आज बैंक बंद: 5-डे वीक की मांग पर 40 हजार बैंककर्मी हड़ताल पर, 7 हजार शाखाओं में कामकाज ठप; 3 दिन तक रहेगा असर
5-डे वीक की मांग को लेकर एमपी के 40 हजार बैंककर्मी आज हड़ताल पर हैं। करीब 7 हजार शाखाओं में कामकाज प्रभावित रहेगा। शनिवार-रविवार की छुट्टी से असर 3 दिन रहेगा। सितंबर के अंत में फिर 5 दिन बैंक बंद रहने की स्थिति बन सकती है।
यूनाईटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के देशव्यापी हड़ताल और नियमित छुट्टियों के कारण आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
भोपाल। मध्य प्रदेश में शुक्रवार को बैंकिंग सेवाओं पर हड़ताल का असर देखने को मिल रहा है। पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह यानी 5-डे वीक लागू करने की मांग को लेकर प्रदेश के करीब 40 हजार बैंककर्मी एक दिन की हड़ताल पर हैं। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के बैनर तले आयोजित इस प्रदेशव्यापी हड़ताल के चलते प्रदेश की करीब 7 हजार बैंक शाखाओं में कामकाज प्रभावित होने की संभावना है।
हड़ताल के कारण बैंक शाखाओं में सामान्य बैंकिंग गतिविधियां प्रभावित रहेंगी। बड़ी रकम की निकासी, चेक जमा करने और चेक क्लियरेंस जैसे कामों में परेशानी और देरी हो सकती है। हालांकि डिजिटल बैंकिंग, UPI, एटीएम और अन्य ऑनलाइन सेवाएं सामान्य रूप से उपलब्ध रहने की उम्मीद है, लेकिन नकद और शाखा से जुड़े कामों के लिए ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
एक दिन की हड़ताल, लेकिन तीन दिन तक असर
बैंक कर्मचारियों की हड़ताल शुक्रवार को है, लेकिन इसका असर लगातार तीन दिनों तक महसूस हो सकता है। इसकी वजह यह है कि हड़ताल के अगले दो दिन शनिवार और रविवार हैं। बैंकिंग व्यवस्था में पहले से लागू अवकाश के कारण इन दोनों दिनों में भी बैंक शाखाएं बंद रहेंगी।
ऐसे में जिन ग्राहकों को शाखा जाकर बैंकिंग से जुड़े जरूरी काम करने थे, उन्हें अब सोमवार तक इंतजार करना पड़ सकता है। खासकर चेक क्लियरेंस, नकद लेन-देन और अन्य शाखा आधारित सेवाओं में देरी होने की संभावना है।
भोपाल में बैंककर्मी करेंगे प्रदर्शन
हड़ताल के दौरान बैंककर्मी भोपाल में एकजुट होकर प्रदर्शन करेंगे। यूनियनों का कहना है कि पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की मांग लंबे समय से लंबित है। कर्मचारियों का तर्क है कि बैंकिंग क्षेत्र में काम के बदलते स्वरूप और डिजिटल सेवाओं के विस्तार को देखते हुए अब सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
यूनियनों का कहना है कि इस मांग को लेकर सरकार और बैंकिंग संगठनों के बीच बातचीत चल रही है, लेकिन अभी तक कोई सकारात्मक समाधान सामने नहीं आया है। इसी कारण प्रस्तावित हड़ताल को वापस नहीं लिया गया।
क्या है 5-डे बैंकिंग वीक की मांग?
फिलहाल बैंकों में महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश रहता है। बाकी शनिवार को बैंक खुले रहते हैं। बैंक यूनियनों की मांग है कि सभी शनिवार को छुट्टी घोषित करते हुए बैंकों में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू किया जाए।
यूनियनों के प्रस्ताव के मुताबिक शनिवार की छुट्टी के बदले सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना बैंकिंग का कामकाजी समय करीब 40 मिनट बढ़ाया जा सकता है। यानी कर्मचारियों के साप्ताहिक कामकाज में बड़ी कटौती करने के बजाय शनिवार की छुट्टी को सप्ताह के अन्य कार्यदिवसों में अतिरिक्त समय के जरिए संतुलित किया जाएगा।
बैंककर्मियों की दो प्रमुख मांगें
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस की ओर से 5-डे बैंकिंग वीक लागू करने के साथ एक और प्रमुख मांग उठाई गई है। यूनियनों ने स्केल-IV और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए लागू की गई PLI योजना का विरोध किया है और इसे वापस लेने की मांग की है।
यूनियनों का आरोप है कि यह योजना बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच विभाजन पैदा कर सकती है। उनका कहना है कि व्यक्तिगत प्रदर्शन पर आधारित प्रोत्साहन व्यवस्था के बजाय बैंकिंग क्षेत्र में सामूहिक योगदान और सभी कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
सरकार से बातचीत के बावजूद नहीं बनी सहमति
बैंक हड़ताल से पहले यूनियनों और सरकार के बीच वार्ता का दौर जारी रहा। हालांकि बातचीत में कोई ऐसा सकारात्मक समाधान नहीं निकल पाया, जिसके बाद यूनियनों ने हड़ताल को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रखने का फैसला किया।
यूनियंस के को-ऑर्डिनेटर वीके शर्मा ने कहा कि पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की मांग जायज है और इसे सरकार की ओर से अनावश्यक रूप से लंबित रखा जा रहा है। उनके मुताबिक कर्मचारियों की कई अन्य मांगें भी लंबे समय से लंबित हैं।
पेंशन से लेकर भर्ती तक कई मुद्दे लंबित
यूनियनों के मुताबिक बैंक कर्मचारियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों का अभी तक समाधान नहीं हुआ है। इनमें पेंशन अपडेशन, पेंशनभोगियों के एक्स-ग्रेशिया की समीक्षा और पेंशन से संबंधित अन्य मांगें शामिल हैं।
इसके अलावा बैंक कर्मचारी संगठनों की ओर से NPS को OPS में बदलने और सभी पेंशनभोगियों के लिए समान DA योजना लागू करने की मांग भी उठाई जा रही है।
बैंकिंग क्षेत्र में पर्याप्त स्टाफ की कमी का मुद्दा भी यूनियनों ने उठाया है। उनका कहना है कि बैंकों में पर्याप्त संख्या में क्लर्क, सब-स्टाफ और आर्म्ड गार्ड्स की भर्ती की जरूरत है। कर्मचारियों की कमी का सीधा असर बैंकिंग सेवाओं और मौजूदा कर्मचारियों के कार्यभार पर पड़ता है।
ग्रेच्युटी सीमा बढ़ाने की भी मांग
यूनियनों ने ग्रेच्युटी अधिनियम के तहत निर्धारित सीमा बढ़ाने की मांग भी रखी है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बैंक कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न सेवा और सामाजिक सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर सरकार को गंभीरता से फैसला लेना चाहिए।
यूनियनों का आरोप है कि इन लंबित मांगों का समाधान किए बिना सरकार अगले वेतन संशोधन समझौते को जल्द पूरा करने का प्रयास कर रही है। कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि पहले पुराने लंबित मुद्दों पर ठोस निर्णय लिया जाए।
सितंबर में फिर लंबी बैंक हड़ताल का असर
बैंक कर्मचारियों की ओर से सितंबर में एक और बड़ी हड़ताल का कार्यक्रम बताया गया है। यूनियनों के मुताबिक 26 और 27 सितंबर को शनिवार-रविवार का अवकाश रहेगा, जबकि इसके बाद 28 से 30 सितंबर तक हड़ताल प्रस्तावित है।
इस तरह 26 सितंबर से 30 सितंबर तक लगातार पांच दिनों तक बैंक शाखाओं में सामान्य कामकाज प्रभावित हो सकता है। यदि निर्धारित कार्यक्रम में बदलाव नहीं हुआ तो सितंबर के भीतर ही बैंकिंग सेवाओं पर दो बार हड़ताल का असर देखने को मिलेगा।
ग्राहकों को किन सेवाओं में हो सकती है परेशानी?
हड़ताल का सबसे सीधा असर शाखा में होने वाले कामों पर पड़ेगा। ग्राहकों को बड़ी रकम की नकद निकासी, नकद जमा, चेक जमा करने, चेक क्लियरेंस और अन्य शाखा आधारित सेवाओं के लिए परेशानी हो सकती है।
हालांकि मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग, UPI और एटीएम जैसी डिजिटल सेवाएं आम तौर पर चालू रह सकती हैं। फिर भी बैंकिंग नेटवर्क पर बढ़े दबाव या तकनीकी कारणों से कुछ सेवाओं में अस्थायी दिक्कत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
बैंक यूनियनों का कहना है कि उनकी हड़ताल का उद्देश्य ग्राहकों को परेशान करना नहीं, बल्कि लंबे समय से लंबित कर्मचारी हितों और बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना है।
फिलहाल शुक्रवार की हड़ताल के बाद शनिवार और रविवार के अवकाश के कारण बैंक ग्राहकों को शाखा संबंधी जरूरी कामों के लिए सोमवार तक इंतजार करना पड़ सकता है। वहीं, सितंबर के अंत में प्रस्तावित पांच दिवसीय बंदी ने बैंकिंग सेवाओं को लेकर एक बार फिर कर्मचारियों की मांग और सरकार के बीच समाधान की जरूरत को सामने ला दिया है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस