मौरंग की बेतहाशा महंगी निविदाओं ने खड़े किए सवाल: बाजार में बिक्री कैसे होगी? चोरी और अवैध खनन को बढ़ावा मिलने की आशंका

जालौन में छह निजी मौरंग खंडों की छह माह के लिए हुई निविदाओं में दरें बेहद ऊंची पहुंच गई हैं। पथरेठा की बोली करीब 4 हजार, सिमरिया के पहले खंड की 5,109 और दूसरे खंड की 7 हजार रुपये प्रति घन मीटर से अधिक रही। ऊंची दरों से सरकारी राजस्व और किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है, लेकिन बाजार में महंगी मौरंग की बिक्री को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं

मौरंग की बेतहाशा महंगी निविदाओं ने खड़े किए सवाल: बाजार में बिक्री कैसे होगी? चोरी और अवैध खनन को बढ़ावा मिलने की आशंका

छह निजी मौरंग खंडों की नीलामी, चार की निविदाएं खुलीं

पथरेठा की बोली 4 हजार, सिमरिया में 5,109 रुपये प्रति घन मीटर

मंगलवार को परासन और सिमरिया की दरों ने बनाया नया रिकॉर्ड

सिमरिया के दूसरे खंड की बोली 7 हजार रुपये से ज्यादा पहुंची

उरई। जनपद जालौन में निजी मौरंग खंडों की नीलामी प्रक्रिया इस बार चर्चा का विषय बन गई है। छह निजी खंडों के लिए छह माह की अवधि को लेकर निविदाएं आमंत्रित की गई थीं। अब तक चार खंडों की निविदाएं खोली जा चुकी हैं और सामने आई दरों ने स्थानीय ठेकेदारों से लेकर मौरंग कारोबार से जुड़े लोगों तक को हैरान कर दिया है। सोमवार को पथरेठा और सिमरिया के खंडों की निविदाएं खोली गईं, जबकि मंगलवार को परासन और सिमरिया के दूसरे निजी खंड की निविदा प्रक्रिया पूरी हुई।

निविदाओं में जिस तरह लगातार ऊंची दरें सामने आई हैं, उससे सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि इतनी महंगी दर पर निकाली गई मौरंग की बाजार में बिक्री किस कीमत पर और कैसे संभव होगी? कारोबारियों का कहना है कि यदि बाजार में मांग और बिक्री की सामान्य दरों को ध्यान में रखा जाए तो निजी खंड से निकलने वाली मौरंग और सरकारी खंड की मौरंग की लागत में बड़ा अंतर दिखाई देता है।

सोमवार को खुलीं पथरेठा और सिमरिया की निविदाएं

सोमवार को पथरेठा और सिमरिया के निजी मौरंग खंडों की निविदाएं खोली गईं। पथरेठा खंड की निविदा करीब 4 हजार रुपये प्रति घन मीटर की दर पर पहुंची, जबकि सिमरिया के पहले निजी खंड की बोली 5,109 रुपये प्रति घन मीटर तक पहुंच गई।

इन दरों के सामने आने के बाद से ही मौरंग कारोबार से जुड़े लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई। कारोबारियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह रहा कि जब मौरंग की बाजार कीमत और ग्राहकों की खरीद क्षमता सीमित है, तब इतनी ऊंची दर पर खंड लेने के बाद ठेकेदार अपने कारोबार को किस तरह संचालित करेंगे।

मंगलवार को सोमवार की दरों को भी पीछे छोड़ गईं बोलियां

मंगलवार को दो और निजी खंडों की निविदा प्रक्रिया हुई। इन निविदाओं में सामने आई दरों ने सोमवार को हुई बोली को भी पीछे छोड़ दिया। परासन खंड की निविदा 5 हजार रुपये प्रति घन मीटर से अधिक की दर पर खुली, जबकि सिमरिया के दूसरे निजी खंड की बोली 7 हजार रुपये प्रति घन मीटर से अधिक तक पहुंच गई।

लगातार बढ़ती निविदा दरों ने स्थानीय मौरंग कारोबारियों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। कारोबारियों के बीच चर्चा है कि यदि खंड की लागत इतनी अधिक होगी तो परिवहन, रॉयल्टी, मजदूरी, मशीनरी, प्रशासनिक खर्च और अन्य लागत जोड़ने के बाद मौरंग की अंतिम कीमत कितनी पहुंचेगी।

यही वजह है कि अब इस पूरी निविदा प्रक्रिया और भविष्य में मौरंग की बिक्री को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

सरकारी खजाने को बड़ा फायदा, लेकिन बाजार में चुनौती

निविदाओं की ऊंची दरों का एक सकारात्मक पक्ष यह है कि इससे सरकारी राजस्व में बड़ी वृद्धि होने की संभावना है। जिस दर पर निजी खंडों की निविदाएं स्वीकृत होंगी, उसी के आधार पर सरकार को राजस्व प्राप्त होगा। इस लिहाज से देखा जाए तो ऊंची बोली सरकारी खजाने के लिए फायदेमंद दिखाई देती है।

इसके साथ ही स्थानीय किसानों को भी इसका आर्थिक लाभ मिलने की बात सामने आ रही है। खंड की स्वीकृत दर का 20 प्रतिशत हिस्सा किसानों के खातों में जाने की व्यवस्था बताई जा रही है। ऐसे में ऊंची दर पर निविदा स्वीकृत होने से संबंधित किसानों को भी पहले की तुलना में अधिक आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।

लेकिन दूसरी ओर कारोबारियों के सामने बाजार का गणित सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़ा है। सरकारी राजस्व बढ़ने और किसानों को अधिक धन मिलने के बावजूद यदि बाजार में मौरंग की बिक्री निर्धारित लागत के अनुरूप नहीं हो पाती है तो ठेकेदारों के सामने आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।

एकमुश्त भुगतान भी ठेकेदारों के लिए बड़ी चुनौती

निविदा प्रक्रिया में स्वीकृत मात्रा के अनुसार निर्धारित राशि ठेकेदार को एक ही किश्त में जमा करनी होती है। इसका अर्थ है कि खंड लेने वाले ठेकेदार को शुरुआत में ही बड़ी रकम का इंतजाम करना पड़ेगा।

इसके बाद खनन, मजदूरी, मशीनरी, परिवहन और अन्य खर्च अलग से होंगे। यदि बाजार में मौरंग अपेक्षित कीमत पर नहीं बिकती है तो लागत और बिक्री मूल्य के बीच अंतर बढ़ सकता है।

यही स्थिति मौरंग कारोबार के भविष्य को लेकर चिंता पैदा कर रही है। कारोबार से जुड़े लोगों का सवाल है कि क्या बाजार इतनी महंगी मौरंग को स्वीकार करेगा?

सबसे बड़ा सवाल: महंगी मौरंग की भरपाई कैसे होगी?

मौरंग कारोबार में सामान्य तौर पर लागत और बिक्री मूल्य के बीच संतुलन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि खंड की कीमत बाजार की वास्तविक बिक्री क्षमता से बहुत अधिक हो जाए तो ठेकेदार को नुकसान की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।

ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि इतनी ऊंची निविदा लगाने वाले ठेकेदार अपने निवेश की भरपाई किस तरह करेंगे। यदि बाजार में मौरंग महंगी कीमत पर बिकती है तो इसका सीधा असर निर्माण कार्यों की लागत पर भी पड़ सकता है। वहीं यदि ग्राहक महंगी मौरंग खरीदने को तैयार नहीं होते हैं तो कारोबारियों के सामने दूसरा संकट खड़ा हो सकता है।

अवैध खनन और चोरी पर निगरानी जरूरी

इसी बिंदु को लेकर अब प्रशासन और खनिज विभाग के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी प्रभावी निगरानी की बनती है। ऊंची लागत वाले निजी खंडों में यदि वैध खनन से होने वाली आमदनी और वास्तविक खर्च के बीच संतुलन नहीं बनता है तो अवैध तरीके अपनाए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

मौरंग कारोबार में चोरी और अवैध खनन के कई तरीके अपनाए जाने की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। ऐसे में ऊंची निविदा दरों के बाद खनन क्षेत्र में निगरानी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

हालांकि यह कहना जल्दबाजी होगी कि ऊंची दर पर निविदा लेने वाले ठेकेदार अवैध गतिविधियों का सहारा लेंगे, लेकिन कारोबारियों और स्थानीय लोगों की आशंकाओं को देखते हुए प्रशासन को पहले से ही सख्त निगरानी व्यवस्था करनी होगी।

ठेकेदारों की क्षमता पर भी रहेगी नजर

मौरंग के निजी खंडों की ऊंची निविदाओं के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित ठेकेदार बाजार की परिस्थितियों के बीच किस तरह कारोबार संचालित करते हैं। जिन दरों पर खंड स्वीकृत हुए हैं, उनके मुकाबले बाजार में बिक्री मूल्य का अंतर यदि बहुत अधिक रहा तो ठेकेदारों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है।

ऐसे में प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती होगी—एक तरफ राजस्व की सुरक्षा और दूसरी तरफ अवैध खनन, ओवरलोडिंग, निर्धारित सीमा से अधिक खनन तथा बिना वैध दस्तावेज मौरंग परिवहन जैसी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण।

निविदाओं ने बढ़ाई मौरंग कारोबार की चिंता

पथरेठा, सिमरिया और परासन के खंडों की ऊंची निविदा दरों ने फिलहाल मौरंग कारोबार में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर सरकारी खजाने और किसानों को अधिक राजस्व मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर बाजार में मौरंग की बिक्री और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि इन ऊंची दरों पर स्वीकृत निजी खंडों से निकलने वाली मौरंग बाजार में किस कीमत पर पहुंचती है और ठेकेदार अपनी लागत का संतुलन किस तरह बनाते हैं।

सबसे अहम बात यह होगी कि ऊंची निविदा दरें सरकारी राजस्व और किसानों के लिए लाभ का माध्यम बनें, लेकिन इसकी आड़ में अवैध खनन, मौरंग चोरी या नियमों के उल्लंघन की कोई गुंजाइश न बने। इसके लिए खनिज विभाग और प्रशासन की सतत निगरानी बेहद जरूरी होगी।