दिग्विजय सिंह को एडवोकेट शशांक शेखर त्रिपाठी का नोटिस, राम मंदिर दान की राशि लौटाने की पेशकश; रखीं ये शर्तें
कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह को उनके बयान पर वकील और बीजेपी नेता शशांक शेखर त्रिपाठी ने कानूनी नोटिस भेजा है। उन्होंने कांग्रेस पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं।
वकील शशांक शेखर त्रिपाठी ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह द्वारा अयोध्या में श्री राम मंदिर निर्माण के लिए दिए गए 1.11 लाख रुपये के दान को वापस करने का प्रस्ताव रखा है। इस संबंध में उन्होंने दिग्विजय सिंह को कानूनी नोटिस भेजने का दावा किया है। शशांक शेखर त्रिपाठी ने कहा कि उन्होंने यह कदम दिग्विजय सिंह के हालिया बयान के बाद उठाया है, जिसमें उन्होंने राम मंदिर की व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए थे।
वाराणसी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। वाराणसी के अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने दावा किया है कि उन्होंने दिग्विजय सिंह को कानूनी नोटिस भेजा है। इस नोटिस में उन्होंने दिग्विजय सिंह द्वारा राम मंदिर निर्माण के लिए दिए गए 1 लाख 11 हजार रुपये (1.11 लाख रुपये) के दान को वापस लेने की पेशकश की है।
अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी का कहना है कि उन्होंने अपनी व्यक्तिगत आय से यह राशि देने की इच्छा जताई है। हालांकि, इसके लिए उन्होंने कुछ शर्तें भी रखी हैं। उनका दावा है कि नोटिस के माध्यम से उन्होंने दिग्विजय सिंह से कहा है कि यदि उन्हें राम मंदिर व्यवस्था को लेकर आपत्ति है या वह अपने पुराने बयान पर कायम हैं, तो वह उनके द्वारा दिए गए दान की राशि वापस ले सकते हैं।
राम मंदिर व्यवस्था पर बयान के बाद भेजा नोटिस
शशांक शेखर त्रिपाठी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि दिग्विजय सिंह ने हाल ही में राम मंदिर की व्यवस्था और वहां हुई चोरी की घटना को लेकर सवाल उठाए थे। उनके अनुसार, दिग्विजय सिंह के बयान से उन्हें आपत्ति हुई और इसी कारण उन्होंने यह कदम उठाया।
उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण के समय देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं ने अपनी श्रद्धा के अनुसार योगदान दिया था। उसी क्रम में दिग्विजय सिंह ने भी 1.11 लाख रुपये का दान दिया था। उस समय यह दान भगवान श्रीराम के प्रति आस्था के रूप में देखा गया था।
अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि बाद में राम मंदिर की व्यवस्था को लेकर दिए गए बयानों से श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं। उनका कहना है कि मंदिर और भगवान राम से जुड़ी आस्था को लेकर किसी भी तरह के आरोप लगाने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए।
"राम भक्त होने के नाते राशि लौटाने को तैयार"
शशांक शेखर त्रिपाठी ने कहा कि वह भगवान राम के भक्त हैं और उन्होंने राम मंदिर आंदोलन को करीब से देखा है। उन्होंने दावा किया कि आंदोलन के दौरान उन्हें भी चोटें आई थीं और आज भी उन चोटों के निशान मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए लोगों ने अपनी क्षमता के अनुसार दान दिया था। दिग्विजय सिंह द्वारा दिया गया योगदान भी उसी भावना से जुड़ा हुआ था। लेकिन यदि अब वह मंदिर की व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं तो वह उनका दान वापस लेना चाहते हैं।
उन्होंने कहा, "मैंने अपनी व्यक्तिगत कमाई से 1 लाख 11 हजार रुपये की राशि देने की पेशकश की है। यदि दिग्विजय सिंह चाहें तो यह राशि मुझसे वापस ले सकते हैं।"
नोटिस में रखी गईं शर्तें
अधिवक्ता के अनुसार, उन्होंने नोटिस में कुछ शर्तों का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि यदि दिग्विजय सिंह राशि वापस लेते हैं तो उन्हें यह स्पष्ट करना होगा कि वह मंदिर निर्माण के लिए दिए गए अपने पुराने योगदान को वापस स्वीकार कर रहे हैं और इस संबंध में आगे कोई विवाद नहीं करेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि राशि वापस लेने के बाद दान को लेकर किसी तरह का दावा या कानूनी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जानी चाहिए।
ईमेल और डाक के जरिए भेजा नोटिस
शशांक शेखर त्रिपाठी ने बताया कि उन्होंने सुबह ईमेल के माध्यम से नोटिस भेजा। इसके बाद दोबारा भी ईमेल किया गया और अब डाक के माध्यम से भी नोटिस भेज दिया गया है।
उन्होंने कहा कि नोटिस में दिग्विजय सिंह से आग्रह किया गया है कि वह उनसे संपर्क कर राशि प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने इसे अपनी व्यक्तिगत भावना और धार्मिक आस्था से जुड़ा कदम बताया।
दान की राशि और मंदिर की संपत्ति को लेकर दिया तर्क
अधिवक्ता ने कहा कि धार्मिक संस्थाओं और देवताओं को दिया गया दान एक विशेष महत्व रखता है। उनके अनुसार, जो संपत्ति भगवान को समर्पित की जाती है, वह देवता की मानी जाती है और उसकी व्यवस्था की जिम्मेदारी संबंधित संस्थाओं और सरकार की होती है।
उन्होंने कहा कि एक श्रद्धालु होने के नाते उन्होंने अपनी जिम्मेदारी समझते हुए यह कदम उठाया है।
दिग्विजय सिंह के बयान पर बढ़ा विवाद
गौरतलब है कि दिग्विजय सिंह अपने बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं। राम मंदिर और धार्मिक मुद्दों पर उनके कई बयान पहले भी राजनीतिक बहस का विषय बने हैं।
दूसरी ओर, राम मंदिर से जुड़े मुद्दे पर श्रद्धालुओं और धार्मिक संगठनों की भावनाएं काफी संवेदनशील रही हैं। ऐसे में दिग्विजय सिंह के बयान के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है।
फिलहाल इस पूरे मामले में दिग्विजय सिंह की ओर से नोटिस पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब देखना होगा कि वह इस कानूनी नोटिस और राशि वापस करने की पेशकश पर क्या जवाब देते हैं।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस