किसान संवाद कार्यक्रम में बदइंतजामी: बिजली गुल, वीडियो बंद, खाने के पैकेटों के लिए धक्का-मुक्की

ग्वालियर में राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में सोमवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के किसान संवाद कार्यक्रम में अव्यवस्था हावी रही। मुख्यमंत्री के पहुंचने से पहले सभागार की बिजली गुल हो गई, जिससे किसान मोबाइल की फ्लैशलाइट के सहारे अंधेरे में बैठे रहे।

किसान संवाद कार्यक्रम में बदइंतजामी: बिजली गुल, वीडियो बंद, खाने के पैकेटों के लिए धक्का-मुक्की

मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में बिगड़ी व्यवस्था: अंधेरे में बैठे किसान, माइक फेल, भोजन पर धक्का-मुक्की

ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में आयोजित मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के किसान संवाद कार्यक्रम के दौरान व्यवस्थाओं की पोल खुलती नजर आई। किसानों के लिए आयोजित इस बड़े सरकारी कार्यक्रम में बिजली गुल होने, माइक बंद पड़ने, वीडियो प्रस्तुति तकनीकी कारणों से नहीं चल पाने और कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भोजन वितरण के दौरान धक्का-मुक्की जैसी घटनाओं ने आयोजन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए थे। मुख्यमंत्री के आगमन से पहले ही सभागार में अचानक बिजली चली गई, जिससे पूरा हॉल अंधेरे में डूब गया। बिजली जाने के बाद किसान काफी देर तक मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट जलाकर बैठे रहे। अधिकारियों ने स्थिति संभालने की कोशिश की और बताया कि मुख्य बिजली आपूर्ति बाधित होने के बाद व्यवस्था को जनरेटर पर शिफ्ट किया जा रहा है। हालांकि इस प्रक्रिया में काफी समय लग गया, जिससे कार्यक्रम की शुरुआत भी प्रभावित हुई।

बिजली बहाल होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंच पर पहुंचे और कार्यक्रम शुरू हुआ। लेकिन कुछ ही देर बाद मंच पर लगे साउंड सिस्टम ने भी जवाब दे दिया। मुख्यमंत्री के संबोधन के दौरान पहले मंच पर लगे माइक बंद हो गए और बाद में उनके हाथ में दिया गया वायरलेस माइक भी काम नहीं कर सका। तकनीकी कर्मचारियों ने कई बार माइक बदलने और सिस्टम ठीक करने का प्रयास किया, लेकिन समस्या तुरंत दूर नहीं हो सकी। इस दौरान मंच संचालक को मुख्यमंत्री और उपस्थित किसानों के सामने यह घोषणा करनी पड़ी कि "विद्युत अवरोध" के कारण तकनीकी दिक्कत आ रही है।

कार्यक्रम के दौरान किसानों के लिए तैयार किए गए विभिन्न योजनाओं और आधुनिक कृषि तकनीकों से जुड़े वीडियो भी दिखाए जाने थे। अधिकारियों द्वारा पहले कई बार इनकी टेस्टिंग की गई थी, लेकिन मुख्यमंत्री की मौजूदगी में वीडियो प्रस्तुति सही तरीके से नहीं चल सकी। कई बार वीडियो शुरू होने के बाद बीच में ही रुक गया, जिसके चलते अंततः उसे बंद करना पड़ा। अधिकारियों ने इस तकनीकी गड़बड़ी के पीछे नेटवर्क और सिस्टम संबंधी समस्या को कारण बताया।

इन घटनाओं के कारण कार्यक्रम में मौजूद किसानों और अन्य लोगों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ा। कई किसानों ने कहा कि इतने बड़े सरकारी आयोजन में इस तरह की अव्यवस्था नहीं होनी चाहिए थी। उनका कहना था कि यदि पहले से बेहतर तैयारी की जाती तो बिजली, ध्वनि व्यवस्था और तकनीकी उपकरणों में ऐसी परेशानी नहीं आती।

कार्यक्रम समाप्त होने के बाद एक और अव्यवस्था सामने आई। मुख्यमंत्री का काफिला रवाना होते ही भोजन के पैकेट लेने के लिए बड़ी संख्या में किसान एक साथ वितरण स्थल पर पहुंच गए। पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण वहां धक्का-मुक्की और छीना-झपटी जैसी स्थिति बन गई। कई लोग जल्द से जल्द भोजन का पैकेट लेने की कोशिश करते दिखाई दिए। कुछ किसानों को काफी देर तक इंतजार करना पड़ा, जबकि कई किसान परिसर के बाहर बैठकर भोजन करते नजर आए। इस दृश्य ने आयोजन की व्यवस्थाओं पर और सवाल खड़े कर दिए।

हालांकि इन अव्यवस्थाओं के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों को संबोधित करते हुए कृषि क्षेत्र में राज्य सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने किसानों से उन्नत खेती, जैविक खेती और प्राकृतिक खेती को अपनाने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार "किसान कल्याण वर्ष" के तहत किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए लगातार नई योजनाएं लागू कर रही है। उन्होंने किसानों से कृषि में नई तकनीकों के उपयोग और फसल विविधीकरण पर भी जोर दिया।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश सरकार कृषि के साथ-साथ दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए भी विशेष प्रयास कर रही है। उनका कहना था कि खेती के साथ पशुपालन को जोड़कर किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत की जा सकती है। सरकार इसी दिशा में योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कृषि विश्वविद्यालय परिसर में समन्वित कृषि प्रणाली (इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम) इकाई का उद्घाटन भी किया। इसके अलावा लगभग 49 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली हाईटेक नर्सरी एवं फ्लोरीकल्चर गार्डन परियोजना की आधारशिला रखी। इस परियोजना का उद्देश्य आधुनिक तकनीक के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण पौध तैयार करना, बागवानी और पुष्प उत्पादन को बढ़ावा देना तथा किसानों को नई संभावनाओं से जोड़ना है।

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) के तहत चयनित हितग्राहियों को लाभ भी वितरित किए गए। इसके साथ ही बहुस्तरीय कृषि पद्धति इकाई का लोकार्पण किया गया, जिससे किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण और जानकारी मिल सके।

कार्यक्रम में कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना, सामाजिक न्याय मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, सांसद भारत सिंह कुशवाह सहित कई जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में किसान संभाग के विभिन्न जिलों से कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे।

हालांकि मुख्यमंत्री ने किसानों के हित में सरकार की योजनाओं और कृषि विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी, लेकिन कार्यक्रम के दौरान सामने आई तकनीकी खामियों और व्यवस्थागत कमियों ने आयोजन की चमक फीकी कर दी। बिजली गुल होने से लेकर माइक फेल होने, वीडियो प्रस्तुति बाधित रहने और भोजन वितरण के दौरान अव्यवस्था जैसी घटनाओं ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया कि इतने महत्वपूर्ण सरकारी कार्यक्रमों में व्यवस्थाओं को और अधिक प्रभावी एवं सुव्यवस्थित बनाने की आवश्यकता है।