9 मौतों के बाद खुली बस की पोल! MP के मालिक की बस बिहार में रजिस्टर्ड, राजस्थान की फिटनेस और 1.75 लाख के 19 चालान

यमुना एक्सप्रेसवे पर एक भीषण हादसा सामने आया है। बुधवार रात एक स्लीपर बस में आग लगने से 9 लोगों की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि जिस समय ये हादसा हुआ उस समय बस में करीब 35 यात्री थे।

9 मौतों के बाद खुली बस की पोल! MP के मालिक की बस बिहार में रजिस्टर्ड, राजस्थान की फिटनेस और 1.75 लाख के 19 चालान

यूपी के ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेस-वे पर एक चलती हुई स्लीपर बस में आग लग गई। ये बस दिल्ली से महोबा जा रही थी। इस हादसे में 9 लोगों की मौत हई है। घटना के बाद बस को लेकर चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं।

MP का मालिक, बिहार का रजिस्ट्रेशन, दिल्ली से संचालन और राजस्थान की फिटनेस! 19 चालान वाली बस में गजब का फर्जीवाड़ा, आग में 9 की मौत

ग्रेटर नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे पर बुधवार देर रात दिल्ली से महोबा जा रही स्लीपर बस में लगी भीषण आग ने नौ यात्रियों की जान ले ली। हादसे के बाद बस के संचालन और दस्तावेजों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि बस का मालिक मध्य प्रदेश के छतरपुर का रहने वाला बताया जा रहा है, जबकि बस का रजिस्ट्रेशन बिहार का है। बस दिल्ली से संचालित होकर उत्तर प्रदेश के महोबा जा रही थी, वहीं उसके फिटनेस और प्रदूषण प्रमाणपत्र भी अलग-अलग राज्यों से जारी होने की जानकारी सामने आई है।

हादसे के बाद सामने आए रिकॉर्ड के मुताबिक बस पर करीब 1.75 लाख रुपये के 19 चालान दर्ज थे। इसके बावजूद बस सड़क पर यात्रियों को लेकर दौड़ती रही। अब सवाल उठ रहा है कि लगातार नियमों के उल्लंघन के बाद भी बस के संचालन पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

दिल्ली से महोबा जा रही थी बस

हादसे का शिकार हुई बस का नंबर BR 32 PA 8647 बताया गया है। इसे राज कल्पना ट्रैवल्स की डबल डेकर स्लीपर बस बताया जा रहा है। बस दिल्ली से महोबा जा रही थी। रात करीब 11:30 बजे यमुना एक्सप्रेसवे पर जेवर के पास अचानक बस में आग लग गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बस से धुआं उठने के बाद कुछ ही समय में आग की लपटें तेजी से फैलने लगीं। यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। चालक ने बस को एक्सप्रेसवे के किनारे रोकने की कोशिश की। कई यात्रियों ने खिड़कियों और अन्य रास्तों से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई।

हालांकि आग इतनी तेजी से फैली कि कई यात्रियों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका। बस के अंदर फंसे नौ यात्रियों की मौत हो गई। मृतकों में बुजुर्ग महिला और दिव्यांग बच्चे के शामिल होने की जानकारी भी सामने आई है।

19 चालान ने खड़े किए बड़े सवाल

हादसे के बाद बस के रिकॉर्ड की जांच में करीब 19 चालान सामने आने की बात कही जा रही है। इनकी कुल राशि लगभग 1.75 लाख रुपये बताई जा रही है।

बताया गया है कि बस के खिलाफ कम उम्र के चालक द्वारा वाहन चलाने, रेट्रोफिटिंग और परमिट से जुड़े नियमों के उल्लंघन सहित कई मामलों में कार्रवाई की गई थी। ईंधन और वाहन में किए गए बदलावों को लेकर भी नियमों के उल्लंघन का उल्लेख सामने आया है।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब बस पहले से कई चालानों के दायरे में थी तो उसकी तकनीकी और सुरक्षा स्थिति की गंभीर जांच क्यों नहीं की गई? क्या सिर्फ चालान काटकर वाहन को सड़क पर चलने की अनुमति देना पर्याप्त था? हादसे के बाद अब इन सवालों की जांच जरूरी हो गई है।

मालिक MP का, रजिस्ट्रेशन बिहार का

बस से जुड़ी जानकारी में राज्यों का ऐसा कनेक्शन सामने आया है जिसने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बस का मालिक मध्य प्रदेश के छतरपुर का निवासी बताया जा रहा है। बस का रजिस्ट्रेशन बिहार का है और इसका संचालन दिल्ली से किया जा रहा था।

इतना ही नहीं, बस की फिटनेस राजस्थान से और प्रदूषण प्रमाणपत्र हरियाणा से जारी होने की जानकारी सामने आई है। यानी बस का मालिक एक राज्य का, रजिस्ट्रेशन दूसरे राज्य का और संचालन तीसरे राज्य से, जबकि फिटनेस और प्रदूषण से जुड़े दस्तावेज अलग राज्यों से जुड़े बताए जा रहे हैं।

यही वजह है कि हादसे के बाद परिवहन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। जांच में यह देखना अहम होगा कि सभी दस्तावेज नियमों के मुताबिक जारी हुए थे या नहीं और अलग-अलग राज्यों में दर्ज जानकारी के बीच कोई विसंगति थी या नहीं।

कुछ ही मिनटों में धधक उठी बस

यात्रियों के मुताबिक आग लगने के बाद बस में धुआं तेजी से भर गया। कुछ यात्रियों ने आग की लपटें देखते ही शोर मचाना शुरू कर दिया। चालक ने बस को रोक दिया और कई लोग बाहर निकलने में सफल रहे।

कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने बस से पटाखे फूटने जैसी आवाजें सुनाई देने की बात कही है। हालांकि इन आवाजों का वास्तविक कारण जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

टोल कर्मचारियों और एक्सप्रेसवे सुरक्षा टीम ने आग की सूचना पुलिस और दमकल विभाग को दी। करीब चार से पांच दमकल वाहनों की मदद से आग पर काबू पाया गया। आग बुझने के बाद बस पूरी तरह क्षतिग्रस्त हालत में मिली।

आधे घंटे से ज्यादा प्रभावित रहा ट्रैफिक

बस में आग लगने के बाद सुरक्षा कारणों से जेवर टोल और फलैदा कट के आसपास यातायात रोकना पड़ा। आग बुझाने और स्थिति को नियंत्रित करने के बाद यातायात को दोबारा शुरू कराया गया।

घटना के कारण एक्सप्रेसवे पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। पुलिस और एक्सप्रेसवे की सुरक्षा टीम ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य संभाला।

घायलों का अस्पताल में इलाज

हादसे में घायल यात्रियों को इलाज के लिए कैलाश अस्पताल में भर्ती कराया गया। शुरुआती जानकारी में कई यात्रियों के घायल होने की बात सामने आई है। हादसे की सूचना मिलने के बाद पुलिस और प्रशासन के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे।

शुरुआती रिपोर्टों में बताया गया था कि आग लगने का पता चलते ही चालक ने बस को किनारे रोक दिया था और कई यात्रियों ने बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। बाद में पुलिस की जानकारी में मृतकों की संख्या बढ़कर नौ हो गई।

आग की वजह अभी साफ नहीं

बस में आग आखिर किस वजह से लगी, इसका अंतिम कारण अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। आग इंजन, वायरिंग, एसी सिस्टम, ईंधन या किसी अन्य तकनीकी खराबी से लगी, इसकी जांच की जा रही है।

हादसे के बाद बस की तकनीकी स्थिति, फिटनेस प्रमाणपत्र, परमिट, प्रदूषण प्रमाणपत्र, चालक की पात्रता और पुराने चालानों की जानकारी को जांच के दायरे में लिया जाना महत्वपूर्ण है।

CM योगी ने लिया संज्ञान

ग्रेटर नोएडा में हुए इस दर्दनाक हादसे का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और अधिकारियों को घायलों के समुचित इलाज की व्यवस्था करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिवारों से बात कर हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं। साथ ही घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

हादसे ने परिवहन व्यवस्था पर छोड़े कई सवाल

नौ यात्रियों की मौत के बाद अब यह मामला केवल बस में आग लगने की घटना नहीं रह गया है। बस के रिकॉर्ड में सामने आए 19 चालान, अलग-अलग राज्यों से जुड़े दस्तावेज और लंबे रूट पर उसका लगातार संचालन कई सवाल खड़े करते हैं।

अब जांच में यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि बस की फिटनेस वास्तव में कितनी सुरक्षित थी, उसके सभी दस्तावेज वैध थे या नहीं, पुराने चालानों पर क्या कार्रवाई हुई थी और यात्रियों की सुरक्षा के लिए निर्धारित नियमों का कितना पालन किया जा रहा था।

हादसे में नौ लोगों की मौत ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि लंबी दूरी की निजी बसों की निगरानी सिर्फ कागजी दस्तावेजों और चालानों तक सीमित रहनी चाहिए या वाहनों की वास्तविक तकनीकी स्थिति की भी नियमित और सख्त जांच होनी चाहिए।