ई-बस से कैबिनेट बैठक में पहुंचे मुख्यमंत्री और मंत्री: जगदीशपुर बना प्रदेश की आठवीं कैबिनेट डेस्टिनेशन, यूसीसी और मेडिकल यूनिवर्सिटी पुनर्गठन पर अहम फैसलों की तैयारी
मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने ई-बस से सफर कर कैबिनेट बैठक में हिस्सा लिया। जगदीशपुर प्रदेश की आठवीं डेस्टिनेशन कैबिनेट बैठक का गवाह बना, जहां विकास और सुशासन से जुड़े अहम फैसलों पर चर्चा हुई।
ई-बस से कैबिनेट बैठक स्थल पहुंचे मुख्यमंत्री, मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी
सरकारी वाहन छोड़ सादगी और संसाधन बचत का दिया संदेश
जनजातीय कलाकारों ने किया पारंपरिक स्वागत, प्रदर्शनी का उद्घाटन
यूसीसी ड्राफ्ट पर कैबिनेट की अहम चर्चा
भोपाल/जगदीशपुर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में जगदीशपुर में प्रदेश मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक आयोजित की जा रही है। यह बैठक केवल अपने संभावित फैसलों के कारण ही नहीं, बल्कि शासन की कार्यशैली में सादगी, मितव्ययिता और संसाधनों के बेहतर उपयोग के संदेश के कारण भी चर्चा का केंद्र बनी हुई है। मुख्यमंत्री, सभी मंत्री और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अपने-अपने सरकारी वाहन और सुरक्षा काफिले को पीछे छोड़कर तीन इलेक्ट्रिक बसों से सामूहिक रूप से बैठक स्थल पहुंचे। सरकार ने इस पहल को ईंधन की बचत, सरकारी खर्च में कमी और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रतीकात्मक लेकिन महत्वपूर्ण कदम बताया है।
इस दौरान मुख्यमंत्री का पूरा सुरक्षा काफिला, पायलट वाहन और फॉलो वाहन सीएम हाउस पर ही छोड़ दिए गए। मंत्रीगण भी अपने शासकीय वाहनों का उपयोग करने के बजाय इलेक्ट्रिक बसों में एक साथ रवाना हुए। हालांकि बैठक में मंत्री लखन पटेल उपस्थित नहीं हुए, जबकि अन्य सभी मंत्री निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पहुंचे।
केवल मंत्री ही नहीं, बल्कि प्रदेश के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों ने भी इस पहल में भागीदारी निभाई। मुख्य सचिव अनुराग जैन, विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव (ACS), प्रमुख सचिव तथा अन्य वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों ने अपने वाहन कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में खड़े किए और वहां से इलेक्ट्रिक बसों के जरिए जगदीशपुर पहुंचे। सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था प्रशासनिक सादगी और जनता के धन के विवेकपूर्ण उपयोग का संदेश देती है।
बैठक स्थल को जनजातीय संस्कृति की झलक से विशेष रूप से सजाया गया। मुख्यमंत्री और मंत्रियों के स्वागत के लिए जनजातीय कलाकारों ने पारंपरिक लोकनृत्य और लोकसंगीत की प्रस्तुतियां दीं। परिसर में जनजातीय संस्कृति और विरासत पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसका उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया। जिस सभागार में कैबिनेट बैठक आयोजित की जा रही है, वहां जनजातीय वीर नायकों के चित्र प्रदर्शित किए गए हैं, जिससे प्रदेश की समृद्ध आदिवासी परंपरा और इतिहास को सम्मान देने का संदेश दिया गया।
इस बैठक का सबसे महत्वपूर्ण पहलू समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के मसौदे पर संभावित निर्णय माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किए जा रहे ड्राफ्ट में कई महत्वपूर्ण कानूनी सुधारों का प्रस्ताव रखा गया है। इनमें सबसे प्रमुख बदलाव 'अवैध बच्चा' या 'नाजायज औलाद' जैसी पारंपरिक कानूनी अवधारणाओं को समाप्त कर सभी बच्चों को समान कानूनी अधिकार और दर्जा देने का प्रस्ताव है। यदि इस मसौदे को मंजूरी मिलती है तो पारिवारिक कानूनों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
यूसीसी के प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार विवाह संबंधी नियम भी सभी समुदायों के लिए समान बनाए जाने की तैयारी है। मसौदे में एक समय में केवल एक विवाह को ही वैध मानने का प्रावधान किया गया है। विवाह और तलाक का पंजीयन अनिवार्य होगा, हालांकि केवल पंजीयन नहीं होने के आधार पर विवाह को अमान्य नहीं माना जाएगा। साथ ही यदि विवाह के समय पति किसी अन्य महिला को गर्भवती कर चुका था तो पत्नी को अदालत में विवाह निरस्त कराने का अधिकार भी मिलेगा। वर्तमान व्यवस्था में यह अधिकार सीमित परिस्थितियों में उपलब्ध है।
तलाक संबंधी प्रावधानों में भी महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित हैं। मसौदे के अनुसार मुस्लिम तलाक, सामाजिक पंचायतों या किसी अन्य गैर-कानूनी व्यवस्था के माध्यम से विवाह समाप्त करने को कानूनी मान्यता नहीं दी जाएगी। तलाक केवल विधिक प्रक्रिया के माध्यम से ही प्रभावी माना जाएगा।
लिव-इन रिलेशनशिप को भी पहली बार स्पष्ट रूप से कानूनी ढांचे में शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है। ड्राफ्ट के अनुसार साथ रहने वाले जोड़ों को एक माह के भीतर अपने संबंध का पंजीयन कराना होगा। निर्धारित अवधि में पंजीयन नहीं कराने पर जुर्माना और जेल का प्रावधान किया गया है। वहीं यदि पंजीकृत लिव-इन संबंध समाप्त होता है तो महिला साथी को पत्नी के समान भरण-पोषण मांगने का अधिकार मिलेगा। साथ ही पहले से विवाहित व्यक्ति या पहले से किसी पंजीकृत लिव-इन संबंध में रहने वाला व्यक्ति दूसरा पंजीयन नहीं करा सकेगा।
हालांकि प्रस्तावित यूसीसी में अनुसूचित जनजातियों (एसटी) को उनके पारंपरिक रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कानून के दायरे से बाहर रखने का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का मानना है कि जनजातीय समुदायों की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं का संरक्षण आवश्यक है। यदि कैबिनेट इस मसौदे को मंजूरी देती है तो इसे विधेयक के रूप में विधानसभा में पेश किया जाएगा।
कैबिनेट बैठक का दूसरा बड़ा एजेंडा प्रदेश की मेडिकल शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा है। सरकार प्रदेश की एकमात्र मेडिकल यूनिवर्सिटी का पुनर्गठन करने की तैयारी में है। प्रस्ताव के अनुसार मेडिकल यूनिवर्सिटी को दो हिस्सों में विभाजित किया जाएगा। नई व्यवस्था लागू होने पर महाकौशल और विंध्य क्षेत्र के मेडिकल कॉलेज जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी के अधीन होंगे, जबकि भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन सहित मध्य और पश्चिम मध्यप्रदेश के मेडिकल कॉलेज उज्जैन मेडिकल यूनिवर्सिटी से संबद्ध किए जाएंगे। सरकार का तर्क है कि इससे प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी, विश्वविद्यालयों पर कार्यभार कम होगा और मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा।
जगदीशपुर में आयोजित यह कैबिनेट बैठक प्रदेश की आठवीं डेस्टिनेशन कैबिनेट बैठक मानी जा रही है। सरकार का उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर बैठक आयोजित करना, स्थानीय संस्कृति और विकास को बढ़ावा देना तथा प्रशासन को जनता के और करीब लाना है। ई-बस से सामूहिक यात्रा, जनजातीय संस्कृति का सम्मान और बड़े नीतिगत निर्णयों की तैयारी ने इस बैठक को विशेष महत्व प्रदान किया है। अब प्रदेश की नजर कैबिनेट के अंतिम निर्णयों पर टिकी है, जिनका असर शासन, कानून, चिकित्सा शिक्षा और सामाजिक व्यवस्था पर व्यापक रूप से पड़ सकता है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस