इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट पर सपा-भाजपा आमने-सामने, बसपा ने नहीं उतारा प्रत्याशी

इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक एमएलसी सीट पर फिलहाल सपा और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला नजर आ रहा है। भाजपा ने अशोक कुमार राठौर और सपा ने मौजूदा एमएलसी डॉ. मानसिंह वर्मा को मैदान में उतारा है। बसपा ने अभी प्रत्याशी घोषित नहीं किया है, जबकि कांग्रेस के रुख पर भी तस्वीर साफ नहीं है। 10 जिलों में होने वाले इस चुनाव के लिए 23 अक्टूबर को मतदान और 27 अक्टूबर को मतगणना होगी।

इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट पर सपा-भाजपा आमने-सामने, बसपा ने नहीं उतारा प्रत्याशी

सपा-भाजपा के बीच सीधी टक्कर, बसपा-कांग्रेस की तस्वीर साफ नहीं

भाजपा ने अशोक कुमार राठौर को बनाया प्रत्याशी

सपा ने मौजूदा एमएलसी डॉ. मानसिंह वर्मा पर फिर जताया भरोसा

10 जिलों में फैला है इलाहाबाद-झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र

उरई। विधान परिषद के इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के द्विवार्षिक चुनाव में राजनीतिक मुकाबला धीरे-धीरे स्पष्ट होता जा रहा है। नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी मैदान में हैं, जबकि बहुजन समाज पार्टी ने अभी तक अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। कांग्रेस की ओर से भी अभी प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारा गया है। ऐसे में फिलहाल चुनावी मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा और सपा के बीच दिखाई दे रहा है।

निर्वाचन आयोग की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार 29 सितंबर 2026 से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रत्याशी 6 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे। 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 9 अक्टूबर नाम वापसी की अंतिम तारीख निर्धारित की गई है। मतदान 23 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक होगा। मतगणना 27 अक्टूबर को कराई जाएगी।

10 जिलों में फैला है निर्वाचन क्षेत्र

इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कुल 10 जिले शामिल हैं। इनमें प्रयागराज, कौशाम्बी, फतेहपुर, चित्रकूट, बांदा, हमीरपुर, महोबा, जालौन, झांसी और ललितपुर शामिल हैं। इस लिहाज से यह निर्वाचन क्षेत्र भौगोलिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से काफी बड़ा है।

बुंदेलखंड के जालौन, झांसी, ललितपुर, बांदा, हमीरपुर और महोबा जैसे जिलों की भूमिका भी चुनाव में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वहीं मतदाताओं की संख्या के लिहाज से प्रयागराज सबसे बड़ा क्षेत्र है। इसके बाद झांसी और फतेहपुर का स्थान बताया जा रहा है। अलग-अलग क्षेत्रों में प्रत्याशियों की व्यक्तिगत पकड़ और शिक्षक संगठनों से जुड़े मतदाताओं का समर्थन चुनावी परिणाम पर असर डाल सकता है।

भाजपा ने अशोक कुमार राठौर पर जताया भरोसा

भाजपा ने इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट से जालौन के उरई निवासी अशोक कुमार राठौर को प्रत्याशी बनाया है। राठौर लंबे समय से शिक्षक संगठनों और भाजपा संगठन से जुड़े रहे हैं। वह माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक महासभा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

अशोक राठौर इससे पहले इलाहाबाद-झांसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव भी लड़ चुके हैं। वर्ष 2023 के शिक्षक एमएलसी चुनाव में उन्होंने नामांकन दाखिल किया था, लेकिन बाद में भाजपा प्रत्याशी डॉ. बाबूलाल तिवारी के समर्थन में चुनाव से हटने की घोषणा की थी।

संगठन में भी उन्हें लगातार जिम्मेदारियां मिलती रही हैं। वर्ष 2025 में उन्हें भाजपा के शिक्षक प्रकोष्ठ के कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र में सह संयोजक की जिम्मेदारी दी गई थी। मार्च 2026 में उन्हें भाजपा का जिला उपाध्यक्ष बनाया गया। पार्टी संगठन और शिक्षक वर्ग से उनके लंबे जुड़ाव को इस चुनाव में उनकी प्रमुख ताकत के रूप में देखा जा रहा है।

सपा ने मौजूदा एमएलसी डॉ. मानसिंह वर्मा को फिर उतारा

समाजवादी पार्टी ने मौजूदा एमएलसी डॉ. मानसिंह वर्मा को दोबारा मैदान में उतारा है। प्रयागराज से उनकी स्थानीय पहचान और पिछले कार्यकाल का अनुभव उनके पक्ष में महत्वपूर्ण कारक माना जा रहा है।

डॉ. वर्मा पहले भी इस सीट से चुनाव जीत चुके हैं और उनका मतदाताओं के साथ सीधा संपर्क रहा है। चुनाव की घोषणा के बाद वह अपने समर्थकों और मतदाताओं के बीच सक्रिय हैं। सपा को उम्मीद है कि मौजूदा एमएलसी के रूप में उनकी पहचान और पिछले चुनाव का अनुभव पार्टी के लिए मददगार साबित होगा।

बसपा की चुप्पी से बदला चुनावी समीकरण

चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बावजूद बसपा की ओर से अभी तक प्रत्याशी घोषित नहीं किया गया है। कांग्रेस ने भी फिलहाल अपना उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा है। यही वजह है कि चुनावी तस्वीर इस समय भाजपा और सपा के बीच सीधी टक्कर जैसी दिखाई दे रही है।

हालांकि नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है, इसलिए अभी चुनावी समीकरण पूरी तरह अंतिम नहीं माने जा सकते। बसपा प्रत्याशी उतारती है या नहीं और कांग्रेस की ओर से कोई अलग उम्मीदवार मैदान में आता है या किसी प्रत्याशी को समर्थन दिया जाता है, इसका असर मुकाबले पर पड़ सकता है।

बुंदेलखंड पर दोनों दलों की नजर

इस सीट में जालौन समेत बुंदेलखंड के कई जिले शामिल होने के कारण भाजपा प्रत्याशी अशोक राठौर के लिए यह क्षेत्र खास महत्व रखता है। राठौर का जालौन से संबंध और शिक्षक संगठनों में सक्रियता उनके चुनाव अभियान का अहम हिस्सा बन सकती है।

दूसरी ओर सपा प्रत्याशी डॉ. मानसिंह वर्मा के लिए प्रयागराज और आसपास के क्षेत्रों में अपनी पकड़ बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। सीट में शामिल सभी 10 जिलों में मतदाताओं तक पहुंच बनाना दोनों प्रमुख प्रत्याशियों के लिए बड़ी चुनौती है।

विधान परिषद की स्नातक सीट के चुनाव में सामान्य विधानसभा चुनाव की तरह सभी मतदाता मतदान नहीं करते, बल्कि निर्धारित पात्र स्नातक मतदाता मतदान करते हैं। इसलिए प्रत्याशियों के लिए सीमित लेकिन विशिष्ट मतदाता समूह तक प्रभावी पहुंच बनाना बेहद महत्वपूर्ण होता है।

27 अक्टूबर को आएगा फैसला

मौजूदा एमएलसी डॉ. मान सिंह यादव का कार्यकाल 6 दिसंबर 2026 को समाप्त होना है। इसी वजह से नई सदस्य के निर्वाचन के लिए यह द्विवार्षिक चुनाव कराया जा रहा है।

फिलहाल भाजपा के अशोक कुमार राठौर और सपा के डॉ. मानसिंह वर्मा के बीच मुकाबला प्रमुख रूप से सामने है। हालांकि 6 अक्टूबर तक नामांकन और 9 अक्टूबर तक नाम वापसी के बाद ही प्रत्याशियों की अंतिम तस्वीर साफ होगी। इसके बाद दोनों प्रमुख दल 10 जिलों में अपने चुनाव अभियान को तेज करेंगे।

23 अक्टूबर को मतदान के बाद 27 अक्टूबर को मतगणना होगी। इसी दिन स्पष्ट होगा कि इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की कमान अगले कार्यकाल के लिए किस प्रत्याशी के हाथ में जाती है।