बीजेपी विधायक का PWD अधिकारियों पर फूटा गुस्सा, बोले- “विधायक मर जाएं या 5 साल पूरे हो जाएं, तब होगा काम”, SDO हटाए गए

भाजपा विधायक ने खोली भ्रष्टाचार की पोल सतना के चित्रकूट क्षेत्र में सड़कों की बदहाली को लेकर भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों पर भड़क गए। उन्होंने अधिकारी से सवाल किया- विधायक मर जाएं या उनके पांच साल पूरे हो जाएं, तब सड़कें बनेंगी क्या?

बीजेपी विधायक का PWD अधिकारियों पर फूटा गुस्सा, बोले- “विधायक मर जाएं या 5 साल पूरे हो जाएं, तब होगा काम”, SDO हटाए गए

चित्रकूट में सड़कों की बदहाली पर विधायक का फूटा गुस्सा, PWD अधिकारी को हटाया

सतना। मध्य प्रदेश के सतना जिले के चित्रकूट विधानसभा क्षेत्र में सड़कों की खराब हालत और निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर सियासत गरमा गई है। क्षेत्रीय भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार मंगलवार को लोक निर्माण विभाग (PWD) के कार्यालय पहुंचे और विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर जमकर नाराजगी जताई। विधायक ने मुख्य अभियंता पंकज खड़ारे के सामने क्षेत्र में सड़कों की स्थिति, निर्माण की गुणवत्ता और अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए।

बैठक के दौरान विधायक के तेवर बेहद तल्ख नजर आए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि चित्रकूट क्षेत्र में करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़कों की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई दे रहा है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि हालात ऐसे हैं कि ऐसा लगता है, “विधायक जी मर जाएं या पांच साल पूरे हो जाएं, तब काम होगा।”

चार साल में करीब 1100 करोड़ की सड़क परियोजनाओं का दावा

विधायक गहरवार ने मुख्य अभियंता के सामने दावा किया कि पिछले चार वर्षों के दौरान चित्रकूट विधानसभा क्षेत्र के लिए करीब 1100 करोड़ रुपये की लागत से सड़क निर्माण और संबंधित कार्यों को मंजूरी मिली है। इसके बावजूद कई स्थानों पर सड़कें बनने के कुछ समय बाद ही उखड़ने लगी हैं और उनकी हालत खराब हो गई है।

विधायक का आरोप है कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की पर्याप्त निगरानी नहीं की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि कई जगहों पर सड़कों के काम को कागजों में पूरा दिखा दिया जाता है, जबकि मौके पर निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति अलग दिखाई देती है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली और निर्माण एजेंसियों की निगरानी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

उन्होंने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि जिन सड़कों के लिए सरकारी राशि स्वीकृत की गई है, उनका निर्माण निर्धारित मानकों के अनुसार हो और कार्य की नियमित जांच की जाए।

PWD के प्रभारी SDO पर भी उठाए सवाल

विधायक ने मझगवां में PWD के प्रभारी SDO अश्वनी निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में सड़क निर्माण और विकास कार्यों को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं, लेकिन विभागीय स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही।

विधायक ने अधिकारियों की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि विभाग के कुछ अधिकारी और कर्मचारी विकास कार्यों की निगरानी के बजाय दूसरे मामलों में अधिक रुचि लेते नजर आ रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि जनता के पैसे से होने वाले विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

विधायक के मुताबिक क्षेत्र की जनता लंबे समय से खराब सड़कों को लेकर परेशान है। बारिश के दौरान स्थिति और गंभीर हो जाती है। कई सड़कों पर गड्ढे होने से आवागमन प्रभावित होता है और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

विधायक के विरोध के बाद विभाग ने लिया एक्शन

विधायक की नाराजगी और शिकायतों के बाद PWD ने तत्काल कार्रवाई की। मुख्य अभियंता पंकज खड़ारे के निर्देश पर मझगवां के प्रभारी SDO अश्वनी निगम को पद से हटा दिया गया। उनके स्थान पर दूसरे सहायक अभियंता को मझगवां का प्रभार सौंपे जाने की जानकारी सामने आई है।

इस कार्रवाई को विधायक की शिकायतों के बाद विभाग द्वारा उठाया गया तत्काल कदम माना जा रहा है। मुख्य अभियंता ने विधायक को भरोसा दिलाया कि उनके द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों और शिकायतों का परीक्षण कराया जाएगा तथा आवश्यक कार्रवाई करते हुए समस्याओं का जल्द समाधान किया जाएगा।

विभाग की ओर से यह भी संकेत दिया गया कि सड़क निर्माण से जुड़े मामलों की गुणवत्ता और प्रगति की समीक्षा की जाएगी, ताकि शिकायतों की वास्तविकता सामने आ सके।

“अधिकारी मदमस्त हो चुके हैं” — विधायक

बैठक के दौरान विधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार ने अधिकारियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि विभाग के अधिकारी इतने “मदमस्त” हो चुके हैं कि उन्हें आम जनता की परेशानियों से कोई सरोकार नहीं रह गया है।

उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि के तौर पर उनका दायित्व जनता की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना है। यदि क्षेत्र की जनता सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए परेशान है, तो संबंधित विभाग को जवाब देना होगा।

विधायक ने व्यंग्यात्मक अंदाज में यह भी कहा कि स्थिति ऐसी बन गई है मानो जनता की समस्याओं का समाधान तभी होगा जब विधायक का कार्यकाल समाप्त हो जाए या विधायक ही न रहें। उनके इस बयान से बैठक का माहौल काफी गरम हो गया।

निर्माण गुणवत्ता और निगरानी पर उठे बड़े सवाल

चित्रकूट विधानसभा क्षेत्र में सड़क निर्माण को लेकर सामने आई शिकायतों ने सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करोड़ों रुपये की परियोजनाओं के बावजूद यदि सड़कें कुछ समय में ही खराब होने लगती हैं, तो निर्माण सामग्री, तकनीकी मानकों, ठेकेदारों की कार्यप्रणाली और विभागीय निरीक्षण की भूमिका की जांच जरूरी हो जाती है।

विधायक ने अधिकारियों से यह भी अपेक्षा जताई कि भविष्य में सड़क निर्माण शुरू होने से लेकर उसके पूरा होने तक प्रत्येक चरण की प्रभावी निगरानी की जाए। साथ ही निर्माण के बाद सड़क की गुणवत्ता की भी जांच हो, ताकि सरकारी धन का सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

जनता को बेहतर सड़क की उम्मीद

चित्रकूट क्षेत्र में सड़कें स्थानीय लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। ग्रामीण और कस्बाई इलाकों को जोड़ने वाली सड़कों के खराब होने से आम लोगों के साथ-साथ विद्यार्थियों, किसानों, व्यापारियों और मरीजों को भी आवागमन में परेशानी होती है।

ऐसे में विधायक की नाराजगी और विभाग द्वारा SDO को हटाए जाने के बाद लोगों की नजर अब आगे की कार्रवाई पर है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन सड़कों की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आई हैं, उनकी जांच कब पूरी होगी और खराब सड़कों को दुरुस्त कराने के लिए विभाग क्या ठोस कदम उठाएगा।

फिलहाल PWD के मुख्य अभियंता ने विधायक को समस्याओं के परीक्षण और समाधान का आश्वासन दिया है। अब देखना होगा कि विभागीय कार्रवाई केवल अधिकारी बदलने तक सीमित रहती है या सड़क निर्माण में कथित गड़बड़ियों की वास्तविक जांच कर जिम्मेदार लोगों पर भी कार्रवाई होती है।