राम मंदिर चंदे पर दिग्विजय सिंह का बड़ा हमला: बोले- धर्म बेचकर कमाई करते हैं, उसी पैसे से विधायक खरीदते हैं,बोले- हिसाब दो, नहीं तो अदालत में होगा फैसला
अयोध्या के श्री रामजन्मभूमि मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर महिला कांग्रेस ने शुक्रवार को माता मंदिर चौराहे पर सामूहिक उपवास और सद्बुद्धि यज्ञ किया। इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि इस मामले में अयोध्या के कोर्ट में मुकदमा दायर करेंगे।
राम मंदिर चंदा विवाद: दिग्विजय सिंह का भाजपा, RSS और ट्रस्ट पर बड़ा हमला, बोले- 'धर्म को बेचकर कमाई करते हैं'
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में महिला कांग्रेस के धरना-प्रदर्शन के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री ने भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और राम मंदिर निर्माण से जुड़े ट्रस्ट पर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि भगवान राम के नाम पर देशभर के श्रद्धालुओं से एकत्र किए गए चंदे में अनियमितताएं हुई हैं और इसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने यह भी घोषणा की कि वे 5 या 6 जुलाई को अपने वकील के माध्यम से अयोध्या जाकर इस संबंध में कानूनी कार्रवाई करेंगे।
भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप
दिग्विजय सिंह ने कहा कि भाजपा धर्म के नाम पर राजनीति करती है और धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि धर्म के नाम पर जुटाए गए धन का उपयोग चुनावी राजनीति और जनप्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त में किया जाता है।
उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं को भगवान राम के प्रति प्रेम उस समय दिखाई दिया, जब लोकसभा में पार्टी के केवल दो सांसद रह गए थे। उनके अनुसार, इसके बाद राम मंदिर आंदोलन को राजनीतिक रूप से आगे बढ़ाया गया और इसे चुनावी मुद्दा बनाया गया।
राम मंदिर आंदोलन को लेकर दिया बयान
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन की मूल लड़ाई हनुमानगढ़ी और गोरखनाथ मठ से जुड़े संतों ने लड़ी थी। उनका दावा था कि उस समय न तो RSS की कोई सक्रिय भूमिका थी और न ही भाजपा का कोई योगदान था। उन्होंने कहा कि बाद के वर्षों में इस आंदोलन को राजनीतिक स्वरूप दिया गया।
चंदे में कथित गड़बड़ी का आरोप
दिग्विजय सिंह ने कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर के लोगों ने अपनी श्रद्धा और विश्वास के साथ चंदा दिया था, लेकिन उस राशि के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चंदे में कथित गड़बड़ी हुई है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने आती है, तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
चंपत राय और अनिल मिश्रा का लिया नाम
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि इस मामले में राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों, जिनमें चंपत राय और अनिल मिश्रा का नाम भी शामिल है, को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
अयोध्या जाकर दर्ज कराएंगे मामला
दिग्विजय सिंह ने घोषणा की कि वह 5 या 6 जुलाई को अपने अधिवक्ता के साथ अयोध्या जाएंगे और राम मंदिर चंदे में कथित अनियमितताओं को लेकर कानूनी प्रक्रिया शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि कानून के माध्यम से पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और संबंधित दस्तावेज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे।
चंदे का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की मांग
उन्होंने कहा कि भगवान राम के नाम पर करोड़ों श्रद्धालुओं ने अपनी आस्था के साथ आर्थिक सहयोग दिया था, इसलिए ट्रस्ट की जिम्मेदारी है कि वह चंदे का पूरा लेखा-जोखा सार्वजनिक करे। उनके अनुसार, धार्मिक संस्थाओं को पारदर्शिता बनाए रखनी चाहिए ताकि लोगों का विश्वास कायम रहे।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि अदालत में वित्तीय अनियमितता साबित होती है, तो वे अपना दिया हुआ चंदा वापस लेकर किसी मान्यता प्राप्त धार्मिक पीठ या शंकराचार्य के न्यास को दान करेंगे।
खुद को बताया सनातन धर्म का अनुयायी
अपने ऊपर लगने वाले राजनीतिक आरोपों का जवाब देते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि वे सनातन धर्म का पालन करने वाले व्यक्ति हैं। उन्होंने बताया कि वे नियमित रूप से धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं, एकादशी का व्रत रखते हैं और नर्मदा परिक्रमा भी कर चुके हैं।
उन्होंने कहा कि उनकी धार्मिक आस्था पर राजनीतिक कारणों से सवाल उठाए जाते रहे हैं, जबकि उनका जीवन भारतीय धार्मिक परंपराओं और संस्कारों से जुड़ा रहा है।
RSS और VHP की कार्यप्रणाली पर भी उठाए सवाल
दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) की आर्थिक पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि धार्मिक चंदे और गुरुदक्षिणा के रूप में प्राप्त धन के उपयोग का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश की धार्मिक संस्थाओं को वित्तीय मामलों में पारदर्शिता रखनी चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे और किसी प्रकार के विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।
महाकाल मंदिर की जमीन का भी किया जिक्र
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने महाकालेश्वर मंदिर की जमीन से जुड़े पुराने मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके मुख्यमंत्री रहते जिस जमीन को लेकर निर्णय लिया गया था, उसका वर्तमान में उचित उपयोग नहीं हो रहा है। उन्होंने इस मामले की भी समीक्षा कराने की आवश्यकता बताई।
राजनीतिक माहौल हुआ गर्म
दिग्विजय सिंह के इन बयानों के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर राम मंदिर और धार्मिक चंदे का मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। कांग्रेस और भाजपा के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है।
हालांकि, दिग्विजय सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित ट्रस्ट या भाजपा की ओर से इस विषय पर आधिकारिक प्रतिक्रिया आना अभी बाकी है। ऐसे में आगामी दिनों में यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस