कांग्रेस में बगावत के सुर: 300 KM पैदल चलकर PCC पहुंचे कार्यकर्ता, बोले- एक व्यक्ति को तीन-चार पद देने का विरोध पड़ा भारी न्याय चाहिए

मध्य प्रदेश में कांग्रेस की जिला कांग्रेस कमेटियों की लिस्ट घोषित होने के साथ ही विरोध के स्वर उठ रहे हैं। भोपाल की जिला कांग्रेस कमेटी पर पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने सवाल खडे़ किए हैं तो वहीं रतलाम की जिला कांग्रेस कमेटी में एक-एक व्यक्ति को तीन-चार पद देने का विरोध करने पर दो कार्यकर्ताओं को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।

कांग्रेस में बगावत के सुर: 300 KM पैदल चलकर PCC पहुंचे कार्यकर्ता, बोले- एक व्यक्ति को तीन-चार पद देने का विरोध पड़ा भारी न्याय चाहिए

भोपाल में PCC कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे दोनों कार्यकर्ता, बोले- संगठन में एक व्यक्ति को कई पद देना गलत; निष्कासन वापस नहीं हुआ तो दिल्ली तक पदयात्रा कर राहुल गांधी से करेंगे मुलाकात।

भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस में जिला कार्यकारिणियों की नई सूची जारी होने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। एक ओर भोपाल जिला कांग्रेस कमेटी को लेकर वरिष्ठ नेताओं ने सवाल उठाए हैं, वहीं रतलाम से आए दो कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने संगठन की कार्यशैली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दोनों कार्यकर्ता करीब 300 किलोमीटर की पदयात्रा कर भोपाल पहुंचे और प्रदेश कांग्रेस कार्यालय (PCC) के बाहर धरने पर बैठ गए।

धरने पर बैठे कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने जिला कांग्रेस कार्यकारिणी में एक ही व्यक्ति को तीन-तीन और चार-चार पद दिए जाने का विरोध किया था। इसी कारण उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। उनका आरोप है कि यह कार्रवाई पूरी तरह अनुचित और नियमों के विरुद्ध है।

आठ दिन पैदल चलकर पहुंचे भोपाल

रतलाम निवासी संजय रावल और गौरव पोरवाल ने लगभग 300 किलोमीटर की दूरी पैदल तय की। दोनों ने आठ दिनों तक लगातार यात्रा कर भोपाल पहुंचकर अपनी मांगों को लेकर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के सामने धरना शुरू कर दिया।

दोनों कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनका उद्देश्य पार्टी नेतृत्व तक अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से पहुंचाना है। उनका दावा है कि संगठन में लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने के बावजूद उन्हें दंडित किया गया।

संजय रावल बोले- निष्कासन का अधिकार नहीं था

धरने पर बैठे संजय रावल ने कहा कि उन्हें संगठन महासचिव के आदेश पर निष्कासित किया गया, जबकि उनके अनुसार संगठन महासचिव के पास ऐसी कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी उनके धरने के दौरान कांग्रेस कार्यालय पहुंचे, लेकिन उनसे बातचीत किए बिना ही वहां से चले गए। रावल ने कहा कि यदि पार्टी नेतृत्व उनकी बात सुनता तो मामला बातचीत से सुलझ सकता था।

एक व्यक्ति को कई पद देने पर जताई थी आपत्ति

दूसरे कार्यकर्ता गौरव पोरवाल ने बताया कि हाल ही में रतलाम जिला कांग्रेस कार्यकारिणी का गठन किया गया था। इसमें कुछ नेताओं को एक साथ तीन-तीन और चार-चार पद दिए गए। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस पर सोशल मीडिया और व्यक्तिगत संदेश के माध्यम से जिला अध्यक्ष को अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी।

पोरवाल का कहना है कि उनका उद्देश्य संगठन को मजबूत बनाना था। उनका मानना है कि एक व्यक्ति को कई पद देने से अन्य कार्यकर्ताओं को अवसर नहीं मिल पाता और संगठन में असंतोष बढ़ता है।

जीतू पटवारी से मुलाकात का भी किया जिक्र

गौरव पोरवाल ने बताया कि 4 जून को नामली में उनकी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से मुलाकात हुई थी। उनके अनुसार उस समय पटवारी ने उन्हें गले लगाया और अपने साथ बैठाया था। लेकिन इसके बाद जिला कांग्रेस नेतृत्व ने इसे गलत तरीके से लिया और उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश नेतृत्व से मिलने के बाद जिला संगठन उनके खिलाफ हो गया और बिना उचित कारण कार्रवाई कर दी गई।

मांग पूरी नहीं हुई तो दिल्ली तक पदयात्रा की चेतावनी

धरने पर बैठे दोनों कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी बात नहीं सुनी जाएगी, तब तक वे भोपाल में ही डटे रहेंगे। उन्होंने कहा कि यदि प्रदेश स्तर पर समाधान नहीं निकला तो वे दिल्ली तक पदयात्रा करेंगे और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के सामने अपनी बात रखेंगे।

दोनों का कहना है कि वे पार्टी छोड़ना नहीं चाहते, बल्कि संगठन के भीतर पारदर्शिता और न्याय की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि कार्यकर्ताओं की आवाज सुनी जानी चाहिए और निष्पक्ष जांच के बाद ही किसी प्रकार की अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।

कांग्रेस में बढ़ रहा असंतोष

मध्य प्रदेश कांग्रेस में नई जिला कार्यकारिणियों के गठन के बाद कई जिलों से असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं। भोपाल में पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने भी जिला कांग्रेस कमेटी के गठन पर सवाल उठाए हैं। वहीं रतलाम का यह मामला संगठन के भीतर बढ़ती नाराजगी को उजागर करता है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि पार्टी नेतृत्व ने समय रहते असंतुष्ट कार्यकर्ताओं से संवाद नहीं किया तो इसका असर संगठन की एकजुटता और आगामी चुनावी तैयारियों पर पड़ सकता है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व इन दोनों कार्यकर्ताओं की मांगों पर क्या निर्णय लेता है और क्या उनके निष्कासन पर पुनर्विचार किया जाएगा।