जीतू पटवारी के प्रचार पर रोक लगाने की मांग, भाजपा ने चुनाव आयोग से की शिकायत-हर घर ₹5 हजार' वाले बयान पर सियासी बवाल

दतिया उपचुनाव के प्रचार में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के बयानों को लेकर भाजपा ने निर्वाचन आयोग का रुख किया है। भाजपा ने पटवारी पर मुख्यमंत्री मोहन यादव और सरकारी संस्थाओं के खिलाफ आपत्तिजनक बयान देने का आरोप लगाते हुए दतिया में उनके प्रचार पर रोक लगाने की मांग की है।

जीतू पटवारी के प्रचार पर रोक लगाने की मांग, भाजपा ने चुनाव आयोग से की शिकायत-हर घर ₹5 हजार' वाले बयान पर सियासी बवाल

दतिया उपचुनाव: जीतू पटवारी के प्रचार पर रोक की मांग, भाजपा ने चुनाव आयोग से की शिकायत

भोपाल/दतिया। मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में चुनाव प्रचार के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के हालिया बयानों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि पटवारी ने चुनावी सभाओं में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश सरकार और शासकीय संस्थाओं के खिलाफ तथ्यहीन एवं भ्रामक आरोप लगाए हैं, जिससे मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है। पार्टी ने निर्वाचन आयोग से न केवल मामले की जांच कराने बल्कि चुनाव प्रचार की शेष अवधि के दौरान जीतू पटवारी के दतिया विधानसभा क्षेत्र में प्रवेश और प्रचार पर रोक लगाने की भी मांग की है।

सोमवार को भाजपा के प्रतिनिधिमंडल ने भोपाल स्थित प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय पहुंचकर लिखित शिकायत सौंपी। शिकायत में कहा गया कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष लगातार ऐसे बयान दे रहे हैं, जिनका कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है और जिनका उद्देश्य केवल चुनावी माहौल को प्रभावित करना है। भाजपा का आरोप है कि इस प्रकार के बयान मुख्यमंत्री की छवि को धूमिल करने के साथ-साथ सरकारी संस्थाओं की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े करते हैं।

भाजपा ने अपनी शिकायत में यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक दलों को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन चुनाव के दौरान बिना प्रमाण के लगाए गए आरोप मतदाताओं को गुमराह कर सकते हैं। पार्टी का कहना है कि चुनाव प्रचार के दौरान जिम्मेदार नेताओं को संयमित भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव प्रक्रिया प्रभावित न हो।

भाजपा ने जताई कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका

भाजपा ने निर्वाचन आयोग को दिए गए ज्ञापन में दावा किया कि जीतू पटवारी के बयान मतदाताओं के बीच भ्रम और तनाव की स्थिति पैदा कर सकते हैं। पार्टी का कहना है कि यदि इस प्रकार के आरोप लगातार लगाए जाते रहे तो दतिया में चुनावी माहौल प्रभावित होने के साथ-साथ कानून-व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।

भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष द्वारा दिए गए बयान आदर्श आचार संहिता की भावना के विपरीत हैं। पार्टी का कहना है कि चुनाव प्रचार का उद्देश्य जनता के सामने अपनी नीतियां और योजनाएं रखना होना चाहिए, न कि बिना प्रमाण के विरोधियों और सरकारी संस्थाओं पर आरोप लगाना।

दतिया में प्रचार पर रोक लगाने की मांग

भाजपा ने अपनी शिकायत में निर्वाचन आयोग से यह भी मांग की कि चुनाव प्रचार की शेष अवधि के दौरान जीतू पटवारी के दतिया विधानसभा क्षेत्र में प्रवेश और प्रचार पर प्रतिबंध लगाया जाए।

पार्टी का तर्क है कि यदि आयोग समय रहते हस्तक्षेप नहीं करता तो चुनावी वातावरण प्रभावित हो सकता है। भाजपा ने कहा कि निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना निर्वाचन आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है और इसके लिए आवश्यक होने पर कड़े कदम उठाए जाने चाहिए।

किस बयान पर मचा विवाद?

दतिया में आयोजित चुनावी सभाओं के दौरान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश सरकार पर प्रशासनिक मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि सरकार चुनाव को प्रभावित करने का प्रयास कर रही है और अधिकारियों पर दबाव बनाया जा रहा है।

पटवारी ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकारें आती-जाती रहती हैं, इसलिए उन्हें किसी राजनीतिक दबाव में आए बिना निष्पक्ष होकर अपने दायित्व निभाने चाहिए। भाजपा का कहना है कि इस प्रकार के बयान सरकारी अधिकारियों और प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते हैं।

₹5 हजार बांटने वाले बयान पर भी आपत्ति

भाजपा की शिकायत का एक महत्वपूर्ण आधार वह बयान भी है, जिसमें जीतू पटवारी ने आरोप लगाया था कि भाजपा चुनाव जीतने के लिए हर घर ₹5 हजार बांटने वाली है। भाजपा ने इस आरोप को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि बिना किसी सबूत के इस तरह के आरोप लगाना मतदाताओं को गुमराह करने का प्रयास है।

पार्टी ने निर्वाचन आयोग से इस बयान की भी जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। भाजपा का कहना है कि चुनाव के दौरान इस प्रकार की बयानबाजी मतदाताओं के निर्णय को प्रभावित करने का प्रयास है।

कांग्रेस का पक्ष

हालांकि भाजपा की शिकायत पर कांग्रेस की ओर से इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन कांग्रेस पहले भी लगातार यह आरोप लगाती रही है कि प्रदेश सरकार चुनाव के दौरान प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग कर रही है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वे केवल निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की मांग उठा रहे हैं और अधिकारियों से संविधान तथा चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार कार्य करने की अपील कर रहे हैं।

दतिया उपचुनाव में बढ़ी सियासी गर्मी

दतिया विधानसभा उपचुनाव को भाजपा और कांग्रेस दोनों ही प्रतिष्ठा का चुनाव मान रही हैं। यही कारण है कि दोनों दलों के वरिष्ठ नेता लगातार क्षेत्र में चुनाव प्रचार कर रहे हैं और एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगा रहे हैं।

चुनावी अभियान के दौरान राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भाजपा जहां कांग्रेस पर झूठे आरोप लगाकर माहौल बिगाड़ने का आरोप लगा रही है, वहीं कांग्रेस सरकार पर प्रशासनिक निष्पक्षता को प्रभावित करने के आरोप लगा रही है। ऐसे में चुनावी मुकाबला और अधिक दिलचस्प हो गया है।

निर्वाचन आयोग की भूमिका अहम

भाजपा की शिकायत के बाद अब निगाहें निर्वाचन आयोग की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि आयोग को शिकायत प्रथम दृष्टया गंभीर लगती है तो संबंधित पक्ष से जवाब मांगा जा सकता है। आवश्यकता पड़ने पर आयोग चुनाव आचार संहिता के प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई भी कर सकता है।

चुनाव आयोग की प्राथमिक जिम्मेदारी स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराना है। ऐसे में दोनों प्रमुख दलों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच आयोग की निष्पक्षता और निर्णय पर सभी की नजर रहेगी।

फिलहाल दतिया उपचुनाव में राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा चुका है। एक ओर भाजपा चुनाव आयोग से कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के खिलाफ कार्रवाई और उनके प्रचार पर रोक लगाने की मांग कर रही है, तो दूसरी ओर कांग्रेस लगातार प्रदेश सरकार और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठा रही है। आने वाले दिनों में आयोग का रुख और दोनों दलों की चुनावी रणनीति इस उपचुनाव की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।