बीजेपी पार्षदों का नगर निगम प्रशासन के खिलाफ अनोखा प्रदर्शन: अधिकारियों को भेंट की चूड़ियां, जलभराव और अधूरे कामों पर फूटा गुस्सा

रीवा नगर निगम परिषद की बैठक मंगलवार को हंगामेदार रही। सत्तारूढ़ बीजेपी के पार्षदों ने ही नगर निगम प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए नगर निगम आयुक्त और अधिकारियों को प्रतीकात्मक रूप से चूड़ियां भेंट कीं। पार्षदों ने आरोप लगाया कि वार्डों की मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है और अधिकारियों के आश्वासन केवल कागजों तक सीमित हैं।

बीजेपी पार्षदों का नगर निगम प्रशासन के खिलाफ अनोखा प्रदर्शन: अधिकारियों को भेंट की चूड़ियां, जलभराव और अधूरे कामों पर फूटा गुस्सा

सत्ता पक्ष के पार्षदों ने ही खोला मोर्चा, नगर निगम की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

आश्वासन के बाद भी समस्याएं दूर नहीं हुईं, नाराज बीजेपी पार्षदों ने जताया विरोध

बारिश में खुली व्यवस्थाओं की पोल, जलभराव और अधूरे कामों पर भड़के पार्षद

जनता की नाराजगी का हवाला देकर अधिकारियों को घेरा, जल्द समाधान की मांग

रीवा। रीवा नगर निगम परिषद की मंगलवार को हुई बैठक उस समय हंगामेदार हो गई, जब सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के पार्षदों ने ही नगर निगम प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। आमतौर पर विपक्ष द्वारा किए जाने वाले विरोध की तस्वीर इस बार सत्ता पक्ष के पार्षदों की ओर से देखने को मिली। नाराज बीजेपी पार्षदों ने नगर निगम आयुक्त और अधिकारियों को प्रतीकात्मक रूप से चूड़ियां भेंट कर अपनी नाराजगी जाहिर की और निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए।

पार्षदों का कहना था कि लंबे समय से वार्डों की मूलभूत समस्याएं बनी हुई हैं, लेकिन अधिकारियों की ओर से केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं। धरातल पर काम दिखाई नहीं दे रहा है। जनता अपनी समस्याओं को लेकर लगातार पार्षदों के पास पहुंच रही है और जवाब मांग रही है, जबकि प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही के कारण जनप्रतिनिधियों को लोगों की नाराजगी झेलनी पड़ रही है।

अधिकारियों के आश्वासन पर उठे सवाल

बैठक के दौरान बीजेपी पार्षदों ने आरोप लगाया कि नगर निगम के अधिकारी समस्याओं के समाधान को लेकर गंभीर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कई बार शिकायतें और मांगें रखी गईं, लेकिन कार्रवाई केवल बैठकों और कागजी प्रक्रियाओं तक सीमित रह गई।

पार्षदों ने बताया कि करीब 15 दिन पहले नगर निगम आयुक्त के साथ बैठक हुई थी। उस समय वार्डों की समस्याओं को जल्द दूर करने का भरोसा दिया गया था, लेकिन तय समय बीतने के बाद भी स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया।

उन्होंने कहा कि यदि समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो इसका सीधा असर जनप्रतिनिधियों की छवि पर पड़ता है। जनता अधिकारियों से नहीं बल्कि अपने क्षेत्र के पार्षदों से सवाल करती है।

सभा अध्यक्ष ने भी जताई नाराजगी

नगर निगम परिषद के सभा अध्यक्ष वेंकटेश पांडे ने भी बैठक में जनप्रतिनिधियों की परेशानियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि वार्डों में रहने वाले लोग अपनी समस्याओं के लिए पार्षदों को जिम्मेदार मानते हैं। कई बार उन्हें जनता की नाराजगी और कड़े शब्दों का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि जनता और प्रशासन के बीच की कड़ी होते हैं। यदि प्रशासनिक स्तर पर काम समय पर नहीं होंगे तो जनता का विश्वास प्रभावित होगा। उन्होंने अधिकारियों से व्यवस्था सुधारने और लंबित कार्यों को तेजी से पूरा करने की मांग की।

बारिश ने खोली व्यवस्थाओं की पोल

बैठक में हाल ही में हुई बारिश के बाद शहर में बने हालातों पर भी चर्चा हुई। बीजेपी पार्षदों ने कहा कि बारिश ने नगर निगम की तैयारियों की पोल खोल दी है। कई क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बन गई, जिससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

पार्षदों ने कहा कि नालों की सफाई और पानी निकासी की व्यवस्था को लेकर पहले से दावे किए जाते हैं, लेकिन बारिश के बाद वास्तविक स्थिति सामने आ जाती है। हल्की बारिश में ही कई मोहल्लों और घरों में पानी भर जाना नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

सिविल लाइन क्षेत्र में अधूरे निर्माण से परेशानी

बैठक में सिविल लाइन क्षेत्र में सड़क निर्माण के लिए खोदे गए रास्तों का मुद्दा भी उठाया गया। पार्षदों ने कहा कि कई स्थानों पर काम अधूरा पड़ा हुआ है। इससे लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है और दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।

उन्होंने मांग की कि निर्माण कार्यों को समय सीमा में पूरा कराया जाए और जिन क्षेत्रों में सड़कें खोदी गई हैं, वहां जल्द से जल्द मरम्मत कराई जाए ताकि आम जनता को राहत मिल सके।

सत्ता पक्ष के विरोध से प्रशासन पर बढ़ा दबाव

रीवा नगर निगम परिषद की इस बैठक में बीजेपी पार्षदों द्वारा किए गए विरोध ने नगर निगम प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। आमतौर पर विपक्ष द्वारा उठाए जाने वाले मुद्दों को इस बार सत्ता पक्ष के पार्षदों ने मजबूती से उठाया।

पार्षदों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष का विरोध करना नहीं है, बल्कि जनता की समस्याओं का समाधान कराना है। उन्होंने अधिकारियों से मांग की कि वार्ड स्तर की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान दिया जाए और लंबित कार्यों को जल्द पूरा किया जाए।

अब देखने वाली बात होगी कि इस विरोध के बाद नगर निगम प्रशासन किस तरह की कार्रवाई करता है और क्या शहर की जल निकासी, सड़क निर्माण और अन्य मूलभूत समस्याओं को लेकर कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।