गेहूं खरीदी के बाद भंडारण तक कमी आना सामान्य प्रक्रिया -जिला उपार्जन समितियों को कारणों की पहचान करने के दिये निर्देश
भोपाल में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने स्पष्ट किया कि समर्थन मूल्य पर खरीदे गए गेहूं में तुलाई, परिवहन और भंडारण के दौरान प्रति क्विंटल कुछ कमी आना सामान्य प्रक्रिया है। उन्होंने अपर मुख्य सचिव खाद्य को मामले की समीक्षा कर वास्तविक कारणों की पहचान करने और जरूरत पड़ने पर संबंधित समितियों व परिवहनकर्ताओं से नुकसान की भरपाई कराने के निर्देश दिए
खरीदी, परिवहन और भंडारण के दौरान प्रति क्विंटल कुछ कमी को बताया सामान्य; जिला उपार्जन समितियों को जांच कर जिम्मेदारों से वसूली के निर्देश
भोपाल। मध्य प्रदेश में रबी विपणन वर्ष 2026-27 के दौरान समर्थन मूल्य पर खरीदे गए गेहूं में भंडारण तक पहुंचने के दौरान दर्ज की गई कमी को लेकर उठे सवालों के बीच प्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने स्पष्ट किया है कि तुलाई, परिवहन, भंडारण और हैंडलिंग की पूरी प्रक्रिया के दौरान प्रति क्विंटल गेहूं में कुछ मात्रा की कमी आना एक सामान्य और स्वाभाविक प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि सरकार इस पूरे मामले को गंभीरता से ले रही है और जहां भी वास्तविक कमी या लापरवाही सामने आएगी, वहां संबंधित समितियों और परिवहनकर्ताओं से उसकी भरपाई कराई जाएगी, ताकि शासन को किसी प्रकार की आर्थिक क्षति न हो।
मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने इस संबंध में अपर मुख्य सचिव खाद्य श्रीमती रश्मि अरुण शमी को पूरे मामले की विस्तृत समीक्षा करने तथा कमी के वास्तविक कारणों की पहचान करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि जिन स्थानों पर निर्धारित सीमा से अधिक कमी पाई जाएगी, वहां संबंधित सहकारी समितियों, स्व-सहायता समूहों अथवा परिवहनकर्ताओं से वसूली की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
जिला उपार्जन समितियों को दिए गए निर्देश
अपर मुख्य सचिव खाद्य द्वारा प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी करते हुए कहा गया है कि प्रत्येक जिले की जिला स्तरीय उपार्जन समिति गेहूं में दर्ज कमी का परीक्षण करे। समिति यह सुनिश्चित करेगी कि कमी किन कारणों से हुई है और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो संबंधित संस्था अथवा परिवहनकर्ता से आर्थिक क्षति की भरपाई की जाए।
सरकार का कहना है कि यह प्रक्रिया पहले से लागू व्यवस्था का हिस्सा है और हर वर्ष जिला उपार्जन समितियां इसी प्रकार जांच कर वास्तविक नुकसान का आकलन करती हैं।
क्यों आती है गेहूं में कमी?
विशेषज्ञों के अनुसार समर्थन मूल्य पर खरीदे गए गेहूं को किसानों से खरीदने के बाद उसकी तुलाई, बोरी में भराई, लोडिंग, परिवहन, गोदामों में उतारने तथा भंडारण जैसी कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। इन सभी चरणों में धूल, नमी, दानों के बिखरने और अन्य तकनीकी कारणों से प्रति क्विंटल कुछ ग्राम की कमी दर्ज होना सामान्य माना जाता है। इसी वजह से सरकार भी इसे एक स्वाभाविक प्रक्रिया मानती है, लेकिन यदि कमी निर्धारित मानकों से अधिक हो तो उसकी जांच की जाती है।
इस वर्ष कमी पिछले वर्षों से काफी कम
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्षों में प्रदेश में प्रति क्विंटल औसतन लगभग 176 ग्राम गेहूं की कमी दर्ज होती थी, जबकि रबी विपणन वर्ष 2026-27 में यह औसत घटकर केवल 70 ग्राम प्रति क्विंटल रह गया है। यानी इस वर्ष कमी पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम दर्ज की गई है।
सरकार का दावा है कि यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस बार समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत अधिक हुई है। इसके बावजूद प्रति क्विंटल कमी का औसत पहले की अपेक्षा काफी कम रहा, जो खरीद एवं भंडारण व्यवस्था में सुधार का संकेत माना जा रहा है।
नागरिक आपूर्ति निगम सीधे नहीं करता खरीदी
खाद्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी सीधे नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा नहीं की जाती। खरीदी का कार्य पंजीकृत सहकारी समितियों तथा पंजीकृत स्व-सहायता समूहों के माध्यम से कराया जाता है। नागरिक आपूर्ति निगम केवल समन्वय और प्रबंधन की भूमिका निभाता है।
पूरी खरीद प्रक्रिया जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय उपार्जन समिति की निगरानी में संचालित होती है। यही समिति खरीदी, परिवहन, भंडारण और कमी की जांच सहित अन्य व्यवस्थाओं की निगरानी करती है।
शासन को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच के बाद कहीं वास्तविक आर्थिक क्षति सामने आती है तो उसकी भरपाई संबंधित सहकारी समितियों, स्व-सहायता समूहों अथवा परिवहनकर्ताओं से कराई जाएगी। जिला स्तरीय समितियां यह सुनिश्चित करेंगी कि सरकारी खजाने को किसी प्रकार का वित्तीय नुकसान न हो।
सागर जिले का उदाहरण
खाद्य विभाग ने सागर जिले के आंकड़ों का भी उल्लेख किया है। वर्ष 2026-27 में सागर जिले में 49 हजार से अधिक किसानों से लगभग 36 लाख 20 हजार क्विंटल गेहूं समर्थन मूल्य पर खरीदा गया। पिछले वर्षों में यहां औसतन 510 ग्राम प्रति क्विंटल कमी दर्ज होती थी, जबकि इस वर्ष यह घटकर 318 ग्राम प्रति क्विंटल रह गई। यानी पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 192 ग्राम प्रति क्विंटल कम कमी दर्ज हुई है।
हालांकि सरकार ने यह भी कहा है कि सागर सहित प्रदेश के सभी जिलों में वास्तविक कमी का सत्यापन अभी जारी है। जांच पूरी होने के बाद यदि कहीं भी अतिरिक्त कमी पाई जाती है तो उसके लिए जिम्मेदार संबंधित समितियों, स्व-सहायता समूहों या परिवहनकर्ताओं से नियमानुसार वसूली की जाएगी।
जांच और सत्यापन की प्रक्रिया जारी
वर्तमान में प्रदेश के सभी जिलों में जिला स्तरीय उपार्जन समितियां गेहूं में दर्ज कमी की पहचान और सत्यापन का कार्य कर रही हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक आर्थिक क्षति का आकलन किया जाएगा और उसके आधार पर जिम्मेदार पक्षों से वसूली की कार्रवाई होगी।
सरकार का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी ढंग से संचालित की जा रही है और किसानों के हितों के साथ-साथ सरकारी संसाधनों की सुरक्षा भी सर्वोच्च प्राथमिकता है। खाद्य विभाग ने भरोसा दिलाया है कि जहां भी अनियमितता या लापरवाही सामने आएगी, वहां नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी, जबकि सामान्य प्रक्रिया के तहत होने वाली स्वाभाविक कमी को वैज्ञानिक मानकों के आधार पर ही आंका जाएगा।
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