प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण-पत्र मामले में मुनादी पर सियासी विवाद, अफसर पर कार्रवाई की मांग; मुख्यमंत्री से मिले छह मंत्री
प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र मामले में गांवों में ढोल पिटवाकर सूचना देने के मामले में कई मंत्रियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
मध्यप्रदेश की नगरीय विकास राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी की परेशानियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। जाति प्रमाण पत्र विवाद मंत्री के गले की फांस बन गया है। दरअसल, जाति प्रमाण पत्र से जुड़े केस में गांव में ढोल पिटवाकर सूचना देने के मामले ने नया विवाद खड़ा कर दिया है।
भोपाल। मध्य प्रदेश की नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण-पत्र विवाद ने अब नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है। राज्य स्तरीय छानबीन समिति की सुनवाई पूरी होने से पहले गांव में मुनादी (ढोल पिटवाकर सूचना) कराए जाने को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। इस पूरे घटनाक्रम पर प्रदेश सरकार के छह मंत्रियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक के बाद उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल, राज्य मंत्री गौतम टेटवाल, राज्य मंत्री लखन पटेल और राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की। मंत्रियों ने मुख्यमंत्री के समक्ष यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि जब मामला राज्य स्तरीय छानबीन समिति के समक्ष विचाराधीन था और सभी पक्षों की सुनवाई चल रही थी, तब गांव में मुनादी कराने का निर्णय उचित नहीं था। उन्होंने इसे एक संवेदनशील मामले में जल्दबाजी और प्रशासनिक त्रुटि बताते हुए संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
मुनादी को लेकर बढ़ा विवाद
प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण-पत्र की जांच के दौरान उनकी जातीय पहचान से जुड़े तथ्यों के सत्यापन के लिए गांव में मुनादी कराई गई थी। इस प्रक्रिया के तहत ग्रामीणों से जानकारी और आपत्तियां आमंत्रित की गईं। हालांकि, इस कार्रवाई पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।
प्रतिमा बागरी ने भी इस प्रक्रिया पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया, मानो वह कोई अपराधी हों। उनका कहना है कि किसी जनप्रतिनिधि और मंत्री के मामले में इस प्रकार सार्वजनिक मुनादी कराना उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला कदम है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने समिति के समक्ष अपने पक्ष में सभी आवश्यक दस्तावेज और वंशावली संबंधी प्रमाण प्रस्तुत कर दिए हैं।
समिति के समक्ष पेश किए दस्तावेज
राज्य स्तरीय अनुसूचित जाति छानबीन समिति के समक्ष हुई सुनवाई में प्रतिमा बागरी ने अपने परिवार की वंशावली सहित कई दस्तावेज प्रस्तुत किए। उन्होंने समिति को बताया कि उनका परिवार बागरी समाज से संबंधित है और मध्य प्रदेश में बागरी समाज अनुसूचित जाति की सूची में शामिल है।
प्रतिमा बागरी का कहना है कि उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेज उनके जाति प्रमाण-पत्र की वैधता को स्पष्ट करते हैं। उन्होंने समिति से निष्पक्ष जांच की अपेक्षा जताई और कहा कि उन्हें न्याय मिलने का पूरा विश्वास है।
6 जुलाई को पूरी हुई सुनवाई
सूत्रों के अनुसार, राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने 6 जुलाई को सभी पक्षों की सुनवाई पूरी कर ली है। शिकायतकर्ता और प्रतिमा बागरी, दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क और दस्तावेज समिति के समक्ष प्रस्तुत किए। अब समिति पूरे मामले से जुड़े रिकॉर्ड, दस्तावेजों और कानूनी पहलुओं का विस्तृत अध्ययन कर रही है।
जानकारी के मुताबिक समिति अगले दो सप्ताह के भीतर अपना अंतिम निर्णय दे सकती है। समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्रतिमा बागरी का जाति प्रमाण-पत्र वैध माना जाएगा या मामले में किसी अन्य कार्रवाई की आवश्यकता होगी।
रिपोर्ट के बाद होगी आगे की कार्रवाई
सरकारी सूत्रों का कहना है कि राज्य सरकार फिलहाल समिति की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही आगे की प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा। सरकार का कहना है कि पूरे मामले में अंतिम निर्णय तथ्यों और समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही लिया जाएगा।
उधर, मुनादी को लेकर उठे विवाद के बाद प्रशासनिक प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में आ गई है। कई राजनीतिक नेताओं का मानना है कि जांच पूरी होने से पहले इस प्रकार की सार्वजनिक कार्रवाई से विवाद और अधिक बढ़ा है।
राजनीतिक हलचल तेज
प्रतिमा बागरी का मामला केवल प्रशासनिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब यह प्रदेश की राजनीति का चर्चित विषय बन चुका है। छह मंत्रियों का एक साथ मुख्यमंत्री से मिलकर अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग करना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि समिति की अंतिम रिपोर्ट का असर केवल प्रतिमा बागरी के राजनीतिक भविष्य पर ही नहीं पड़ेगा, बल्कि सरकार और विपक्ष की आगामी रणनीति पर भी दिखाई दे सकता है। यदि समिति प्रतिमा बागरी के पक्ष में फैसला देती है, तो सरकार इसे अपने पक्ष में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर सकती है। वहीं यदि रिपोर्ट में किसी प्रकार की आपत्ति दर्ज होती है, तो विपक्ष सरकार पर और अधिक हमलावर हो सकता है।
दो सप्ताह पर टिकी निगाहें
फिलहाल पूरे मामले में सभी की नजरें राज्य स्तरीय अनुसूचित जाति छानबीन समिति के फैसले पर टिकी हैं। समिति द्वारा दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और दस्तावेजों की जांच पूरी करने के बाद अब अंतिम रिपोर्ट तैयार की जा रही है। माना जा रहा है कि अगले दो सप्ताह में आने वाला यह निर्णय पूरे विवाद की दिशा तय करेगा।
जब तक समिति अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करती, तब तक इस मामले में किसी भी प्रकार के अंतिम निष्कर्ष से बचने की सलाह दी जा रही है। सरकार ने भी स्पष्ट संकेत दिए हैं कि समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई और निर्णय लिए जाएंगे।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस