उरई में अतिक्रमण अभियान पर उठे सवाल: छोटे दुकानदारों पर कार्रवाई, बड़े होर्डिंग्स और पोल अब भी जस के तस

उरई में प्रशासन और नगर पालिका ने अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाकर सड़क व फुटपाथ से दुकानदारों का सामान हटाया और दोबारा अतिक्रमण पर कार्रवाई की चेतावनी दी। कार्रवाई से रास्ते साफ हुए, लेकिन लंबे समय से लगे बड़े होर्डिंग्स और पोल पर कार्रवाई न होने को लेकर सवाल उठे। स्थानीय लोगों ने सभी तरह के अतिक्रमण पर समान कार्रवाई और अवैध होर्डिंग्स की जांच की मांग की।

उरई में अतिक्रमण अभियान पर उठे सवाल: छोटे दुकानदारों पर कार्रवाई, बड़े होर्डिंग्स और पोल अब भी जस के तस

अतिक्रमण अभियान में छोटे दुकानदारों पर कार्रवाई, बड़े होर्डिंग्स पर उठे सवाल

सड़क और फुटपाथ से हटाया सामान, होर्डिंग्स-पोल पर कार्रवाई का इंतजार

अतिक्रमण हटाओ अभियान में समान कार्रवाई की मांग, बड़े होर्डिंग्स बने सवाल
उरई। शहर में बुधवार को एक बार फिर अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन और नगर पालिका की संयुक्त कार्रवाई हुई। करीब तीन बजे अंबेडकर चौराहे से शुरू हुआ अभियान शहीद भगत सिंह चौराहे की ओर आगे बढ़ा। अधिकारियों की मौजूदगी में सड़क और फुटपाथ पर रखे लोहे के ढालों, दुकानों के बाहर रखे सामान और रास्ते को घेरने वाली अन्य सामग्री को हटवाया गया। स्थायी रूप से सार्वजनिक रास्ते पर कब्जा करने वाले दुकानदारों को फटकार लगाते हुए तत्काल सामान हटाने के निर्देश दिए गए। साथ ही दोबारा अतिक्रमण करने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
अभियान के दौरान सिटी मजिस्ट्रेट और नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। दोनों अधिकारियों की मौजूदगी में संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए सड़क किनारे किए गए अतिक्रमण को हटाया गया। कार्रवाई के बाद कई स्थानों पर सड़क और फुटपाथ पहले की अपेक्षा साफ दिखाई दिए, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, अभियान के दौरान जिस तरह छोटे दुकानदारों और सड़क किनारे रखे सामान पर कार्रवाई की गई, उसी के बीच शहर में लंबे समय से खड़े बड़े-बड़े होर्डिंग्स और उनके पोल को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सड़क या फुटपाथ पर रखा सामान सार्वजनिक रास्ते में बाधा बन रहा है तो उस पर कार्रवाई जरूरी है, लेकिन अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सभी के लिए समान होनी चाहिए।
छोटे अतिक्रमण पर तुरंत कार्रवाई, बड़े होर्डिंग्स पर कब होगी कार्रवाई?
अभियान के दौरान सड़क किनारे रखे लोहे के ढालों और अन्य सामान को हटवाया गया। कई दुकानदारों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि सार्वजनिक रास्ते पर किसी भी तरह का सामान न रखा जाए। प्रशासन की इस कार्रवाई से यह संदेश गया कि सड़क और फुटपाथ को खाली रखना जरूरी है।
लेकिन इसी बीच लोगों ने शहर के विभिन्न हिस्सों में लंबे समय से लगे बड़े होर्डिंग फ्रेम और पोल की ओर भी प्रशासन का ध्यान खींचा। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई स्थानों पर बड़े आकार के होर्डिंग सड़क किनारे दिखाई देते हैं और उनके पोल भी लंबे समय से लगे हुए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इन होर्डिंग्स की अनुमति, निर्धारित मानकों और सुरक्षा संबंधी नियमों की जांच की जाती है?
लोगों का कहना है कि यदि किसी होर्डिंग या पोल से यातायात प्रभावित हो रहा है, फुटपाथ बाधित हो रहा है या सार्वजनिक स्थान का इस्तेमाल नियमों के विपरीत हो रहा है तो उसके खिलाफ भी उसी तरह कार्रवाई होनी चाहिए, जिस तरह दुकानदारों के सामान पर की जा रही है।
डीएम के निर्देशों के बावजूद पुराने होर्डिंग फ्रेम क्यों?
स्थानीय लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय की ओर से अवैध होर्डिंग्स और पोल हटाने के निर्देश दिए जाने की बात पहले भी सामने आती रही है। इसके बावजूद शहर के कई हिस्सों में पुराने होर्डिंग फ्रेम और पोल दिखाई देने की बात कही जा रही है।
ऐसे में लोगों की मांग है कि प्रशासन शहर में लगे सभी बड़े होर्डिंग्स का सत्यापन कराए। यह देखा जाए कि कौन से होर्डिंग अधिकृत हैं, किनके पास वैध अनुमति है और कौन से होर्डिंग निर्धारित नियमों या मानकों के विपरीत लगे हैं।
यदि जांच में कोई होर्डिंग अवैध या नियम विरुद्ध पाया जाता है तो उसके संचालक के खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए। इससे अतिक्रमण विरोधी अभियान की निष्पक्षता को लेकर लोगों का भरोसा मजबूत होगा।
पेड़ों को हटाने पर भी उठे सवाल
बुधवार की कार्रवाई के दौरान सड़क किनारे लगे कुछ पेड़ों को भी हटाया गया। इसके पीछे केबल टूटने की वजह बताई गई। हालांकि पेड़ों को हटाने की कार्रवाई को लेकर भी स्थानीय लोगों के बीच चर्चा होती रही।
लोगों का कहना है कि शहर में हरियाली को बचाने की जरूरत है। यदि किसी तकनीकी समस्या या केबल के कारण पेड़ हटाना जरूरी था तो इसके लिए क्या अन्य विकल्प तलाशे गए, यह भी स्पष्ट होना चाहिए। अतिक्रमण हटाने के अभियान में पर्यावरणीय पहलू को भी ध्यान में रखा जाना जरूरी है।
कार्रवाई से राहगीरों को राहत, लेकिन बड़े अतिक्रमण पर नजर
बुधवार की कार्रवाई में कई जगह सड़क और फुटपाथ से सामान हटाए जाने के बाद रास्ता कुछ हद तक खुला नजर आया। इससे पैदल चलने वाले लोगों और वाहन चालकों को राहत मिल सकती है। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि अभियान को केवल छोटे दुकानदारों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।
शहर को वास्तव में अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए सड़क, फुटपाथ, सार्वजनिक स्थान और यातायात व्यवस्था में बाधा डालने वाले हर प्रकार के अतिक्रमण की पहचान जरूरी है। इसमें दुकानों के बाहर रखा सामान ही नहीं, बल्कि अवैध निर्माण, बड़े होर्डिंग्स, पोल और अन्य स्थायी कब्जे भी शामिल होने चाहिए।
अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी नजर
बुधवार को शुरू हुए अभियान के बाद अब लोगों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। सवाल यह है कि क्या आने वाले दिनों में शहर के बड़े होर्डिंग्स और पोल की भी जांच होगी? क्या वर्षों से लगे होर्डिंग फ्रेमों की अनुमति और वैधता की पड़ताल की जाएगी? और यदि नियमों का उल्लंघन मिलता है तो क्या संबंधित संचालकों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अतिक्रमण हटाओ अभियान तभी प्रभावी माना जाएगा, जब कार्रवाई में किसी तरह का भेदभाव न हो। सड़क और फुटपाथ पर कब्जा करने वाले छोटे दुकानदारों को हटाने के साथ-साथ बड़े और स्थायी अतिक्रमण पर भी समान कार्रवाई जरूरी है।
प्रशासन की बुधवार की कार्रवाई से शहर के कुछ हिस्सों में रास्ते साफ हुए हैं, लेकिन अभियान की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि यह कार्रवाई कितनी व्यापक और निरंतर रहती है। यदि प्रशासन छोटे-बड़े सभी अतिक्रमणों को समान नजर से देखता है और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करता है तो शहर की यातायात व्यवस्था और सार्वजनिक स्थानों को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या अगला निशाना सड़क किनारे सामान रखने वाले दुकानदार होंगे या फिर लंबे समय से खड़े बड़े होर्डिंग्स और पोल भी कार्रवाई के दायरे में आएंगे?