अमित शाह-सीएम मोहन यादव ने शुरू की ‘श्वेत क्रांति 2.0’, MP में डेयरी क्षेत्र को मिलेगी नई रफ्तार
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार गरीब, युवा और महिलाओं के कल्याण के लिए भी कई योजनाओं पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पशुपालन और डेयरी को खेती के साथ जोड़कर किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर तैयार किए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश लगातार आगे बढ़ रहा है और सरकार का फोकस किसानों की आय बढ़ाने के साथ पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने पर है। सम्मेलन में 35 हजार से अधिक गौपालकों और दुग्ध सहकारी समितियों से जुड़े लोगों के शामिल होने की जानकारी दी गई थी
भोपाल। मध्यप्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, पशुपालकों की आय में वृद्धि करने और डेयरी क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 को बड़ा कदम उठाया गया। राजधानी भोपाल के भेल दशहरा मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय गौपालक सम्मेलन में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में प्रदेश में ‘श्वेत क्रांति 2.0’ की शुरुआत की गई। सम्मेलन के दौरान डेयरी क्षेत्र से जुड़ी कई परियोजनाओं का लोकार्पण और भूमिपूजन किया गया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में 80 लाख से अधिक गौपालकों का परिवार है। सरकार का उद्देश्य खेती के साथ पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को किसानों की आय बढ़ाने का मजबूत माध्यम बनाना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पशुपालन, दूध उत्पादन, मुर्गी पालन, बकरी पालन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
प्रदेश में रोजाना 2 करोड़ लीटर से ज्यादा दूध उत्पादन
मुख्यमंत्री के मुताबिक मध्यप्रदेश में वर्तमान में प्रतिदिन 2 करोड़ लीटर से अधिक दूध का उत्पादन हो रहा है। उन्होंने कहा कि दूध उत्पादन के मामले में मध्यप्रदेश देश के प्रमुख राज्यों में शामिल है। किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने में डेयरी क्षेत्र की भूमिका महत्वपूर्ण है।
डॉ. यादव ने कहा कि पहले दुग्ध उत्पादकों को अपने उत्पाद का उचित मूल्य प्राप्त करने में बिचौलियों की भूमिका के कारण दिक्कतें आती थीं। सहकारी व्यवस्था के विस्तार के साथ दुग्ध उत्पादकों को सीधे बाजार और संस्थागत व्यवस्था से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इससे दूध के संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन की व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में दुग्ध समितियों के माध्यम से प्रतिदिन करीब 12 लाख लीटर दूध की खरीदी की जा रही है। किसानों को दूध के लिए 55 रुपये प्रति लीटर तक का भाव मिलने की बात भी मुख्यमंत्री ने कही
उज्जैन में 255 करोड़ का डेयरी प्लांट
गौपालक सम्मेलन में उज्जैन में बनने वाले बड़े दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र का वर्चुअल भूमिपूजन किया गया। करीब 255 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस प्लांट की क्षमता प्रतिदिन 3 लाख लीटर दूध के प्रसंस्करण की होगी। इससे दूध के संग्रहण और प्रसंस्करण की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है
इसके अलावा भोपाल में करीब 16.5 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 40 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले प्रोडक्ट डेयरी प्लांट का लोकार्पण किया गया। भोपाल में ही लगभग 12.42 करोड़ रुपये की लागत से तैयार राज्य स्तरीय केंद्रीय प्रयोगशाला का भी लोकार्पण हुआ।
शिवपुरी में करीब 6.5 करोड़ रुपये की लागत से मिनी डेयरी प्लांट के सुदृढ़ीकरण का कार्य भी पूरा किया गया। इन परियोजनाओं को प्रदेश के डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।
‘श्वेत क्रांति 2.0’ का व्यापक उद्देश्य दुग्ध सहकारिता के नेटवर्क को मजबूत करना, अधिक से अधिक दुग्ध उत्पादकों को संगठित बाजार से जोड़ना, दूध संग्रहण और प्रसंस्करण की क्षमता बढ़ाना तथा डेयरी क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देना है।
केंद्र सरकार के अनुसार इस पहल के तहत उन पंचायतों तक दुग्ध सहकारी समितियों का विस्तार करने पर जोर है, जहां अभी ऐसी व्यवस्था पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं है। अगले पांच वर्षों में दुग्ध सहकारी समितियों के माध्यम से दूध खरीद में 50 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है।
श्वेत क्रांति 2.0 के तहत नई दुग्ध समितियों के गठन और मौजूदा समितियों को मजबूत करने के साथ बाजार तक पहुंच बढ़ाने, रोजगार के अवसर पैदा करने और महिला सशक्तिकरण पर भी जोर दिया जा रहा है। केंद्र सरकार ने 2024 में इस पहल के लिए मानक संचालन प्रक्रिया भी जारी की थी
गौशालाओं और पशुपालन पर भी जोर
मध्यप्रदेश में श्वेत क्रांति 2.0 को केवल दूध उत्पादन तक सीमित नहीं रखा गया है। सरकार की योजना में गौशालाओं को मजबूत करने, पशुओं की बेहतर देखभाल, उन्नत नस्ल के पशुओं की संख्या बढ़ाने और डेयरी से जुड़े बुनियादी ढांचे के विस्तार को भी शामिल किया गया है।
किसानों को खेती के साथ पशुपालन से जोड़ने के पीछे उद्देश्य ग्रामीण परिवारों के लिए आय के अतिरिक्त स्रोत तैयार करना है। डेयरी गतिविधि के माध्यम से रोजाना होने वाली आय किसानों के लिए नकदी प्रवाह का माध्यम बन सकती है।
सहकारिता के जरिए किसानों तक लाभ पहुंचाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसान कल्याण वर्ष के दौरान 17 विभागों को जोड़कर किसानों के हित में काम कर रही है। कृषि मेलों, कृषि यंत्र प्रदर्शनियों और आधुनिक कृषि तकनीक की जानकारी के साथ पशुपालन को भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनाया जा रहा है।
केंद्रीय स्तर पर भी ‘सहकार से समृद्धि’ की नीति के तहत प्राथमिक स्तर की कृषि, डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियों के विस्तार पर जोर दिया गया है। सरकार के अनुसार सहकारी संस्थाओं के माध्यम से उत्पादकों को बाजार, प्रसंस्करण और मूल्य श्रृंखला से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
किसानों और गौपालकों के लिए नई संभावनाएं
भोपाल में आयोजित सम्मेलन में दुग्ध उत्पादकों को प्रोत्साहन देने के साथ विभिन्न योजनाओं के लाभ और स्वीकृति पत्र भी वितरित किए गए। ‘गौपालक दीदियों’ के सम्मान और डेयरी क्षेत्र से जुड़े अन्य कार्यक्रम भी सम्मेलन का हिस्सा रहे।
कुल मिलाकर मध्यप्रदेश में शुरू की गई ‘श्वेत क्रांति 2.0’ का फोकस दूध उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ दूध संग्रहण, प्रसंस्करण, सहकारिता, पशु नस्ल सुधार, गौशाला व्यवस्था और डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर को एक साथ मजबूत करने पर है। उज्जैन का 255 करोड़ रुपये का प्लांट, भोपाल का नया डेयरी प्लांट, केंद्रीय प्रयोगशाला और शिवपुरी की डेयरी परियोजना इसी दिशा में उठाए गए प्रमुख कदम हैं
सरकार का कहना है कि डेयरी क्षेत्र के विस्तार से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और अधिक संख्या में किसानों व पशुपालकों को संगठित दुग्ध बाजार से जोड़ने का रास्ता खुलेगा। इसका वास्तविक प्रभाव दूध की खरीद, प्रसंस्करण क्षमता, बाजार मूल्य और पशुपालकों की आय में आने वाले बदलावों से आगे स्पष्ट होगा।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस