अनूपपुर में वेयरहाउस से 24 EVM गायब, 8 बैलेट और 16 कंट्रोल यूनिट का नहीं मिला रिकॉर्ड
मध्य प्रदेश के अनूपपुर में वेयरहाउस से 24 ईवीएम (इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनें) गायब मिली हैं। 16 मार्च को वेयरहाउस की दीवार क्षतिग्रस्त मिली थी, तो उस समय मशीनों की सुरक्षा और रिकॉर्ड का सत्यापन नहीं कराया गया।
मध्य प्रदेश के अनूपपुर के पुराने तहसील कार्यालय के पीछे बने ईवीएम वेयरहाउस से 24 EVM चोरी हो गई हैं। इनमें 8 बैलेट यूनिट (BU) और 16 कंट्रोल यूनिट (CU) शामिल हैं। ये मशीनें 2014 से स्थानीय चुनाव के लिए सुरक्षित रखी गई थीं।
अनूपपुर। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में पुराने ईवीएम वेयरहाउस से 24 इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें गायब मिलने से प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। भौतिक सत्यापन के दौरान रिकॉर्ड में दर्ज मशीनों और मौके पर उपलब्ध मशीनों की संख्या में अंतर सामने आया। गायब मशीनों में 8 बैलेट यूनिट और 16 कंट्रोल यूनिट शामिल हैं। मामले की शिकायत के बाद पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2014 में पंचायत चुनाव के लिए अनूपपुर के पुराने तहसील कार्यालय के पीछे बनाए गए वेयरहाउस में बड़ी संख्या में ईवीएम मशीनें रखी गई थीं। रिकॉर्ड के अनुसार वहां 620 कंट्रोल यूनिट और 1670 बैलेट यूनिट सुरक्षित रखी गई थीं। लंबे समय तक ये मशीनें इसी परिसर में रखी रहीं।
16 मार्च को क्षतिग्रस्त मिली थी वेयरहाउस की दीवार
मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आई है कि 16 मार्च को ईवीएम वेयरहाउस के पीछे की दीवार क्षतिग्रस्त मिली थी। इसके बाद भी उस समय वेयरहाउस में रखी मशीनों की संख्या और सुरक्षा व्यवस्था का तत्काल सत्यापन नहीं कराया गया।
दीवार क्षतिग्रस्त मिलने की घटना के बाद ईवीएम की सुरक्षा को लेकर विशेष सावधानी बरती जानी थी, लेकिन मशीनों का भौतिक मिलान बाद में कराया गया। सितंबर के अंतिम सप्ताह में जब मशीनों का सत्यापन शुरू हुआ, तब रिकॉर्ड और मौके पर उपलब्ध मशीनों की संख्या में अंतर सामने आया।
सितंबर में नए स्थान पर रखी गईं मशीनें
जानकारी के अनुसार 21 सितंबर को पुराने तहसील परिसर से ईवीएम मशीनों को हटाकर पालिटेक्निक महाविद्यालय में संचालित तहसील कार्यालय के भूतल स्थित कक्ष क्रमांक-6 में रखा गया।
मशीनों को नए स्थान पर स्थानांतरित किए जाने के बाद 24 से 28 सितंबर के बीच उनका भौतिक सत्यापन कराया गया। इसी सत्यापन के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों को रिकॉर्ड में दर्ज संख्या तथा मौके पर उपलब्ध मशीनों के बीच अंतर का पता चला।
रिकॉर्ड के अनुसार जिन मशीनों को वेयरहाउस में सुरक्षित रखा गया था, उनमें से 24 मशीनें मौके पर उपलब्ध नहीं मिलीं। इनमें आठ बैलेट यूनिट और 16 कंट्रोल यूनिट शामिल हैं।
शिकायत में मशीनों के सीरियल नंबर भी दर्ज
मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायत में गायब मिली मशीनों के सीरियल नंबर भी दर्ज किए गए हैं। इससे जांच एजेंसियों को संबंधित मशीनों की पहचान करने और उनके संबंध में उपलब्ध रिकॉर्ड खंगालने में मदद मिल सकती है।
प्राथमिक विद्यालय सीतापुर के सहायक शिक्षक फूल सिंह तथा तहसील स्तर से जुड़े कर्मचारियों की ओर से मामले की शिकायत अनूपपुर तहसीलदार वेद प्रकाश सिंह के समक्ष की गई। इसके बाद संबंधित स्तर पर कार्रवाई करते हुए पुलिस को सूचना दी गई।
बुधवार को मामले में कोतवाली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति या व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस ने शुरू की जांच
अनूपपुर कोतवाली प्रभारी उमेश उपाध्याय ने बताया कि ईवीएम मशीनों के नहीं मिलने की शिकायत प्राप्त हुई है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि रिकॉर्ड में दर्ज मशीनें आखिरी बार कब और किस स्थान पर मौजूद थीं तथा वेयरहाउस से उनके गायब होने की परिस्थितियां क्या रहीं।
जांच के दौरान पुराने वेयरहाउस की सुरक्षा व्यवस्था, वहां आने-जाने वाले लोगों, मशीनों के स्थानांतरण से जुड़े रिकॉर्ड और उपलब्ध दस्तावेजों की भी पड़ताल की जा सकती है। इसके अलावा मशीनों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के दौरान तैयार किए गए रिकॉर्ड का मिलान भी महत्वपूर्ण होगा।
दीवार टूटने के बाद सुरक्षा पर उठे सवाल
वेयरहाउस की दीवार क्षतिग्रस्त मिलने और उसके बाद मशीनों के सत्यापन में 24 ईवीएम कम मिलने की घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मशीनें किस समय गायब हुईं और इसके पीछे क्या कारण रहा।
मामले में यह भी जांच का विषय है कि 16 मार्च को दीवार क्षतिग्रस्त मिलने के बाद वेयरहाउस में रखी मशीनों की तत्काल गिनती और रिकॉर्ड का मिलान क्यों नहीं किया गया। यदि उस समय मशीनों का भौतिक सत्यापन कराया जाता तो गायब ईवीएम के संबंध में स्थिति पहले स्पष्ट हो सकती थी।
2014 के पंचायत चुनाव से जुड़ी थीं मशीनें
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, गायब मिली ईवीएम मशीनें वर्ष 2014 में पंचायत चुनाव के लिए रखे गए पुराने स्टॉक का हिस्सा थीं। ये मशीनें लंबे समय से उपयोग में नहीं थीं और पुराने तहसील परिसर स्थित वेयरहाउस में सुरक्षित रखी गई थीं।
ऐसे में पुलिस जांच में मशीनों के पुराने रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और उनके रखरखाव से जुड़े दस्तावेज महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। जांच एजेंसी यह भी देख सकती है कि वर्षों के दौरान इन मशीनों को किसी अन्य चुनाव या तकनीकी प्रक्रिया के लिए कहीं भेजा गया था या नहीं।
रिकॉर्ड और मौके की संख्या में अंतर से खुला मामला
ईवीएम मशीनों के गायब होने का पता सीधे तौर पर चोरी की घटना के समय नहीं चला, बल्कि सितंबर में हुए भौतिक सत्यापन के दौरान रिकॉर्ड और वास्तविक संख्या में अंतर मिलने के बाद मामला सामने आया।
24 से 28 सितंबर के बीच किए गए सत्यापन में आठ बैलेट यूनिट और 16 कंट्रोल यूनिट कम मिलीं। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को जानकारी दी गई और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
अब जांच का मुख्य फोकस इन 24 मशीनों की तलाश और उनके वेयरहाउस से गायब होने की पूरी कड़ी सामने लाने पर रहेगा। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास करेगी कि मशीनों को किसी व्यक्ति ने बाहर निकाला था या वे किसी प्रशासनिक स्थानांतरण अथवा अन्य प्रक्रिया के दौरान रिकॉर्ड से अलग हुईं।
फिलहाल पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और जांच जारी है। 24 ईवीएम के गायब मिलने की यह घटना प्रशासनिक रिकॉर्ड, वेयरहाउस सुरक्षा और पुराने चुनावी उपकरणों के रखरखाव से जुड़े कई सवाल सामने ला रही है। मामले में पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इन मशीनों के गायब होने की वास्तविक वजह क्या है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
16 मार्च को मशीनें व्यवस्थित मिली थीं
शिकायतकर्ता के मुताबिक, 16 मार्च 2026 को वेयरहाउस का निरीक्षण किया गया था। उस समय मशीनें व्यवस्थित मिली थीं। इसके बाद जर्जर तहसील को तोड़ने का काम शुरू हुआ। इस दौरान EVM वाले कमरे की पिछली दीवार टूटी मिली। इसी दीवार से रास्ता बनाकर मशीनें चोरी होने की आशंका है।
21 सितंबर को नए स्थान पर शिफ्ट की गईं
चोरी के बाद 21 सितंबर को EVM को पॉलीटेक्निक कॉलेज परिसर में संचालित तहसील कार्यालय के भूतल स्थित कक्ष क्रमांक-6 में शिफ्ट किया गया था। इसके बाद 24 से 28 सितंबर के बीच वेरिफिकेशन कराया गया। इस दौरान मशीनें गायब मिलीं।
कांग्रेस बोली- यह जानबूझकर की गई घटना
अनूपपुर कांग्रेस जिला अध्यक्ष श्याम कुमार चौहान ने बताया- EVM चोरी की घटना से कांग्रेस का ‘वोट चोरी’ का आरोप गलत नहीं लगता। यह चोरी स्थानीय शासन-प्रशासन के इशारे पर कराए जाने की आशंका है।
उन्होंने कहा- इन EVM का पहले हुए चुनावों में इस्तेमाल हुआ हो, इससे इनकार नहीं किया जा सकता। कांग्रेस इस मामले में और जानकारी जुटा रही है। यह सिर्फ प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि जानबूझकर की गई घटना है।
शिकायत के बाद केस दर्ज
कोतवाली थाना प्रभारी उमेश उपाध्याय ने बताया- प्रथम दृष्टया BNS की धारा 331(4) और 305(A) के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब सीरियल नंबर के आधार पर मशीनों के रिकॉर्ड का मिलान करेगी। मामले की जांच की जा रही है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस