ई-अटेंडेंस में ढील नहीं, सभी शिक्षकों को लगाना होगा सिस्टम: बैतूल में बोले मंत्री उदय प्रताप सिंह; TET और चेक पोस्ट पर भी सरकार का रुख स्पष्ट

स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि टीईटी मामले में सर्वोच्च न्यायालय का जो भी फैसला होगा. उसका सरकार पालन करेगी. इसके अलावा, उन्होंने कहा कि ई-अटेंडेंस भी अनिवार्य रहेगी. आगे क्या कुछ कहा है आपको बताते हैं.

ई-अटेंडेंस में ढील नहीं, सभी शिक्षकों को लगाना होगा सिस्टम: बैतूल में बोले मंत्री उदय प्रताप सिंह; TET और चेक पोस्ट पर भी सरकार का रुख स्पष्ट

ई-अटेंडेंस में ढील नहीं, सभी शिक्षकों को लगाना होगा सिस्टम

बैतूल दौरे पर शिक्षा मंत्री ने रखा सरकार का पक्ष

TET अनिवार्यता पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय अंतिम

बैतूल। मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने बैतूल दौरे के दौरान शिक्षा व्यवस्था से जुड़े दो अहम मुद्दों पर सरकार की स्थिति साफ की। इनमें शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता और स्कूलों में शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली यानी ई-अटेंडेंस प्रमुख रहे। मंत्री ने साफ कहा कि ई-अटेंडेंस व्यवस्था में किसी भी तरह की ढील नहीं दी जाएगी और सभी शिक्षकों को इसे अपनाना ही होगा।

इसके साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सड़क सुरक्षा और परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य में चेक पोस्ट व्यवस्था को फिर से सक्रिय किया जा सकता है।

ई-अटेंडेंस पर सख्ती: “सिस्टम लागू रहेगा, सभी को जुड़ना होगा”

मंत्री उदय प्रताप सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए ई-अटेंडेंस प्रणाली बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था केवल निगरानी का माध्यम नहीं है, बल्कि इससे स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति नियमित होगी और छात्रों की पढ़ाई पर सकारात्मक असर पड़ेगा।

उन्होंने बताया कि सरकार को लगातार यह फीडबैक मिल रहा है कि कई जगहों पर उपस्थिति को लेकर लापरवाही होती है। ऐसे में डिजिटल सिस्टम के माध्यम से इसे नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है।

मंत्री ने कहा— “ई-अटेंडेंस में किसी भी तरह की ढील नहीं दी जाएगी। सभी शिक्षकों को यह प्रणाली अपनानी होगी। यह व्यवस्था शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए है, न कि किसी को परेशान करने के लिए।”

शिक्षकों में नाराजगी पर सरकार का रुख

हालांकि ई-अटेंडेंस को लेकर प्रदेश के कुछ शिक्षक संगठनों में नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में नेटवर्क समस्या के कारण ऑनलाइन हाजिरी में दिक्कत आती है। इसके अलावा कई शिक्षक इसे अतिरिक्त प्रशासनिक दबाव के रूप में भी देख रहे हैं।

इस पर सरकार का कहना है कि तकनीकी समस्याओं को सुधारने पर काम किया जा रहा है, लेकिन नीति को वापस लेने का कोई सवाल नहीं है। विभाग का मानना है कि धीरे-धीरे यह प्रणाली पूरी तरह स्थिर हो जाएगी और इससे शिक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी।

TET अनिवार्यता पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय अहम

शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर भी मंत्री ने सरकार का पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि यह मामला वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है।

राज्य सरकार ने अपना पक्ष सॉलिसिटर जनरल के माध्यम से अदालत में प्रस्तुत कर दिया है। सरकार ने कहा है कि प्रदेश में शिक्षकों की नियुक्ति निर्धारित मापदंडों और नियमों के अनुसार ही की गई है।

मंत्री ने कहा कि यदि सर्वोच्च न्यायालय यह निर्देश देता है कि शिक्षकों को TET परीक्षा पास करनी होगी, तो राज्य सरकार उसे पूरी तरह लागू करेगी। उन्होंने कहा— “सरकार न्यायालय के हर आदेश का पालन करने के लिए बाध्य है और हम कानून के दायरे में रहकर ही सभी निर्णय लागू करेंगे।”

TET विवाद का शिक्षकों पर असर

TET की अनिवार्यता को लेकर लंबे समय से शिक्षक समुदाय में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कई पुराने शिक्षक इस नियम को लेकर चिंतित हैं कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को फिर से परीक्षा देनी पड़ सकती है।

वहीं शिक्षा विभाग का तर्क है कि TET का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता को सुनिश्चित करना है ताकि कक्षा में पढ़ाने वाले शिक्षक न्यूनतम योग्यता मानकों पर खरे उतरें।

सरकार का मानना है कि यदि न्यायालय का निर्णय आता है तो इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा ताकि किसी भी शिक्षक के हित प्रभावित न हों।

परिवहन व्यवस्था पर भी सख्ती के संकेत

अपने दौरे के दौरान मंत्री ने परिवहन विभाग से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की। उन्होंने संकेत दिया कि सड़क सुरक्षा और अवैध परिवहन गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए राज्य में चेक पोस्ट प्रणाली को फिर से मजबूत किया जा सकता है।

पहले कई स्थानों पर चेक पोस्ट हटाए जाने या निष्क्रिय होने के बाद अवैध परिवहन और ओवरलोडिंग जैसी शिकायतें बढ़ी हैं। सरकार अब इस पर पुनः निगरानी व्यवस्था लागू करने पर विचार कर रही है।

मंत्री ने कहा कि सड़क सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

शिक्षा व्यवस्था में डिजिटल बदलाव की दिशा

मध्य प्रदेश सरकार पिछले कुछ वर्षों से शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल बनाने की दिशा में काम कर रही है। ई-अटेंडेंस इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

इसके तहत शिक्षकों की उपस्थिति मोबाइल ऐप या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से दर्ज की जाती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्कूल समय पर खुलें और शिक्षण कार्य नियमित रूप से चले।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की व्यवस्था को सफल बनाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी ढांचे को और मजबूत करना जरूरी है।

बैतूल में मंत्री उदय प्रताप सिंह के बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि राज्य सरकार ई-अटेंडेंस प्रणाली पर किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं है। साथ ही TET मामले में सरकार ने अदालत के निर्णय को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही है।

इसके अलावा परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए चेक पोस्ट प्रणाली को फिर से सक्रिय करने की संभावना भी जताई गई है। कुल मिलाकर सरकार शिक्षा और परिवहन दोनों क्षेत्रों में सख्ती और सुधार की नीति पर आगे बढ़ती दिख रही है।