ी समस्याओं को भी उठाया। उनका कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति पढ़ाई जारी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में छात्रवृत्ति से जुड़े मामलों का समय पर निराकरण नहीं होने से उन्हें अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

पॉलीटेक्निक चौराहे पर पुलिस ने रोका

अपनी मांगों को लेकर छात्र-छात्राएं मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के लिए आगे बढ़ रहे थे। पुलिस ने उन्हें पॉलीटेक्निक चौराहे पर रोक दिया। पुलिस द्वारा आगे जाने से रोके जाने के बाद विद्यार्थियों ने वहीं सड़क पर बैठकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।

छात्रों ने नारेबाजी करते हुए सरकार से तत्काल उनकी समस्याओं का समाधान करने की मांग की। प्रदर्शनकारी लगातार यह कहते रहे कि वे केवल आश्वासन के आधार पर आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे। उनका कहना था कि लंबे समय से वे आश्वासन सुनते आ रहे हैं, लेकिन समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हुआ।

प्रदर्शन में शामिल विद्यार्थियों ने कहा कि वे किसी टकराव के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन अपने भविष्य को लेकर अब पीछे हटने की स्थिति में भी नहीं हैं। छात्रों ने सरकार से स्पष्ट और समयबद्ध निर्णय की मांग की।

कॉलेजों की मान्यता की जिम्मेदारी छात्रों की नहीं

प्रदर्शनकारियों ने नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता से जुड़े मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। छात्रों का कहना है कि यदि किसी कॉलेज को मान्यता देने की प्रक्रिया में अनियमितता हुई है या किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो उसकी जिम्मेदारी विद्यार्थियों पर नहीं डाली जानी चाहिए।

छात्रों ने कहा कि कॉलेज में प्रवेश लेने से पहले विद्यार्थी संबंधित संस्थान और व्यवस्था पर भरोसा करते हैं। यदि किसी कॉलेज की मान्यता को लेकर बाद में सवाल उठते हैं तो उसकी जांच और जिम्मेदारी संबंधित शासन, प्रशासन तथा कॉलेज प्रबंधन की तय होनी चाहिए।

विद्यार्थियों का आरोप है कि व्यवस्था की कथित कमियों का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करने के साथ विद्यार्थियों के हितों को प्राथमिकता दी जाए।

मौखिक आश्वासन नहीं, लिखित भरोसा चाहते हैं छात्र

प्रदर्शन के दौरान मनोज रजक ने बताया कि सरकार के सामने छात्रों की समस्याएं रखी गई हैं और तत्काल ठोस निर्णय लेने की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं और अब वे केवल मौखिक आश्वासन के आधार पर आंदोलन समाप्त नहीं करना चाहते।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार यदि उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन देती है और समाधान की स्पष्ट समयसीमा तय करती है, तभी आंदोलन समाप्त करने पर विचार किया जाएगा। छात्रों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक विवाद को खड़ा करना नहीं, बल्कि अपनी शिक्षा और भविष्य को सुरक्षित करना है।

परीक्षाएं एक साथ कराने की मांग

नर्सिंग छात्रों की प्रमुख मांगों में बीएससी नर्सिंग और जीएनएम के विद्यार्थियों की लंबित परीक्षाएं जल्द से जल्द कराना शामिल है। छात्रों ने मांग की है कि सभी श्रेणियों के विद्यार्थियों की परीक्षाएं बिना किसी और देरी के आयोजित की जाएं।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया में सभी संबंधित विद्यार्थियों को शामिल किया जाना चाहिए। इसमें सूटेबल, अनसूटेबल और ग्वालियर क्षेत्र के 56 कॉलेजों से जुड़े विद्यार्थियों को भी शामिल करने की मांग रखी गई है।

छात्रों का कहना है कि अलग-अलग स्तर पर परीक्षाएं और प्रक्रियाएं लंबित रहने से उनका शैक्षणिक कैलेंडर लगातार बिगड़ रहा है। इसलिए सरकार और संबंधित विभाग को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे सभी पात्र विद्यार्थियों की परीक्षाएं जल्द पूरी हो सकें।

दिसंबर 2026 तक डिग्री और रजिस्ट्रेशन की मांग

प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने बैच 2020-21 के छात्रों के लिए दिसंबर 2026 तक डिग्री और रजिस्ट्रेशन नंबर उपलब्ध कराने की मांग रखी है। छात्रों का कहना है कि डिग्री और रजिस्ट्रेशन के अभाव में वे नौकरी तथा उच्च शिक्षा के लिए आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।

नर्सिंग विद्यार्थियों ने सरकार से मांग की है कि इस मामले में स्पष्ट समयसीमा तय की जाए और संबंधित विभागों को जिम्मेदारी दी जाए, ताकि प्रक्रिया बार-बार लंबित न हो।

छात्रवृत्ति की समस्या दूर करने की मांग

प्रदर्शनकारियों ने छात्रवृत्ति से जुड़ी समस्याओं का भी शीघ्र निराकरण करने की मांग की है। विद्यार्थियों का कहना है कि कई छात्रों को छात्रवृत्ति के लिए लंबे समय से इंतजार करना पड़ रहा है।

छात्रों ने सरकार से मांग की कि लंबित छात्रवृत्ति मामलों की जांच कर पात्र विद्यार्थियों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए। उनका कहना है कि आर्थिक समस्याओं के कारण कई विद्यार्थियों के सामने पढ़ाई जारी रखना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

स्पेशल बेंच से जल्द सुनवाई की मांग

नर्सिंग मामले की न्यायिक प्रक्रिया को लेकर भी विद्यार्थियों ने अपनी मांग सामने रखी। छात्रों की मांग है कि मामले की जल्द से जल्द स्पेशल बेंच के माध्यम से सुनवाई कराई जाए और नर्सिंग विद्यार्थियों के हित में निर्णय लिया जाए।

विद्यार्थियों का कहना है कि न्यायिक प्रक्रिया में देरी का असर सीधे उनके शैक्षणिक और व्यावसायिक भविष्य पर पड़ रहा है। इसलिए मामले को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने की जरूरत है।

हजारों विद्यार्थियों के भविष्य का सवाल

प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि यह केवल कुछ विद्यार्थियों की समस्या नहीं है, बल्कि हजारों नर्सिंग छात्रों के भविष्य से जुड़ा मामला है। विद्यार्थियों ने सरकार से अपील की कि पूरे मामले को मानवीय और शैक्षणिक दृष्टिकोण से देखा जाए।

छात्रों के मुताबिक उन्हें जल्द परीक्षा देने, डिग्री हासिल करने और रजिस्ट्रेशन प्राप्त करने का अवसर मिलना चाहिए, ताकि वे अपने करियर में आगे बढ़ सकें। उनका कहना है कि यदि किसी स्तर पर नियमों या मान्यता की प्रक्रिया में गलती हुई है तो उसकी जांच कर दोषी पक्ष की जिम्मेदारी तय की जाए, लेकिन विद्यार्थियों को उसका नुकसान नहीं उठाना चाहिए।

बुधवार को पॉलीटेक्निक चौराहे पर हुए प्रदर्शन में छात्रों का रुख साफ रहा कि वे अपनी मांगों पर ठोस निर्णय चाहते हैं। मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने से रोके जाने के बाद भी विद्यार्थी काफी देर तक सड़क पर डटे रहे। अब उनकी नजर सरकार की ओर से मिलने वाले लिखित आश्वासन और लंबित नर्सिंग मामलों के समाधान पर है।

छात्रों ने दोहराया कि वे अपनी परीक्षाओं, डिग्री, रजिस्ट्रेशन और छात्रवृत्ति से जुड़ी समस्याओं का समयबद्ध समाधान चाहते हैं। साथ ही उन्होंने सरकार से नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता से जुड़े मामलों में जिम्मेदारी तय कर विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित करने की मांग की है।