मुख्यमंत्री के साथ स्वतंत्र देव सिंह का न आना बना चर्चा का विषय, सियासी गलियारों में अटकलों का दौर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जालौन दौरे में सिंचाई एवं जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह की अनुपस्थिति चर्चा का विषय रही। राजनीतिक हलकों में इसे हाल ही में नमामि गंगे परियोजना को लेकर चरखारी विधायक ब्रजभूषण सिंह राजपूत और पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत द्वारा लगाए गए आरोपों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि सरकार की ओर से उनकी गैरमौजूदगी पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, इसलिए इसे लेकर लगाए जा रहे सभी दावे और चर्चाएं अपुष्ट हैं।

मुख्यमंत्री के साथ स्वतंत्र देव सिंह का न आना बना चर्चा का विषय, सियासी गलियारों में अटकलों का दौर

जालौन दौरे में मुख्यमंत्री के साथ स्वतंत्र देव सिंह की गैरमौजूदगी बनी चर्चा का विषय

योगी के कार्यक्रम से स्वतंत्र देव सिंह की दूरी पर तेज हुई सियासी चर्चाएं

सीएम योगी के जालौन दौरे में नहीं दिखे स्वतंत्र देव सिंह, उठे कई सवाल

स्वतंत्र देव सिंह की अनुपस्थिति ने बढ़ाईं राजनीतिक अटकलें

उरई। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शनिवार को जालौन दौरे के दौरान एक राजनीतिक चर्चा ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। चर्चा का विषय यह रहा कि प्रदेश सरकार के सिंचाई एवं जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह मुख्यमंत्री के साथ कार्यक्रम में दिखाई नहीं दिए। बुंदेलखंड में हाल के समय में मुख्यमंत्री का यह चौथा दौरा था, लेकिन इस बार जालौन की यात्रा के दौरान स्वतंत्र देव सिंह की अनुपस्थिति को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।

स्थानीय स्तर पर इसे सामान्य प्रशासनिक कारण मानने के बजाय राजनीतिक दृष्टि से भी देखा जा रहा है। लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में अक्सर मौजूद रहने वाले स्वतंत्र देव सिंह इस बार साथ क्यों नहीं दिखे। हालांकि सरकार या भाजपा की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हाल के महीनों में महोबा जिले के चरखारी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक ब्रजभूषण सिंह राजपूत द्वारा नमामि गंगे परियोजना को लेकर सार्वजनिक रूप से उठाए गए सवालों के बाद स्थिति बदली है। विधायक ने परियोजना के कार्यों पर गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि जिन गांवों में पाइपलाइन बिछाने के लिए सड़कें खोदी गईं, वहां आज तक सड़कें ठीक नहीं कराई गईं और कई स्थानों पर लोगों को नलों के माध्यम से पानी भी उपलब्ध नहीं हो रहा है। उन्होंने परियोजना की गुणवत्ता और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और विभाग को कठघरे में खड़ा किया था।

बताया जाता है कि विधायक ने इस मुद्दे को लेकर मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के काफिले को भी रोककर विरोध दर्ज कराया था। यह मामला उस समय काफी चर्चा में रहा और विपक्ष ने भी इसे मुद्दा बनाया। इसके बाद चरखारी विधायक के पिता एवं पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत ने भी अपने पुत्र का समर्थन करते हुए नमामि गंगे परियोजना में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी। उनका आरोप था कि लगभग 28 हजार करोड़ रुपये की इस परियोजना में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों की आशंका है और इसकी ईमानदारी से जांच कराई जानी चाहिए।

इन घटनाओं के बाद से राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई कि स्वतंत्र देव सिंह की सरकार और संगठन में पहले जैसी सक्रिय भूमिका दिखाई नहीं दे रही है। कभी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बेहद करीबी नेताओं में गिने जाने वाले स्वतंत्र देव सिंह की सार्वजनिक कार्यक्रमों में मौजूदगी को लेकर भी लगातार चर्चाएं होती रही हैं। जालौन दौरे में मुख्यमंत्री के साथ उनका न होना इन्हीं चर्चाओं को और हवा देता नजर आया।

हालांकि भाजपा के स्थानीय नेताओं का कहना है कि किसी मंत्री का किसी कार्यक्रम में शामिल न होना सामान्य प्रशासनिक व्यस्तता का हिस्सा भी हो सकता है और इसे राजनीतिक मतभेद से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि सरकार के विभिन्न मंत्री अलग-अलग जिलों में अपने विभागीय कार्यक्रमों में व्यस्त रहते हैं और हर कार्यक्रम में सभी मंत्रियों की मौजूदगी संभव नहीं होती।

दूसरी ओर विपक्ष इस घटनाक्रम को राजनीतिक संकेत के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यदि सरकार के भीतर सब कुछ सामान्य है तो मुख्यमंत्री के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में संबंधित जिले से जुड़े वरिष्ठ मंत्री की अनुपस्थिति पर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

फिलहाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ या स्वतंत्र देव सिंह की ओर से इस विषय पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में उनकी अनुपस्थिति को लेकर लगाए जा रहे सभी राजनीतिक कयास केवल चर्चाओं और अटकलों तक ही सीमित हैं। किसी भी संभावित कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

उरई और जालौन के राजनीतिक गलियारों में यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में यदि सरकार या संबंधित नेताओं की ओर से कोई स्पष्टीकरण आता है तो स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। तब तक मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में स्वतंत्र देव सिंह की गैरमौजूदगी को लेकर राजनीतिक विश्लेषण और अटकलों का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।