BJP मंत्री प्रतिमा बागरी की बढ़ीं मुश्किलें: SC प्रमाण पत्र मामले में नोटिस जारी, छानबीन समिति ने मांगे जाति और निवासी प्रमाण, 6 जुलाई को SC आयुक्त कार्यालय में होगी जांच
राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी को राज्य स्तरीय अनुसूचित जाति छानबीन समिति ने 6 जुलाई को बुलाया है। उन्हें जाति प्रमाण पत्र से जुड़े दस्तावेज और जरूरी साक्ष्य पेश करने होंगे।
BJP मंत्री प्रतिमा बागरी को SC प्रमाण पत्र मामले में नोटिस: 6 जुलाई को होगी राज्य स्तरीय छानबीन समिति के सामने पेशी
भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार की राज्य मंत्री और सतना जिले की रैगांव विधानसभा सीट से विधायक प्रतिमा बागरी को अनुसूचित जाति (एससी) प्रमाण पत्र से जुड़े मामले में राज्य स्तरीय अनुसूचित जाति छानबीन समिति ने नोटिस जारी किया है। समिति ने उन्हें 6 जुलाई 2026 को भोपाल स्थित अनुसूचित जाति विकास आयुक्त कार्यालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। इस घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है, क्योंकि मामला सीधे मंत्री के जाति प्रमाण पत्र और उनकी पात्रता से जुड़ा हुआ है।
नोटिस के अनुसार प्रतिमा बागरी को अपने अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र से संबंधित सभी मूल दस्तावेज, प्रमाण और साक्ष्य समिति के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे। यह जांच राज्य स्तरीय अनुसूचित जाति छानबीन समिति द्वारा की जाएगी, जो यह तय करेगी कि उनके द्वारा प्रस्तुत जाति प्रमाण पत्र वैध है या नहीं।
6 जुलाई को सुबह 11 बजे होगी सुनवाई
अनुसूचित जाति विकास आयुक्त कार्यालय की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि 6 जुलाई 2026 को सुबह 11 बजे भोपाल में समिति की बैठक आयोजित होगी। इसमें प्रतिमा बागरी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपने पक्ष में सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।
समिति ने विशेष रूप से ऐसे प्रमाण मांगे हैं जिनसे यह सिद्ध हो सके कि वर्ष 1950 की स्थिति के अनुसार उनका परिवार मध्य प्रदेश के सतना जिले का मूल निवासी था तथा अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित था। यह तथ्य इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अनुसूचित जाति का दर्जा ऐतिहासिक और संवैधानिक आधार पर निर्धारित होता है और उसके लिए निर्धारित मानकों का पालन आवश्यक होता है।
शिकायतकर्ता को भी किया गया तलब
इस मामले में शिकायत करने वाले भोपाल के हुजूर तहसील स्थित गोविंद गार्डन निवासी कांग्रेस नेता प्रदीप अहिरवार को भी समिति ने नोटिस भेजा है। उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे अपनी शिकायत के समर्थन में उपलब्ध सभी दस्तावेज और साक्ष्य लेकर समिति के सामने उपस्थित हों।
इसके अलावा समिति ने सतना कलेक्टर को भी संबंधित क्षेत्र में आम सूचना जारी करने के निर्देश दिए हैं, ताकि यदि किसी व्यक्ति के पास इस मामले से जुड़े तथ्य या आपत्तियां हों तो उन्हें भी जांच प्रक्रिया में शामिल किया जा सके। इससे जांच को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
हाई कोर्ट में दायर की गई थी याचिका
इस पूरे विवाद की शुरुआत कांग्रेस नेता प्रदीप अहिरवार द्वारा दायर याचिका से हुई थी। उन्होंने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया कि प्रतिमा बागरी ने कथित रूप से गलत तरीके से अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र प्राप्त किया और उसी के आधार पर आरक्षण का लाभ लेते हुए चुनाव लड़ा।
याचिका में दावा किया गया कि इसी प्रमाण पत्र के आधार पर उन्होंने सतना जिले की रैगांव विधानसभा सीट, जो अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है, से चुनाव लड़ा और जीत हासिल करने के बाद राज्य मंत्री बनीं।
हालांकि इन आरोपों पर अभी तक किसी सक्षम प्राधिकरण द्वारा अंतिम निर्णय नहीं दिया गया है। फिलहाल मामला जांच के अधीन है और समिति दस्तावेजों के आधार पर तथ्यों का परीक्षण करेगी।
शिकायतकर्ता के क्या हैं आरोप?
शिकायतकर्ता प्रदीप अहिरवार का दावा है कि बागरी जाति संबंधित क्षेत्र में अनुसूचित जाति की सूची में शामिल नहीं है। उनका आरोप है कि मंत्री प्रतिमा बागरी वास्तव में राजपूत-ठाकुर समुदाय से संबंध रखती हैं, इसलिए उन्हें अनुसूचित जाति का लाभ नहीं मिलना चाहिए था।
उन्होंने अपने दावे के समर्थन में कई दस्तावेजों का हवाला दिया है। इनमें 1961 और 1971 की जातिगत जनगणना, वर्ष 2003 में राज्य स्तरीय जाति छानबीन समिति का निर्णय तथा 2007 में केंद्र सरकार द्वारा प्रकाशित राजपत्र शामिल हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि इन दस्तावेजों में संबंधित क्षेत्र की बागरी जाति को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल नहीं किया गया है।
इन्हीं आधारों पर उन्होंने मंत्री के जाति प्रमाण पत्र की वैधता पर सवाल उठाए हैं और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
समिति करेगी दस्तावेजों की विस्तृत जांच
राज्य स्तरीय अनुसूचित जाति छानबीन समिति अब दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों, सरकारी अभिलेखों और उपलब्ध साक्ष्यों की विस्तार से जांच करेगी। यदि आवश्यक हुआ तो समिति स्थानीय स्तर पर भी जानकारी एकत्र कर सकती है और संबंधित विभागों से रिपोर्ट मांग सकती है।
समिति की जांच का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र संवैधानिक प्रावधानों और लागू नियमों के अनुरूप जारी किया गया था या नहीं। जांच पूरी होने के बाद समिति अपनी रिपोर्ट और निर्णय संबंधित सक्षम प्राधिकारी को सौंपेगी।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा
राज्य मंत्री को जारी नोटिस के बाद प्रदेश की राजनीति में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। विपक्ष इसे गंभीर मामला बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है, जबकि मंत्री की ओर से अभी तक इस नोटिस पर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
कानूनी जानकारों का कहना है कि केवल नोटिस जारी होना किसी भी आरोप के सिद्ध होने का प्रमाण नहीं होता। जांच पूरी होने और समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप सही हैं या नहीं।
आगे क्या होगा?
अब सभी की निगाहें 6 जुलाई को होने वाली समिति की सुनवाई पर टिकी हैं। उस दिन मंत्री प्रतिमा बागरी और शिकायतकर्ता प्रदीप अहिरवार दोनों अपने-अपने दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत करेंगे। समिति इन दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद आगे की कार्रवाई तय करेगी।
फिलहाल यह मामला जांच की प्रक्रिया में है और किसी भी पक्ष के दावों पर अंतिम निर्णय आना बाकी है। समिति की जांच और उसके निष्कर्ष ही यह तय करेंगे कि मंत्री के अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र को लेकर उठाए गए सवालों में कितना तथ्य है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस