रक्षाबंधन पर बाबा रामदेव ने ‘बहन’ कंगना रनोट को भेजी मिठाई-उपहार, पुराने विवाद पर बोला- ‘विवाद नहीं, संवाद होना चाहिए’; कंगना ने कहा- ‘भूल-चूक माफ, बड़े भाई का प्यार स्वीकार’

बाबा रामदेव ने जब कंगना रनौत के 'गटर जेनरेशन' वाले बयान पर आपत्ति जताई थी, तब दोनों दिग्गजों के बीच तीखी बहस हो गई थी. कंगना रनौत ने बाबा रामदेव के पुराने विवाद को उखाड़ते हुए उन पर हमला बोला था. हालांकि, रक्षाबंधन पर बाबा रामदेव ने कंगना रनौत संग अपने विवाद को तिलांजिल दे दी. उन्होंने विवाद की जगह संवाद की अहमियत पर जोर दिया. कंगना रनौत ने भी उन्हें अपना बड़ा भाई बताते हुए उनके उपहार को स्वीकार किया.

रक्षाबंधन पर बाबा रामदेव ने ‘बहन’ कंगना रनोट को भेजी मिठाई-उपहार, पुराने विवाद पर बोला- ‘विवाद नहीं, संवाद होना चाहिए’; कंगना ने कहा- ‘भूल-चूक माफ, बड़े भाई का प्यार स्वीकार’

रक्षाबंधन के मौके पर कंगना रनौत ने बाबा रामदेव को अपना बड़ा भाई बताया है। उन्होंने कहा कि इस त्योहार पर पुरानी बातों को भूल जाना चाहिए। कंगना ने कहा, उन्हें रामदेव की मिठाई और प्रेम दोनों स्वीकार है।

नई दिल्ली। रक्षाबंधन के मौके पर योग गुरु बाबा रामदेव और अभिनेत्री-सांसद कंगना रनोट के बीच हालिया विवाद की तल्खी कम होती नजर आई। त्योहार के अवसर पर बाबा रामदेव ने कंगना रनोट के लिए मिठाई और उपहार भेजकर उन्हें बहन के रूप में शुभकामनाएं दीं। उन्होंने एक लिफाफे में 500 रुपये के नोटों की गड्डी भी भेजी। रामदेव ने इस मौके पर रिश्तों में प्रेम और संवाद बनाए रखने की बात कही।

बाबा रामदेव ने कहा कि त्योहार रिश्तों में आई दूरियों को कम करने और पुराने गिले-शिकवे भुलाने का अवसर होता है। उन्होंने कहा कि समाज में किसी भी वजह से नफरत या वैर भाव नहीं होना चाहिए। अगर किसी मुद्दे को लेकर मतभेद हैं तो उन्हें बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए।

रामदेव ने कंगना को लेकर कहा कि पिछले दिनों उनके और अभिनेत्री के बीच विवाद को लेकर काफी चर्चा हुई थी। ऐसे विवादों को आगे बढ़ाने के बजाय संवाद के माध्यम से खत्म किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वह कंगना को फोन कर रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देंगे।

कंगना ने स्वीकार किया भाई का प्यार

बाबा रामदेव के इस भावपूर्ण संदेश के बाद कंगना रनोट ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। कंगना ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर रामदेव का वीडियो शेयर किया और उनके संदेश की सराहना की।

कंगना ने लिखा कि त्योहार का दिन भूल-चूक माफ करने के लिए होता है। उन्होंने बाबा रामदेव की उस बात को खास तौर पर सराहा, जिसमें उन्होंने विवाद के बजाय संवाद की बात कही थी।

कंगना ने कहा कि रक्षाबंधन के दिन वह बाबा रामदेव की भेजी मिठाई और बड़े भाई का प्रेम, दोनों स्वीकार करती हैं। उन्होंने रामदेव को धन्यवाद देते हुए उनके अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना भी की।

कंगना की इस प्रतिक्रिया को दोनों के बीच हाल में सामने आए विवाद को खत्म करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी दोनों के बीच रिश्तों को लेकर यह घटनाक्रम चर्चा में है।

जेन-जी को लेकर शुरू हुआ था विवाद

दरअसल, बाबा रामदेव और कंगना रनोट के बीच विवाद की शुरुआत जेन-जी प्रदर्शनकारियों को लेकर कंगना की टिप्पणी के बाद हुई थी। कंगना ने प्रदर्शनकारियों के लिए ‘गटरछाप’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। उनकी इस टिप्पणी पर बाबा रामदेव ने नाराजगी जताई थी।

एक इंटरव्यू के दौरान रामदेव ने कंगना की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि किसी भी देश के युवाओं या जेन-जी को इस तरह के अपमानजनक शब्दों से संबोधित करना गलत है। उन्होंने इसे बिगड़े हुए दिमाग की निशानी बताया था।

रामदेव ने यह भी कहा था कि किसी व्यक्ति की आलोचना करने से पहले उसके बारे में जानना जरूरी है। उन्होंने कंगना की योग्यता, उनके बचपन, जवानी और उनके पुराने बयानों को लेकर सवाल खड़े किए थे। रामदेव की यह टिप्पणी सामने आने के बाद मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया था।

कंगना ने भी दिया था पलटवार

बाबा रामदेव की टिप्पणी के बाद कंगना रनोट ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने रामदेव पर पलटवार करते हुए कहा था कि उन्हें उनकी जवानी और बेडरूम के बारे में ‘डे-ड्रीम’ नहीं करना चाहिए।

कंगना की इस प्रतिक्रिया के बाद दोनों के बीच बयानबाजी ने सोशल मीडिया और मीडिया में काफी सुर्खियां बटोरी थीं। हालांकि, रक्षाबंधन के मौके पर बाबा रामदेव की ओर से बहन कंगना के लिए मिठाई और उपहार भेजे जाने तथा कंगना द्वारा उसे स्वीकार किए जाने से अब विवाद को पीछे छोड़ने के संकेत मिल रहे हैं।

‘विवाद नहीं, संवाद होना चाहिए’

रक्षाबंधन के अवसर पर बाबा रामदेव का संदेश केवल कंगना तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने व्यापक तौर पर समाज में आपसी प्रेम और भाईचारे की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना था कि मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन मतभेद को मनभेद में बदलना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि किसी भी मुद्दे पर बातचीत के जरिए रास्ता निकाला जा सकता है। खासकर त्योहारों के अवसर पर पुराने विवादों को भूलकर रिश्तों को मजबूत करने की कोशिश होनी चाहिए।

कंगना ने भी रामदेव के इसी संदेश को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए समर्थन दिया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि रक्षाबंधन जैसे त्योहार पर भूल-चूक माफ करने की भावना होनी चाहिए।

कृति सेनन के विज्ञापन पर भी बदला कंगना का रुख

इसी बीच कंगना रनोट का अभिनेत्री कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन को लेकर बदला हुआ रुख भी चर्चा में है। कंगना ने हाल में ‘डीकोड लाइव’ शो में इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा कि कृति अपने मन के मुताबिक कपड़े पहन सकती हैं। उन्हें कोई रोक नहीं रहा है और किसी को इस बात की इतनी चिंता क्यों होनी चाहिए।

कंगना का यह बयान उनके पहले के रुख से अलग माना जा रहा है। इससे पहले उन्होंने कृति सेनन के रक्षाबंधन से जुड़े विज्ञापन पर सवाल उठाया था।

कंगना ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि आज महिलाओं के पास पहनने के लिए हर तरह के कपड़ों के विकल्प मौजूद हैं। ऐसे में भाई को राखी बांधते समय इस तरह के कपड़े पहनने का चुनाव क्यों किया गया, यह सवाल उन्होंने उठाया था।

हालांकि, बाद में कंगना ने अपने बयान को लेकर स्पष्ट किया कि कृति को अपनी पसंद के कपड़े पहनने की पूरी आजादी है।

रक्षाबंधन ने बदला माहौल

कंगना रनोट और बाबा रामदेव के बीच पिछले दिनों हुई बयानबाजी के बाद रक्षाबंधन पर सामने आया यह घटनाक्रम काफी अलग नजर आया। एक तरफ बाबा रामदेव ने मिठाई और उपहार भेजकर रिश्ते में मिठास लाने की पहल की, वहीं कंगना ने भी उनके प्रेम को स्वीकार करते हुए सकारात्मक संदेश दिया।

राजनीति और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहने वाली कंगना अक्सर अपने बेबाक बयानों के कारण चर्चा में रहती हैं। वहीं बाबा रामदेव भी सामाजिक और सार्वजनिक मुद्दों पर अपनी राय खुलकर रखते हैं। ऐसे में दोनों के बीच हुए विवाद ने भी काफी सुर्खियां बटोरी थीं।

लेकिन रक्षाबंधन के मौके पर दोनों की ओर से सामने आया यह मेल-मिलाप का संदेश यह दिखाता है कि सार्वजनिक मतभेदों के बावजूद व्यक्तिगत रिश्तों में संवाद और सम्मान की गुंजाइश बनी रह सकती है।

त्योहार के मौके पर कंगना द्वारा बाबा रामदेव की मिठाई और बड़े भाई का प्यार स्वीकार करना फिलहाल दोनों के बीच रिश्ते सामान्य होने का संकेत माना जा रहा है। रामदेव के शब्दों में कहें तो विवाद से ज्यादा जरूरी संवाद है और रिश्तों में मिठास बनाए रखना ही त्योहारों की असली भावना है।