प्रशासन को डराना लोकतंत्र पर हमला'— जीतू पटवारी के बयान पर विश्वास सारंग का बड़ा बयान, कार्रवाई की उठाई मांग

मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों को लेकर दिए गए बयान पर मंत्री विश्वास सारंग ने कड़ा पलटवार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पटवारी का बयान चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है और इससे निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। सारंग ने चुनाव आयोग से मामले का संज्ञान लेकर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हार की आशंका से प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है, जबकि दतिया में भाजपा की प्रचंड जीत तय है।

प्रशासन को डराना लोकतंत्र पर हमला'— जीतू पटवारी के बयान पर विश्वास सारंग का बड़ा बयान, कार्रवाई की उठाई मांग

जीतू पटवारी के बयान से मचा सियासी बवाल, विश्वास सारंग बोले- यह लोकतंत्र नहीं, धमकी की राजनीति है

दतिया चुनाव से पहले सियासत गरमाई: जीतू पटवारी के बयान पर विश्वास सारंग का तीखा पलटवार

भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों को लेकर दिए गए बयान पर प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पटवारी का बयान चुनाव आचार संहिता की भावना के विपरीत है और इससे निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है। सारंग ने चुनाव आयोग से इस पूरे मामले का संज्ञान लेकर कार्रवाई करने की मांग की।

मंत्री विश्वास सारंग ने मीडिया से बातचीत में कहा कि लोकतंत्र में किसी भी राजनीतिक दल या नेता को प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों को धमकाने या दबाव में लेने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि यह सीधे-सीधे चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है और इस प्रकार की राजनीति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं मानी जा सकती।

सारंग ने कहा कि कांग्रेस की राजनीति लगातार धमकी और दबाव की संस्कृति पर आधारित रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जीतू पटवारी का बयान भी उसी मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि "यह चमकाने और धमकाने की राजनीति है। यह सामंतवादी सोच का परिचायक है, जिसकी लोकतंत्र में कोई जगह नहीं है।"

उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रशासनिक अधिकारी, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और अन्य सरकारी कर्मचारी चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार निष्पक्ष तरीके से चुनाव कराने में जुटे हुए हैं। ऐसे समय में किसी भी राजनीतिक नेता द्वारा उन्हें सार्वजनिक रूप से चेतावनी देना या भविष्य में कार्रवाई की बात करना स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास माना जा सकता है।

विश्वास सारंग ने कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि वह चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाए रखे और यदि कोई नेता अधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को इस बयान का स्वतः संज्ञान लेकर उचित कदम उठाना चाहिए।

मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस को दतिया उपचुनाव में अपनी हार पहले से दिखाई दे रही है। इसी कारण कांग्रेस के नेता माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि चुनाव परिणाम आने के बाद हार का ठीकरा प्रशासन पर फोड़ा जा सके। उन्होंने कहा कि "यह कांग्रेस की हारी हुई मानसिकता का प्रमाण है।"

उन्होंने दावा किया कि दतिया में भारतीय जनता पार्टी को जनता का व्यापक समर्थन मिल रहा है और भाजपा प्रचंड बहुमत से जीत दर्ज करेगी। सारंग ने कहा कि "दतिया में कमल खिलना तय है। जनता भाजपा के विकास कार्यों और सरकार की योजनाओं पर भरोसा जता रही है।"

उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को अपनी संभावित हार का अंदाजा हो चुका है। इसलिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अभी से ऐसा वातावरण तैयार करने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे चुनाव परिणाम आने के बाद अपनी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के सामने हार का कारण बताया जा सके। सारंग ने इसे "फेस सेविंग" की कोशिश करार दिया।

विश्वास सारंग ने कहा कि लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है। चुनाव में जीत और हार जनता तय करती है, न कि प्रशासन। इसलिए किसी भी राजनीतिक दल को चुनाव अधिकारियों पर सवाल उठाने या उन्हें धमकाने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों को भयमुक्त वातावरण में कार्य करने देना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है। यदि कोई नेता उन्हें धमकाने का प्रयास करता है तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने इसे शर्मनाक बताते हुए कहा कि इस प्रकार के बयान लोकतंत्र को कमजोर करते हैं।

मंत्री ने दोहराया कि चुनाव आयोग को इस मामले में सख्त रुख अपनाना चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी नेता चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले बयान देने से बचे। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है और इसे किसी भी कीमत पर प्रभावित नहीं होने दिया जा सकता।

हालांकि, इस पूरे मामले में कांग्रेस की ओर से मंत्री विश्वास सारंग के आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी माहौल के बीच नेताओं के बीच बयानबाजी तेज हो गई है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक रूप ले सकता है। चुनाव आयोग यदि इस मामले में कोई संज्ञान लेता है तो उसके बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।