छिंदवाड़ा में विकास के दावों की खुली पोल: गर्भवती महिला को 8 किमी डोली में ढोकर अस्पताल पहुंचाया, गर्भ में बच्चे की मौत; गांव तक नहीं पहुंच सकी 108 एंबुलेंस

छिंदवाड़ा के चीटीपाठा गांव में सड़क न होने से प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला को 8 किमी डोली में ढोकर अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में महिला ने मृत बच्चे को जन्म दिया; ग्रामीण 10 साल से सड़क की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक सुनवाई नहीं हुई।

छिंदवाड़ा में विकास के दावों की खुली पोल: गर्भवती महिला को 8 किमी डोली में ढोकर अस्पताल पहुंचाया, गर्भ में बच्चे की मौत; गांव तक नहीं पहुंच सकी 108 एंबुलेंस

छिंदवाड़ा के जुन्नारदेव ब्लॉक के चीटीपाठा जामुनडोंग टोले में सड़क सुविधा के अभाव ने एक गर्भवती महिला के परिवार की मुश्किलें बढ़ा दीं। प्रसव पीड़ा शुरू होने पर गांव तक 108 एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी। ऐसे में परिजनों और ग्रामीणों ने महिला को डोली में बैठाकर करीब 8 किलोमीटर तक पथरीले और दुर्गम रास्ते से पैदल पहुंचाया।

छिंदवाड़ा। जिले के दमुआ विधानसभा क्षेत्र से ग्रामीण स्वास्थ्य और सड़क व्यवस्था की बदहाल स्थिति सामने आई है। जुन्नारदेव विकासखंड की ग्राम पंचायत गोप के मजरे टोला चीटीपाठा (जामुनडोंगा) में सड़क सुविधा नहीं होने के कारण प्रसव पीड़ा से कराह रही 22 वर्षीय गर्भवती महिला को परिजन करीब 8 किलोमीटर तक डोली में लेकर अस्पताल पहुंचे। इस दौरान महिला की हालत लगातार बिगड़ती गई। जिला अस्पताल छिंदवाड़ा में उसने मृत बच्चे को जन्म दिया। महिला की हालत गंभीर बताई जा रही है और उसे आईसीयू में भर्ती किया गया है।

प्रसव पीड़ा के बाद शुरू हुआ डोली का सफर

चीटीपाठा निवासी सोनू मलगाम की पत्नी कुस्तरिया को बुधवार रात अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिवार ने महिला को अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन गांव तक पक्की सड़क नहीं होने के कारण 108 एंबुलेंस वहां तक नहीं पहुंच सकी। गुरुवार सुबह करीब 6 बजे परिजनों और ग्राम सरपंच सियाबती कंचनशाह नर्रे की मदद से महिला को डोली में बैठाकर अस्पताल के लिए रवाना किया गया।

ग्रामीणों के मुताबिक, पथरीले और उबड़-खाबड़ रास्ते से महिला को करीब 8 किलोमीटर तक डोली में ले जाया गया। इस दौरान प्रसव पीड़ा के कारण उसकी स्थिति बेहद नाजुक होती गई। काफी मशक्कत के बाद उसे गोप पंचायत मुख्यालय तक पहुंचाया गया। वहां से 108 एंबुलेंस की मदद से महिला को दमुआ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।

दमुआ से जिला अस्पताल किया रेफर

दमुआ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने तक महिला की हालत गंभीर हो चुकी थी। चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसकी स्थिति को देखते हुए तत्काल जिला अस्पताल छिंदवाड़ा रेफर कर दिया। जिला अस्पताल पहुंचने के बाद महिला ने मृत बच्चे को जन्म दिया। फिलहाल महिला की हालत गंभीर बताई जा रही है और उसे आईसीयू में रखा गया है।

ग्रामीणों ने व्यवस्था पर उठाए सवाल

इस घटना के बाद ग्रामीणों ने गांव में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रसव के दौरान महिलाओं को डोली के सहारे अस्पताल पहुंचाने की समस्या यहां लंबे समय से बनी हुई है। उनका दावा है कि इससे पहले भी दिनबती नर्रे और रेखा मलगाम को इसी तरह डोली के जरिए अस्पताल पहुंचाना पड़ा था।

ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि समय पर इलाज और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलने के कारण कविता मलगाम, गौरा वरकडे और मनवती नर्रे की पहले मौत हो चुकी है। हालांकि, इन पुराने मामलों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

सड़क नहीं तो कैसे पहुंचेगी एंबुलेंस?

चीटीपाठा की घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक पहुंच को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार और प्रशासन की ओर से ग्रामीण इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्थिति यह है कि कई गांवों तक एंबुलेंस पहुंचने के लिए सड़क ही उपलब्ध नहीं है।

गर्भवती महिला को प्रसव के दौरान आठ किलोमीटर तक डोली में ले जाना बताता है कि आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा केवल एंबुलेंस उपलब्ध कराने से पूरी नहीं होती। एंबुलेंस को मरीज के घर तक पहुंचाने के लिए सड़क और सुगम संपर्क मार्ग भी जरूरी है।

विकास के दावों के बीच बड़ा सवाल

इस घटना ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने ग्रामीण सड़क और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। प्रसव जैसी आपात स्थिति में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में यदि मरीज को अस्पताल पहुंचने से पहले ही कई किलोमीटर पैदल या डोली के सहारे ले जाना पड़े, तो स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

ग्रामीणों की मांग है कि चीटीपाठा और आसपास के दुर्गम गांवों तक सड़क सुविधा उपलब्ध कराई जाए, ताकि भविष्य में किसी गर्भवती महिला या गंभीर मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए डोली का सहारा न लेना पड़े। साथ ही प्रशासन को घटना की जांच कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं वास्तविक रूप से गांवों तक पहुंच सकें।

एक गर्भवती महिला का आठ किलोमीटर डोली में सफर और उसके बाद मृत बच्चे का जन्म ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की उस चुनौती को सामने लाता है, जहां सड़क और चिकित्सा सुविधाओं की कमी अब भी लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रही है।