मध्यप्रदेश सरकार ने फिर लिया 3,600 करोड़ रुपए का कर्ज, कुल देनदारी 5.61 लाख करोड़ के पार; विकास परियोजनाओं पर होगा खर्च

मध्यप्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने मंगलवार को बाजार से 3,600 करोड़ रुपए का नया कर्ज उठाया है। यह राशि दो अलग-अलग किश्तों में 18 वर्ष और 30 वर्ष की अवधि के लिए जुटाई गई है। इस नई उधारी के बाद चालू वित्त वर्ष में राज्य सरकार द्वारा लिया गया कुल कर्ज 17,400 करोड़ रुपए हो गया है, जबकि प्रदेश पर कुल देनदारी बढ़कर करीब 5.6114 लाख करोड़ रुपए पहुंच गई है।

मध्यप्रदेश सरकार ने फिर लिया 3,600 करोड़ रुपए का कर्ज, कुल देनदारी 5.61 लाख करोड़ के पार; विकास परियोजनाओं पर होगा खर्च

18 और 30 साल की अवधि के लिए उठाया गया ऋण, 7.90% ब्याज दर पर बाजार से जुटाई राशि

मोहन सरकार की नई उधारी से बढ़ा कर्ज का बोझ, चालू वित्त वर्ष में अब तक 17,400 करोड़ का कर्ज

RBI के ई-कुबेर प्लेटफॉर्म से हुई नीलामी, विकास परियोजनाओं पर खर्च करने का सरकार का दावा

भोपाल। मध्यप्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने एक बार फिर बाजार से 3,600 करोड़ रुपए का नया कर्ज उठाया है। यह ऋण दो अलग-अलग अवधियों—18 वर्ष और 30 वर्ष—के लिए लिया गया है। नई उधारी के साथ ही चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य सरकार द्वारा लिया गया कुल कर्ज बढ़कर 17,400 करोड़ रुपए हो गया है। वहीं प्रदेश पर कुल देनदारी लगभग 5 लाख 61 हजार 114 करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है।

वित्त विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार यह राशि राज्य विकास ऋण (State Development Loan) बॉन्ड जारी कर तथा सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी के माध्यम से जुटाई गई है। सरकार का कहना है कि इस धनराशि का उपयोग सिंचाई, कृषि, ऊर्जा, सड़क, पेयजल, संचार और अन्य आधारभूत विकास परियोजनाओं के वित्तपोषण में किया जाएगा। इस उधारी के लिए केंद्र सरकार से आवश्यक स्वीकृति भी प्राप्त कर ली गई है।

दो किश्तों में लिया गया कर्ज

अधिसूचना के अनुसार सरकार ने 3,600 करोड़ रुपए का ऋण दो हिस्सों में लिया है। पहली किश्त 1,600 करोड़ रुपए की है, जिसकी अवधि 18 वर्ष निर्धारित की गई है। दूसरी किश्त 2,000 करोड़ रुपए की है, जिसकी परिपक्वता (मैच्योरिटी) वर्ष 2056 में होगी, यानी लगभग 30 वर्ष बाद इसका भुगतान किया जाएगा।

दोनों ऋणों पर राज्य सरकार को 7.90 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। ब्याज का भुगतान प्रत्येक वर्ष 15 अप्रैल और 15 अक्टूबर को किया जाएगा। निर्धारित अवधि पूरी होने पर मूल राशि का भुगतान किया जाएगा।

ई-कुबेर प्लेटफॉर्म से हुई नीलामी

इस ऋण के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ई-कुबेर प्रणाली के माध्यम से सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी आयोजित की गई। इसमें विभिन्न बैंकों, वित्तीय संस्थानों और अन्य पात्र संस्थागत निवेशकों ने भाग लिया। गैर-प्रतिस्पर्धी निवेशकों के लिए भी तय सीमा तक निवेश की सुविधा उपलब्ध कराई गई।

सरकारी प्रतिभूतियों के जरिए बाजार से धन जुटाना राज्य सरकारों की सामान्य वित्तीय प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है। इस व्यवस्था के तहत निवेशकों को निश्चित ब्याज दर पर निवेश का अवसर मिलता है, जबकि सरकार को विकास कार्यों के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध हो जाते हैं।

चालू वित्त वर्ष में 17,400 करोड़ की उधारी

यह वित्तीय वर्ष शुरू होने के बाद राज्य सरकार की ओर से लिया गया यह नया ऋण है। 3,600 करोड़ रुपए की इस ताजा उधारी के बाद वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक सरकार कुल 17,400 करोड़ रुपए बाजार से उधार ले चुकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यों द्वारा बजट में प्रस्तावित विकास योजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए समय-समय पर बाजार से ऋण लेना एक सामान्य प्रक्रिया है। हालांकि लगातार बढ़ते कर्ज और उसके ब्याज भुगतान का वित्तीय प्रबंधन भी सरकारों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

31 मार्च तक 4.88 लाख करोड़ था कर्ज

राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत वित्तीय आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च 2026 तक मध्यप्रदेश पर कुल 4,88,714.17 करोड़ रुपए का ऋण था। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा 3,33,278.21 करोड़ रुपए के मार्केट लोन का है। इसके अलावा केंद्र सरकार, वित्तीय संस्थानों, राष्ट्रीय लघु बचत निधि (NSSF) और अन्य स्रोतों से लिए गए ऋण भी कुल देनदारियों में शामिल हैं।

अब चालू वित्त वर्ष में लगातार हो रही नई उधारी के बाद प्रदेश की कुल देनदारी बढ़कर लगभग 5.6114 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई है।

किन क्षेत्रों में होगा खर्च

सरकार का कहना है कि बाजार से जुटाई गई इस राशि का उपयोग प्रदेश के विकास कार्यों में किया जाएगा। इनमें प्रमुख रूप से—

सिंचाई परियोजनाएं

कृषि विकास योजनाएं

ऊर्जा क्षेत्र का विस्तार

सड़क एवं पुल निर्माण

पेयजल योजनाएं

संचार सुविधाओं का विकास

सहकारी संस्थाओं को मजबूती

अन्य आधारभूत संरचना परियोजनाएं

इन परियोजनाओं के माध्यम से रोजगार सृजन, ग्रामीण विकास और आर्थिक गतिविधियों को गति देने का लक्ष्य रखा गया है।

सरकार का दावा

राज्य सरकार का कहना है कि विकास कार्यों के लिए लिया गया ऋण भविष्य में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा। सरकार का यह भी दावा है कि राज्य की परिसंपत्तियों (Assets) का कुल मूल्य उसकी देनदारियों से अधिक है। इसलिए वित्तीय स्थिति संतुलित बनी हुई है और कर्ज का उपयोग उत्पादक परिसंपत्तियों के निर्माण में किया जा रहा है।

सरकार के अनुसार यदि ऋण का उपयोग सड़क, सिंचाई, ऊर्जा और औद्योगिक ढांचे जैसी परियोजनाओं में किया जाता है, तो भविष्य में इससे राजस्व बढ़ने और आर्थिक विकास को गति मिलने की संभावना रहती है।

बढ़ते कर्ज पर उठते रहे हैं सवाल

हालांकि विपक्ष लगातार राज्य सरकार के बढ़ते कर्ज को लेकर सवाल उठाता रहा है। विपक्ष का कहना है कि प्रदेश पर लगातार बढ़ता ऋण भविष्य में ब्याज और मूलधन के भुगतान का दबाव बढ़ाएगा। दूसरी ओर सरकार का तर्क है कि विकासशील राज्यों के लिए आधारभूत ढांचे के निर्माण हेतु पूंजीगत निवेश आवश्यक होता है और इसके लिए ऋण लेना सामान्य वित्तीय प्रक्रिया है।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि केवल कर्ज की राशि ही महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि यह भी देखना जरूरी है कि उस धन का उपयोग किस प्रकार की परियोजनाओं में किया जा रहा है। यदि ऋण से ऐसी परिसंपत्तियां तैयार होती हैं जो भविष्य में आय और विकास बढ़ाती हैं, तो उसे दीर्घकालिक निवेश माना जाता है।

आगे की चुनौती

मध्यप्रदेश सरकार के सामने अब विकास योजनाओं को समय पर पूरा करने के साथ-साथ बढ़ती देनदारियों का संतुलित प्रबंधन भी बड़ी चुनौती होगी। आगामी वर्षों में ब्याज भुगतान और ऋण अदायगी का बोझ बढ़ने की संभावना रहेगी। ऐसे में राज्य की आय बढ़ाना, निवेश आकर्षित करना और वित्तीय अनुशासन बनाए रखना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।

फिलहाल 3,600 करोड़ रुपए की नई उधारी के साथ प्रदेश की कुल देनदारी 5.61 लाख करोड़ रुपए के स्तर को पार कर चुकी है। सरकार का कहना है कि यह राशि प्रदेश के बुनियादी ढांचे और विकास कार्यों को गति देने के लिए खर्च की जाएगी, जबकि विपक्ष बढ़ते कर्ज के वित्तीय प्रभावों पर लगातार सवाल उठा रहा है।