बालाघाट में गर्भवती महिला से कथित पुलिस बर्बरता पर बवाल, थाने के घेराव में पथराव; SDOP समेत कई पुलिसकर्मी घायल, आंसू गैस और लाठीचार्ज
पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में बताया है। समाज ने चेतावनी दी है कि यदि दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई नहीं हुई और पीड़िता को न्याय नहीं मिला तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।
बालाघाट के किरनापुर में गर्भवती महिला और उसके पति से पुलिस हिरासत में कथित मारपीट के विरोध में मरार माली समाज ने प्रदर्शन किया। रैली के दौरान थाने का घेराव कर पथराव किया गया। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। मामले में चार पुलिसकर्मी पहले ही निलंबित किए जा चुके हैं।
बालाघाट जिले के किरनापुर में दो माह की गर्भवती महिला और उसके पति के साथ पुलिस द्वारा कथित मारपीट और बर्बरता का मामला अब बड़े विरोध प्रदर्शन में बदल गया है। मंगलवार को मरार माली समाज के हजारों लोगों ने आक्रोश रैली निकालकर किरनापुर थाने का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और आरोपित पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बन गई। पुलिस के अनुसार, भीड़ की ओर से पथराव किया गया, जिसमें SDOP सहित कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की जानकारी है। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज कर भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास किया। कार्रवाई के बाद मौके पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
चोरी के संदेह में हिरासत में लेने का आरोप
पूरा विवाद किरनापुर थाना क्षेत्र के पोस्ट ऑफिस में 21 अगस्त 2026 को हुई चोरी के मामले से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि चोरी के संदेह में पुलिस ने सावित्री बाई और उनके पति को हिरासत में लिया था। पीड़ित पक्ष का दावा है कि दोनों को बिना वारंट थाने लाया गया और वहां उनके साथ मारपीट की गई।
सबसे गंभीर आरोप महिला के साथ कथित बर्बरता को लेकर हैं। पीड़ित पक्ष के मुताबिक, हिरासत के दौरान महिला दो माह की गर्भवती थी। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उसके और उसके पति के कपड़े उतरवाकर उनके साथ मारपीट की। इस घटना को लेकर पीड़ित परिवार ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
मामला 7 सितंबर को सामने आने के बाद क्षेत्र में आक्रोश बढ़ने लगा। पीड़ित पक्ष द्वारा पुलिस पर लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया और संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की।
थाना प्रभारी समेत पांच पुलिसकर्मी निलंबित
मामले की गंभीरता को देखते हुए बालाघाट एसपी आदित्य मिश्रा ने तत्कालीन थाना प्रभारी उप-निरीक्षक दामेन्द्र तुरकर, महिला आरक्षक मेघा टेकाम और दो अन्य आरक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। इसके साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया है।
एसआईटी अब मामले से जुड़े आरोपों, हिरासत की परिस्थितियों और पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच कर रही है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की बात कही गई है।
हालांकि मरार माली समाज पुलिस विभाग की इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है। समाज की मांग है कि जिन पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगे हैं, उन्हें केवल निलंबित करने के बजाय सेवा से बर्खास्त किया जाए। साथ ही उनके खिलाफ तत्काल आपराधिक प्रकरण दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
हजारों लोगों ने निकाली आक्रोश रैली
मंगलवार दोपहर करीब 2 बजे शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन देखते ही देखते बड़े आंदोलन में बदल गया। बड़ी संख्या में लोग रैली के रूप में किरनापुर थाने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए और थाने का घेराव कर दिया।
भीड़ बढ़ने के साथ पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों की ओर से जांच और कार्रवाई का भरोसा दिए जाने के बावजूद प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि गर्भवती महिला के साथ कथित तौर पर हुई मारपीट बेहद गंभीर मामला है। उनका आरोप है कि सिर्फ निलंबन पर्याप्त नहीं है और दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
पथराव के बाद पुलिस ने छोड़ी आंसू गैस
थाने के बाहर प्रदर्शन के दौरान माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। पुलिस का दावा है कि प्रदर्शनकारियों की ओर से पथराव किया गया, जिसमें SDOP सहित कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया।
आंसू गैस छोड़े जाने के बाद प्रदर्शन स्थल पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। पुलिस ने लोगों को पीछे हटाने की कोशिश की, जबकि प्रदर्शनकारी भी पुलिस कार्रवाई का विरोध करते नजर आए। स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल भी मौके पर तैनात किया गया।
कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
मरार माली समाज ने साफ चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। समाज की प्रमुख मांगों में आरोपित पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करना, उन्हें सेवा से बर्खास्त करना और पीड़ित दंपती को न्याय दिलाना शामिल है।
फिलहाल पूरे मामले की जांच एसआईटी कर रही है। इसलिए पुलिसकर्मियों पर लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। दूसरी ओर, थाने के घेराव और उसके बाद हुए पथराव तथा पुलिस कार्रवाई ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है।
गर्भवती महिला के साथ कथित पुलिस बर्बरता से शुरू हुआ यह विवाद अब कानून-व्यवस्था और पुलिस जवाबदेही का मुद्दा बन गया है। प्रशासन के सामने एक ओर निष्पक्ष जांच पूरी कराने की चुनौती है, तो दूसरी ओर प्रदर्शन के दौरान उत्पन्न तनाव को नियंत्रित रखना भी बड़ी जिम्मेदारी है। आने वाले दिनों में एसआईटी की जांच और प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की नजर रहेगी।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस