सरकार अब जिंदा रखे या मार दे'... झारखंड के 'जंतर-मंतर' से छात्रों की हुंकार, JPSC परीक्षा विवाद पर आंदोलन तेज

जेपीएससी के पेपर लीक किए गए, सीटें बेची गई हैं और उन्हें सीआईडी जांच पर भरोसा नहीं है, मामले की जांच ईडी या सीबीआई को सौंपी जाए. आंदोलन की शुरुआत स्टूडेंट लीडर और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) से जुड़े देवेंद्रनाथ महतो ने 25 जुलाई को राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान स्थित गांधी प्रतिमा के सामने धरना देने के साथ की.

सरकार अब जिंदा रखे या मार दे'... झारखंड के 'जंतर-मंतर' से छात्रों की हुंकार, JPSC परीक्षा विवाद पर आंदोलन तेज

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों के खिलाफ जंतर-मंतर जैसा आंदोलन चल रहा है। 7 से ज्यादा प्रदर्शनकारी भूख हड़ताल पर हैं। इनमें छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने 2 अगस्त से अन्न-जल छोड़ रखा था।

रांची। झारखंड की राजधानी रांची का जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम इन दिनों छात्र आंदोलन का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं और धांधली के आरोपों के खिलाफ 25 जुलाई से शुरू हुआ आंदोलन अब और तेज हो गया है। लगातार दस दिनों से हजारों छात्र स्टेडियम में डटे हुए हैं। आंदोलन का स्वरूप इतना व्यापक हो चुका है कि लोग इसे दिल्ली के जंतर-मंतर से जोड़कर देख रहे हैं।

स्टेडियम में दिन-रात छात्रों और उनके समर्थकों की भीड़ जुट रही है। बड़ी संख्या में युवा, अभिभावक और सामाजिक संगठनों के लोग आंदोलन को नैतिक समर्थन देने पहुंच रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह सिर्फ एक परीक्षा का मामला नहीं, बल्कि राज्य की पूरी भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता और ईमानदारी की लड़ाई है।

आमरण अनशन पर बैठे छात्र

आंदोलन के बीच कई छात्र आमरण अनशन पर भी बैठे हैं। स्टेडियम परिसर में अलग-अलग स्थानों पर तंबू लगाए गए हैं, जहां छात्र अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं। आंदोलन में शामिल विद्यार्थियों का कहना है कि उनका किसी भी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है और उनका उद्देश्य केवल निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित कराना है।

बोकारो की रहने वाली हबीबा पहली बार भूख हड़ताल पर बैठी हैं। उन्होंने बीएड किया है और उनका कहना है कि छात्र वर्षों तक मेहनत कर परीक्षाएं देते हैं, लेकिन भर्ती आयोग उनकी मेहनत के साथ न्याय नहीं कर रहा। उनका आरोप है कि JPSC और JSSC की कई परीक्षाओं में लगातार गड़बड़ियां सामने आती रही हैं, जिससे युवाओं का भविष्य अंधकार में चला गया है।

रांची की सविता, जो अकाउंट्स ऑनर्स की छात्रा हैं, भी आमरण अनशन पर बैठी हैं। उनका कहना है कि यदि परीक्षा निष्पक्ष होती तो उनका चयन निश्चित था। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं ने योग्य अभ्यर्थियों के सपनों को तोड़ दिया है। सविता का कहना है कि अब उनके पास भूख हड़ताल के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।

गढ़वा के रूपेश, जिन्होंने अंग्रेजी विषय में स्नातकोत्तर किया है, बताते हैं कि वर्ष 2015 में निकली JSSC CGL भर्ती की परीक्षा 2024 में आयोजित हुई, लेकिन उसमें भी धांधली के आरोप लगे। उन्होंने कहा कि अदालत से उम्र सीमा में राहत मिलने के बावजूद भर्ती प्रक्रिया की अनियमितताओं के कारण उन्हें न्याय नहीं मिल सका।

भूगोल ऑनर्स के छात्र क्रांति ने आंदोलन के दौरान अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा, "सरकार अब हमें जिंदा रखे या मार दे। वैसे भी इस व्यवस्था में हमारा भविष्य खत्म हो चुका है।" उनका यह बयान आंदोलन में शामिल हजारों युवाओं की निराशा और आक्रोश को दर्शाता है।

रांची का स्टेडियम बना 'जंतर-मंतर'

जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम का माहौल किसी बड़े जनआंदोलन जैसा दिखाई दे रहा है। मैदान में चारों ओर छात्रों के तंबू लगे हैं और लगातार सभाएं, चर्चाएं तथा विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। कई सामाजिक संगठन छात्रों को भोजन, पानी और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं।

आंदोलन में शामिल छात्र बार-बार यह स्पष्ट कर रहे हैं कि उनकी लड़ाई किसी सरकार या राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि भ्रष्ट भर्ती व्यवस्था के खिलाफ है। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

क्या है पूरा मामला?

2 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित किया था। आयोग ने 2,204 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया। इसके बाद 18 से 20 जुलाई के बीच मुख्य परीक्षा आयोजित की जानी थी।

हालांकि परिणाम जारी होते ही कई अभ्यर्थियों ने गंभीर सवाल उठाए। छात्रों का आरोप था कि आयोग ने कट-ऑफ अंक सार्वजनिक नहीं किए। इसी दौरान सोशल मीडिया पर एक अभ्यर्थी की कथित OMR शीट वायरल हुई, जिसमें दावा किया गया कि उसने केवल 48 प्रश्न हल किए थे, फिर भी उसे मुख्य परीक्षा के लिए चयनित कर लिया गया।

इसके अलावा छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि जारी परिणाम पर आयोग के जिम्मेदार अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं थे, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए। विवाद बढ़ने के बाद JPSC ने प्रस्तावित मुख्य परीक्षा को स्थगित कर दिया, लेकिन छात्रों का कहना है कि केवल परीक्षा स्थगित करना पर्याप्त नहीं है।

छात्रों की प्रमुख मांगें

आंदोलनकारी छात्रों ने सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। उनका कहना है कि 14वीं JPSC परीक्षा की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से कराई जाए। छात्रों का दावा है कि उन्हें केवल राज्य की CID जांच पर भरोसा नहीं है।

वे भर्ती घोटालों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने की मांग भी कर रहे हैं, ताकि दोषियों को जल्द सजा मिल सके।

इसके अलावा छात्रों ने टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) द्वारा कराई गई सभी भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने और कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की मांग की है। उनका कहना है कि भविष्य की परीक्षाएं टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) जैसी विश्वसनीय एजेंसी से कराई जानी चाहिए।

छात्रों की एक अन्य प्रमुख मांग JPSC और JSSC के उन अधिकारियों को हटाने की है, जिन पर भ्रष्टाचार या अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। उनकी जगह निष्पक्ष और साफ छवि वाले अधिकारियों की नियुक्ति की मांग भी की जा रही है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का बयान

छात्र आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि उन्होंने राज्यपाल से मुलाकात कर वर्तमान स्थिति पर विस्तार से चर्चा की है। उन्होंने स्वीकार किया कि भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं का मुद्दा केवल झारखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर की चुनौती बन चुका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मंगाकर सभी पहलुओं की जांच करेगी। उन्होंने बताया कि कई मामलों में जांच एजेंसियां कार्रवाई कर रही हैं और कई आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी चल रही है।

हेमंत सोरेन ने आश्वासन दिया कि सरकार के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं और छात्रों की हर मांग पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार इस पूरे मामले का स्थायी और ठोस समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है।

आंदोलन पर पूरे राज्य की नजर

फिलहाल रांची का जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम झारखंड के युवाओं की उम्मीदों और संघर्ष का प्रतीक बन चुका है। हजारों छात्र भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और न्याय की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं। अब सभी की नजर राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी है। यदि सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच जल्द कोई समाधान नहीं निकलता, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और व्यापक रूप ले सकता है।