मानसून सत्र से पहले MP सरकार का बड़ा फैसला: 213 सरकारी शिक्षकों का अटैचमेंट खत्म, मूल स्कूलों में लौटने के आदेश

मध्य प्रदेश सरकार ने विधानसभा के मानसून सत्र से पहले बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए 16 जिलों के 213 सरकारी शिक्षकों का अटैचमेंट (संलग्नीकरण) समाप्त कर दिया है। लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी संबंधित जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को निर्देश दिए हैं कि वर्षों से विभिन्न सरकारी कार्यालयों में अटैच शिक्षकों को तत्काल कार्यमुक्त कर उनके मूल विद्यालयों में भेजा जाए

मानसून सत्र से पहले MP सरकार का बड़ा फैसला: 213 सरकारी शिक्षकों का अटैचमेंट खत्म, मूल स्कूलों में लौटने के आदेश

16 जिलों के शिक्षकों को तत्काल स्कूलों में भेजने के निर्देश, विधायक के सवाल के बाद हुई कार्रवाई; वर्षों से कार्यालयों में निभा रहे थे जिम्मेदारी 

भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के आगामी मानसून सत्र से पहले राज्य सरकार ने स्कूल शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने प्रदेश के 16 जिलों में विभिन्न सरकारी कार्यालयों में वर्षों से अटैच होकर काम कर रहे 213 सरकारी शिक्षकों का संलग्नीकरण (अटैचमेंट) समाप्त कर दिया है। संचालनालय ने सभी संबंधित जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि इन शिक्षकों को तत्काल कार्यमुक्त कर उनके मूल पदस्थापना वाले विद्यालयों में वापस भेजा जाए, ताकि स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो सके।

यह कार्रवाई पिछले वर्ष विधानसभा में उठे एक सवाल के बाद शुरू हुई समीक्षा प्रक्रिया के आधार पर की गई है। सरकार का मानना है कि सरकारी शिक्षक का पहला दायित्व विद्यार्थियों को शिक्षा देना है। ऐसे में बड़ी संख्या में शिक्षकों का स्कूलों से बाहर अन्य कार्यालयों में कार्यरत रहना शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित करता है।

विधायक के सवाल के बाद शुरू हुई समीक्षा

दरअसल, पिछले वर्ष 30 जुलाई को आयोजित विधानसभा सत्र के दौरान सिरोंज से बीजेपी विधायक उमाकांत शर्मा ने तारांकित प्रश्न क्रमांक-1108 के माध्यम से स्कूलों से बाहर अटैच शिक्षकों का मुद्दा उठाया था। उन्होंने सरकार से पूछा था कि प्रदेश में कितने शिक्षक अपने मूल विद्यालयों में पढ़ाने के बजाय विभिन्न सरकारी कार्यालयों में संलग्न हैं और इससे स्कूलों की पढ़ाई पर क्या असर पड़ रहा है।

विधानसभा में सवाल उठने के बाद लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी जिलों से विस्तृत जानकारी तलब की। जिला स्तर पर हुई समीक्षा में यह सामने आया कि कई शिक्षक लंबे समय से प्रशासनिक कार्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जबकि उनके विद्यालयों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है।

16 जिलों के 213 शिक्षक मिले अटैच

समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार उज्जैन, देवास, नीमच, शहडोल, दतिया, ग्वालियर, भिंड, श्योपुर, गुना, रीवा, सीधी, कटनी, सिंगरौली, सतना, राजगढ़ और मंडला सहित 16 जिलों में कुल 213 सरकारी शिक्षक विभिन्न कार्यालयों में अटैच पाए गए।

इन शिक्षकों को अब तत्काल प्रभाव से उनके मूल विद्यालयों में वापस भेजने के निर्देश जारी किए गए हैं। विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों से आदेश का पालन सुनिश्चित करने और इसकी रिपोर्ट भी संचालनालय को भेजने के लिए कहा है।

विधायक कार्यालयों से लेकर कलेक्टर कार्यालय तक थे तैनात

शिक्षा विभाग की सूची के अनुसार कई शिक्षक जनप्रतिनिधियों के कार्यालयों में निजी सहायक (पीए) के रूप में कार्य कर रहे थे। इसके अलावा बड़ी संख्या में शिक्षक कलेक्टर कार्यालय, जिला पंचायत, निर्वाचन कार्यालय, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, जनपद पंचायत, एसडीएम कार्यालय तथा अन्य प्रशासनिक कार्यालयों में वर्षों से अटैच थे।

इन शिक्षकों से प्रशासनिक और कार्यालयीन कार्य लिए जा रहे थे, जबकि उनके मूल विद्यालयों में विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। यही कारण है कि सरकार ने अब इस व्यवस्था को समाप्त करने का निर्णय लिया है।

स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था होगी मजबूत

लोक शिक्षण संचालनालय का मानना है कि बड़ी संख्या में शिक्षकों के स्कूलों से बाहर रहने का सीधा असर सरकारी विद्यालयों की पढ़ाई पर पड़ता है। कई स्कूलों में पहले से ही शिक्षकों की कमी है। ऐसे में यदि पदस्थ शिक्षक भी अन्य कार्यालयों में संलग्न रहेंगे तो विद्यार्थियों को नियमित शिक्षा उपलब्ध कराना मुश्किल हो जाएगा।

सरकार का कहना है कि सभी शिक्षकों की विद्यालयों में वापसी से शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ेगी, कक्षाएं नियमित लगेंगी और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलेगा।

मानसून सत्र से पहले जारी हुए निर्देश

विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होने से पहले लोक शिक्षण संचालनालय ने इस संबंध में सभी संबंधित जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं। आदेश में कहा गया है कि जिन शिक्षकों का संलग्नीकरण समाप्त किया गया है, उन्हें तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर उनके मूल पदस्थापना वाले विद्यालयों में भेजा जाए। साथ ही आदेश के पालन की जानकारी भी निर्धारित समय सीमा में संचालनालय को उपलब्ध कराई जाए।

सरकार का उद्देश्य मानसून सत्र के दौरान शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही सुनिश्चित करना और स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाना है।

शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शिक्षक अपने मूल विद्यालयों में नियमित रूप से कार्य करेंगे तो इसका सकारात्मक प्रभाव विद्यार्थियों की पढ़ाई और परीक्षा परिणामों पर भी पड़ेगा। लंबे समय से स्कूलों से बाहर संलग्न शिक्षकों को वापस भेजने का फैसला शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अब यह देखना होगा कि जिला स्तर पर इन निर्देशों का पालन कितनी तेजी से होता है और सभी 213 शिक्षक कब तक अपने-अपने विद्यालयों में कार्यभार ग्रहण करते हैं। सरकार की मंशा स्पष्ट है कि सरकारी शिक्षक का प्राथमिक दायित्व स्कूल में विद्यार्थियों को शिक्षा देना है और भविष्य में भी अनावश्यक संलग्नीकरण को हतोत्साहित किया जाएगा।