नाराज जेन-अल्फा 62 KM पैदल कलेक्टर से मिलने निकले, रास्ते में पुलिस ने रोका; हॉस्टल की सुविधाओं को लेकर छात्रों का प्रदर्शन

बच्चे अभी लगभग 15 से 17 किलोमीटर चल चुके हैं। बच्चों का कहना है कि वह कलेक्टर से मिलकर ही वापस लौटेंगे। हालांकि, अब तक कलेक्टर मैडम बच्चों से मिलने नहीं आई हैं।

नाराज जेन-अल्फा 62 KM पैदल कलेक्टर से मिलने निकले, रास्ते में पुलिस ने रोका; हॉस्टल की सुविधाओं को लेकर छात्रों का प्रदर्शन

बड़वानी के सेंधवा में जेन अल्फा प्रोटेस्ट शुरू हो गया है। सोमवार दोपहर करीब 12 बजे एकलव्य आदर्श विद्यालय जामली के छात्र-छात्राएं अपनी समस्याओं को लेकर कलेक्टर से मिलने 62 किलोमीटर दूर बड़वानी के लिए पैदल मार्च पर निकले हैं

बड़वानी/सेंधवा। मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के सेंधवा में सोमवार को एकलव्य आदर्श विद्यालय जामली के छात्र-छात्राओं ने अपनी समस्याओं को लेकर प्रशासन के खिलाफ आवाज बुलंद की। हॉस्टल में मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलने और कथित तौर पर प्रताड़ना से नाराज छात्र कलेक्टर से मिलने के लिए करीब 62 किलोमीटर दूर बड़वानी तक पैदल मार्च पर निकल पड़े। दोपहर करीब 12 बजे शुरू हुए इस मार्च में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल हुए। उनके हाथों में किताबों के बजाय अपनी मांगों और अधिकारों से जुड़े पोस्टर थे।

छात्रों के अचानक पैदल मार्च पर निकलने की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमले में हलचल मच गई। पुलिस और प्रशासन ने छात्रों को सेंधवा से करीब 18 किलोमीटर दूर रास्ते में रोक लिया। अधिकारियों ने छात्रों से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानने और उन्हें समझाने का प्रयास किया। हालांकि, छात्र अपनी बात सीधे कलेक्टर के सामने रखने की मांग पर अड़े रहे।

“हम गूगल पर दुनिया देखते हैं, हमें अपना हक पता है”

प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कहा कि अब वे केवल डांट सुनकर चुप बैठने वाले नहीं हैं। उनका कहना था कि वे आधुनिक दौर के बच्चे हैं और इंटरनेट के जरिए देश-दुनिया की जानकारी हासिल करते हैं। छात्रों ने कहा, “हम गूगल पर दुनिया देखते हैं, हम जानते हैं हमारा हक क्या है।”

छात्रों का कहना है कि स्कूल और हॉस्टल में उन्हें ऐसी सुविधाएं मिलनी चाहिए, जो एक आवासीय विद्यालय के विद्यार्थियों के लिए जरूरी हैं। उनका आरोप है कि कई बार अपनी समस्याएं बताने के बावजूद समाधान नहीं किया गया। इसी वजह से उन्होंने खुद कलेक्टर से मिलने का फैसला किया।

हॉस्टल में बेसिक सुविधाएं नहीं मिलने का आरोप

छात्रों ने हॉस्टल की व्यवस्थाओं को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उन्हें स्मार्ट क्लास जैसी शैक्षणिक सुविधाएं पर्याप्त रूप से नहीं मिल रही हैं। इसके अलावा साफ पानी और बेहतर भोजन की भी समस्या बताई गई है।

छात्रों का आरोप है कि हॉस्टल में मिलने वाले भोजन और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर वे लंबे समय से परेशान हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि पढ़ाई के साथ-साथ रहने, खाने और स्वास्थ्य से जुड़ी बुनियादी सुविधाएं भी अच्छी होनी चाहिए, लेकिन उन्हें इन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

छात्रों ने कथित तौर पर जातिसूचक शब्दों से बुलाए जाने और प्रताड़ित किए जाने के आरोप भी लगाए हैं। उनका कहना है कि इस तरह के व्यवहार से उन्हें मानसिक परेशानी होती है। विद्यार्थियों ने स्पष्ट किया कि वे ऐसी स्थिति को अब बर्दाश्त नहीं करेंगे और अपनी शिकायतों पर कार्रवाई चाहते हैं।

62 किलोमीटर दूर कलेक्टर से मिलने का फैसला

अपनी मांगों को प्रशासन तक पहुंचाने के लिए छात्रों ने सेंधवा से बड़वानी तक पैदल जाने का फैसला किया। बड़वानी करीब 62 किलोमीटर दूर होने के बावजूद छात्र पीछे हटने को तैयार नहीं थे। सोमवार दोपहर करीब 12 बजे छात्र-छात्राएं पोस्टर लेकर पैदल मार्च पर निकल पड़े।

इस दौरान छात्रों के हाथों में अलग-अलग मांगों से जुड़े पोस्टर दिखाई दिए। उनका कहना था कि जब उनकी समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर नहीं हुआ तो वे अपनी बात जिले के कलेक्टर तक पहुंचाना चाहते हैं।

छात्रों के इस कदम ने प्रशासन का ध्यान अपनी ओर खींचा। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने रास्ते में ही छात्रों को रोक लिया, ताकि उनसे बातचीत कर उनकी शिकायतों को समझा जा सके और स्थिति को आगे बढ़ने से रोका जा सके।

एसडीएम, एसडीओपी और तहसीलदार मौके पर पहुंचे

छात्रों के पैदल मार्च की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन ने तत्काल अधिकारियों को मौके पर भेजा। एसडीएम, एसडीओपी और तहसीलदार समेत अन्य अधिकारी छात्रों के पास पहुंचे। अधिकारियों ने विद्यार्थियों से बातचीत की और उनकी समस्याओं को सुना।

प्रशासनिक अधिकारियों ने छात्रों को समझाने का प्रयास किया कि उनकी शिकायतों की जांच कराई जाएगी और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो उचित कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने छात्रों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया जाएगा।

हालांकि, छात्र चाहते थे कि उनकी बात सीधे जिले के कलेक्टर तक पहुंचे। उनका कहना था कि वे केवल आश्वासन नहीं चाहते, बल्कि अपनी शिकायतों का समाधान चाहते हैं।

आदिवासी छात्रों में बढ़ती जागरूकता का संकेत

सेंधवा में सामने आया यह मामला केवल एक विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे आदिवासी क्षेत्र के विद्यार्थियों में बढ़ती जागरूकता के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है। छात्र अब अपनी पढ़ाई, रहने की व्यवस्था और अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर खुलकर सवाल उठा रहे हैं।

छात्रों का कहना है कि उन्हें भी बेहतर शिक्षा और सम्मानजनक माहौल का अधिकार है। उनका विरोध इसी मांग को लेकर है कि हॉस्टल में उन्हें साफ पानी, अच्छा भोजन, बेहतर शैक्षणिक संसाधन और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाए।

विशेषज्ञों के अनुसार, आवासीय विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए शिक्षा के साथ-साथ हॉस्टल की व्यवस्थाएं भी बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। यदि विद्यार्थियों को लगातार मूलभूत सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़े तो इसका असर उनकी पढ़ाई और मानसिक स्थिति पर भी पड़ सकता है। ऐसे में छात्रों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच और समयबद्ध समाधान जरूरी है।

अब जांच और कार्रवाई पर नजर

फिलहाल प्रशासन ने छात्रों को उनकी समस्याओं की जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब निगाह इस बात पर है कि छात्रों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच किस तरह होती है और उनकी मांगों पर प्रशासन क्या कदम उठाता है।

छात्रों के इस पैदल मार्च ने यह भी संदेश दिया है कि नई पीढ़ी अपने अधिकारों और सुविधाओं को लेकर पहले की तुलना में अधिक जागरूक है। “डांट सुनकर चुप बैठने” के बजाय कलेक्टर तक अपनी बात पहुंचाने के लिए 62 किलोमीटर पैदल निकलने का फैसला छात्रों के आक्रोश और अपनी समस्याओं के समाधान की उनकी दृढ़ इच्छा को दर्शाता है।

अब प्रशासन के सामने चुनौती है कि छात्रों की शिकायतों की गंभीरता से जांच कर वास्तविक समस्याओं की पहचान की जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई के साथ हॉस्टल की व्यवस्थाओं में सुधार किया जाए। छात्रों को भी उम्मीद है कि उनकी आवाज केवल रास्ते में रोके जाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उनकी मांगों का ठोस समाधान सामने आएगा।

.डॉक्टर भी मौके पर बुलाए

बच्चों की नाराजगी को देखते हुए सेंधवा एसडीएम आशीष के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम को भी मौके पर बुलाया गया है। वहीं, सुरक्षा के मद्देनजर सेंधवा ग्रामीण थाना और नागलवाड़ी थाना पुलिस भी बच्चों के साथ मौजूद है।

छात्रों के आरोप

जामली के एकलव्य आदर्श विद्यालय से शुरू हुआ छात्र-छात्राओं का यह पैदल मार्च अब करीब 17 किलोमीटर तक पहुंच चुका है। बच्चों का कहना है कि विद्यालय में उन्हें जरूरी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं, वहीं जातिसूचक शब्दों से प्रताड़ित किए जाने का भी आरोप लगाया है। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर बच्चों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन छात्र-छात्राएं कलेक्टर से मुलाकात की मांग पर अड़े हुए हैं। बच्चों की संख्या और लगातार पैदल चलने को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम को मौके पर बुलाया गया है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल भी तैनात है। फिलहाल प्रशासन बच्चों को समझाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन छात्र-छात्राएं अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।