नेपाल में विनाशकारी बाढ़ का कहर, 162 लोगों की मौत और 750 लापता; 133 भारतीय समेत ईशा फाउंडेशन के 77 कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्रियों से संपर्क टूटा

नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर बुधवार सुबह आई अचानक बाढ़ में 210 लोगों की मौत हो गई। इनमें नेपाल में 207 और तिब्बत में 3 लोगों की जान गई है। करीब 1,500 लोग अब भी लापता हैं।

नेपाल में विनाशकारी बाढ़ का कहर, 162 लोगों की मौत और 750 लापता; 133 भारतीय समेत ईशा फाउंडेशन के 77 कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्रियों से संपर्क टूटा

नेपाल के नुवाकोट जिले में बुधवार, 26 अगस्त को अचानक आई बाढ़ के बाद त्रिशूली नदी के मलबे से भरे और उफनते किनारों के पास क्षतिग्रस्त घर खतरनाक हालत में खड़े हैं 

नेपाल में भोटेकोशी नदी में बुधवार सुबह आई अचानक और विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हादसे में अब तक कम से कम 162 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 750 लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 133 भारतीय नागरिकों के अलावा सुरक्षाकर्मी और विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। बाढ़ ने मध्य नेपाल के तीन जिलों में घरों, वाहनों, पुलों और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है।

‘द काठमांडू पोस्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ की संभावित वजह भोटेकोशी की सहायक नदी ल्हेन्डे के बहाव को हिमस्खलन से रोक दिया जाना बताई जा रही है। पानी का दबाव बढ़ने के बाद अचानक तेज बहाव ने चीन सीमा के पास रसुवागढ़ी के तिमुरे इलाके में तबाही मचा दी। लोगों को पहले से किसी बड़े खतरे की चेतावनी नहीं मिली, क्योंकि उस समय इलाके में बारिश भी नहीं हो रही थी। अचानक आए पानी ने लोगों को संभलने तक का मौका नहीं दिया।

बाढ़ के कारण कई बस्तियां बह गईं और एक दर्जन के करीब जलविद्युत परियोजनाओं के संचालन पर असर पड़ा है। कई पुलों के बह जाने से राहत और बचाव कार्य भी चुनौतीपूर्ण हो गया है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां लापता लोगों की तलाश में युद्धस्तर पर अभियान चला रही हैं।

इस आपदा में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्रियों के भी फंसे होने की जानकारी सामने आई है। ईशा फाउंडेशन के मुताबिक, उसके ‘सेक्रेड वॉक्स’ अभियान से जुड़े 77 तीर्थयात्रियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। इनमें 22 अमेरिकी और 12 कनाडाई नागरिकों समेत करीब 80 विदेशी नागरिकों के संपर्क से बाहर होने की बात कही गई है। संगठन के अनुसार, संबंधित समूह तिब्बती इमिग्रेशन से गुजरने के बाद काठमांडू लौट रहा था। सुबह 9:05 बजे समूह के एक सदस्य से बातचीत हुई थी, लेकिन करीब दस मिनट बाद संपर्क पूरी तरह टूट गया।

भारत ने भी नेपाल की इस प्राकृतिक आपदा के बीच मानवीय सहायता बढ़ाई है और 10 टन आपदा राहत सामग्री भेजी है। वहीं, तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने नेपाल और तिब्बत में बाढ़ से हुई मौतों पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बार-बार आने वाली ऐसी आपदाएं किसी गहरी वजह की ओर संकेत करती हैं, चाहे इसका संबंध जलवायु परिवर्तन से हो या किसी अन्य कारण से।

फिलहाल नेपाल में राहत, बचाव और लापता लोगों की तलाश का अभियान जारी है। अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती दुर्गम इलाकों तक पहुंच बनाकर लोगों को सुरक्षित निकालना और प्रभावित परिवारों तक जरूरी सहायता पहुंचाना है।