जंतर-मंतर पर जनरल कोटे के हजारों लोगों का हल्ला बोल, UGC के नए नियमों और आरक्षण के खिलाफ प्रदर्शन

दिल्ली पुलिस से अनुमति ना मिलने के बावजूद भी आरक्षण के खिलाफ प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर जंतर-मंतर पर बढ़ाई गई सुरक्षा

जंतर-मंतर पर जनरल कोटे के हजारों लोगों का हल्ला बोल, UGC के नए नियमों और आरक्षण के खिलाफ प्रदर्शन

दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण सुधार के मुद्दे पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं है। 21 अगस्त की इजाजत को लेकर दिल्ली पुलिस ने स्पष्टीकरण जारी किया और कहा कि प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी गई है।

नई दिल्ली/कोटा। जातिगत आरक्षण और एससी-एसटी एक्ट से जुड़े प्रावधानों के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे युवा आंदोलन को राजस्थान के कोटा से भी समर्थन मिला है। कोटा की समता आंदोलन समिति के नेतृत्व में करीब 20 युवा दिल्ली पहुंचे और आंदोलन में शामिल होकर अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी के नए नियमों, जातिगत आरक्षण और एससी-एसटी एक्ट से जुड़े मुद्दों पर सरकार से पुनर्विचार की मांग की।

समता आंदोलन समिति का कहना है कि आरक्षण और इससे जुड़े प्रावधानों का असर केवल किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समान अवसर, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय जैसे व्यापक मुद्दों से जुड़ा हुआ है। समिति ने सरकार से आंदोलनकारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने और प्रदर्शन कर रहे युवाओं को शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का अवसर देने की मांग की है।

कोटा से 20 युवा पहुंचे दिल्ली

समता आंदोलन समिति के कोटा जिलाध्यक्ष गोपाल लाल गर्ग ने बताया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन में समर्थन देने के लिए कोटा से करीब 20 युवा दिल्ली पहुंचे हैं। उनके अनुसार, युवाओं ने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन में शामिल होकर अपनी मांगें रखीं।

गर्ग का आरोप है कि प्रदर्शनकारी युवाओं ने जंतर-मंतर की ओर बढ़ते हुए तीन बैरिकेड पार कर लिए थे, लेकिन चौथे बैरिकेड पर पुलिस और प्रशासन की ओर से उन्हें रोक दिया गया। समिति ने प्रशासन से मांग की कि प्रदर्शनकारियों को अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखने दिया जाए और उनकी मांगों को सुना जाए।

समिति का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के माध्यम से अपनी मांग सरकार तक पहुंचाना नागरिकों का अधिकार है। ऐसे में आंदोलनकारियों के साथ संवाद स्थापित कर उनकी मांगों पर चर्चा की जानी चाहिए।

कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

आंदोलन के समर्थन में कोटा में भी समता आंदोलन समिति की ओर से आवाज उठाई गई। समिति ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे युवाओं की मांगों पर विचार करने की मांग की। ज्ञापन के माध्यम से समिति ने कहा कि आंदोलनकारियों को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए।

समिति ने सरकार से आरक्षण व्यवस्था और एससी-एसटी एक्ट से जुड़े उन प्रावधानों पर चर्चा की मांग की है, जिन्हें लेकर सामान्य वर्ग के युवाओं में लंबे समय से असंतोष की स्थिति बनी हुई है।

समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि इस मुद्दे को राजनीतिक टकराव के बजाय नीति और समान अवसर के नजरिए से देखा जाना चाहिए। उनका दावा है कि युवाओं के बीच इस विषय को लेकर लगातार चर्चा बढ़ रही है और आने वाले समय में आंदोलन का दायरा और व्यापक हो सकता है।

18 वर्षों से आरक्षण के मुद्दों पर संघर्ष

समता आंदोलन समिति के जिलाध्यक्ष गोपाल लाल गर्ग ने बताया कि समिति पिछले करीब 18 वर्षों से जातिगत आरक्षण और एससी-एसटी एक्ट से जुड़े मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रही है। यह संघर्ष केवल सड़क पर आंदोलन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समिति की ओर से कानूनी स्तर पर भी कई मुद्दे उठाए गए हैं।

गर्ग के अनुसार, समिति ने विभिन्न मामलों को लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिकाएं भी दायर की हैं। इनमें पदोन्नति में आरक्षण, क्रीमीलेयर और आरक्षण में वर्गीकरण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल रहे हैं।

समिति का तर्क है कि आरक्षण व्यवस्था में समय के साथ बदलाव और समीक्षा की जरूरत है, ताकि वास्तविक रूप से जरूरतमंद लोगों तक इसका लाभ पहुंच सके और समान अवसर के सिद्धांत को भी मजबूती मिले।

पदोन्नति में आरक्षण और क्रीमीलेयर पर भी सवाल

समता आंदोलन समिति लंबे समय से पदोन्नति में आरक्षण, क्रीमीलेयर और आरक्षण के भीतर वर्गीकरण जैसे विषयों को उठाती रही है। समिति का कहना है कि सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा में अवसरों को लेकर सभी वर्गों के युवाओं के हितों को ध्यान में रखते हुए नीतियों की समीक्षा की जानी चाहिए।

समिति के पदाधिकारियों के मुताबिक, आरक्षण को लेकर होने वाली बहस अक्सर राजनीतिक मुद्दे तक सीमित रह जाती है, जबकि इसका सीधा संबंध लाखों युवाओं के शिक्षा और रोजगार के अवसरों से है। इसलिए इस विषय पर व्यापक सामाजिक और कानूनी विमर्श की जरूरत है।

चुनाव में समर्थन को लेकर समिति ने स्पष्ट किया रुख

आगामी चुनावों को लेकर भी समता आंदोलन समिति ने राजनीतिक दलों के सामने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। समिति के जिलाध्यक्ष गोपाल लाल गर्ग ने आरोप लगाया कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप कदम नहीं उठा सके हैं।

गर्ग ने कहा कि अब समिति केवल मौखिक आश्वासनों के आधार पर राजनीतिक समर्थन नहीं करेगी। उनका कहना है कि जो भी राजनीतिक दल समिति के एजेंडे और मांगों का लिखित रूप से समर्थन करेगा तथा शपथ पत्र देगा, चुनाव में उसी दल को समर्थन देने पर विचार किया जाएगा।

समिति का कहना है कि राजनीतिक दलों को आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर अपना स्पष्ट रुख जनता के सामने रखना चाहिए। केवल चुनाव के समय आश्वासन देने के बजाय नीतिगत स्तर पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

युवाओं के भविष्य से जुड़ा बताया मुद्दा

समता आंदोलन समिति ने कहा कि जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन केवल किसी एक वर्ग की मांग नहीं है। समिति के अनुसार, युवाओं का एक वर्ग इसे शिक्षा, रोजगार और समान अवसर से जुड़ा मुद्दा मान रहा है।

गर्ग ने कहा कि पिछले 18 वर्षों से समिति कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को उठाती आ रही है। अब युवाओं की भागीदारी बढ़ना इस बात का संकेत है कि नई पीढ़ी भी अपने भविष्य और अधिकारों को लेकर गंभीर है।

उन्होंने सरकार से मांग की कि आंदोलनकारियों की बात सुनी जाए और आरक्षण तथा एससी-एसटी एक्ट से जुड़े मुद्दों पर सभी पक्षों के साथ संवाद किया जाए। समिति का कहना है कि किसी भी विवाद का समाधान बातचीत और संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से निकाला जाना चाहिए।

आंदोलन को लेकर बढ़ी राजनीतिक हलचल

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और कोटा से युवाओं के दिल्ली पहुंचने के बाद इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक हलचल भी तेज होने के संकेत हैं। समिति ने साफ कर दिया है कि आने वाले चुनावों में वह आरक्षण संबंधी मुद्दों को प्रमुख आधार बनाएगी और राजनीतिक दलों से लिखित समर्थन मांगेंगी।

फिलहाल समिति की ओर से आंदोलन को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। वहीं, दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे युवाओं की मांगों और पुलिस-प्रशासन के बीच स्थिति पर भी नजर बनी हुई है।

समता आंदोलन समिति ने दोहराया है कि उसका आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा। समिति की मांग है कि सरकार युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए आरक्षण व्यवस्था, यूजीसी के नए नियमों और एससी-एसटी एक्ट से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा शुरू करे।

नोट: प्रदर्शनकारियों और समिति द्वारा लगाए गए आरोपों/दावों का स्वतंत्र सत्यापन इस रिपोर्ट में नहीं किया गया है। संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी शामिल किया जा सकता है।