बार संघ ने कार्यशैली पर उठाए सवाल, 23 जुलाई तक कार्रवाई न होने पर अनिश्चितकालीन बहिष्कार की चेतावनी; एसडीएम बोले- पूरी कार्यवाही की होती है वीडियोग्राफी

उरई में जिला बार संघ के अधिवक्ताओं ने उप जिलाधिकारी (न्यायिक) रिंकू सिंह राही की अदालत का बहिष्कार करते हुए उनकी कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर उनके न्यायिक कार्य वापस लेने की मांग की।

बार संघ ने कार्यशैली पर उठाए सवाल, 23 जुलाई तक कार्रवाई न होने पर अनिश्चितकालीन बहिष्कार की चेतावनी; एसडीएम बोले- पूरी कार्यवाही की होती है वीडियोग्राफी

उरई में उप जिलाधिकारी न्यायिक की अदालत का अधिवक्ताओं ने किया बहिष्कार, डीएम को सौंपा ज्ञापन; एसडीएम न्यायिक बोले- आरोप निराधार, साक्ष्य दें

उरई। जालौन मुख्यालय उरई में उप जिलाधिकारी (न्यायिक) रिंकू सिंह राही की कार्यशैली को लेकर जिला बार संघ और अधिवक्ताओं का विरोध खुलकर सामने आ गया है। अधिवक्ताओं ने उप जिलाधिकारी (न्यायिक) की अदालत के बहिष्कार का निर्णय लेते हुए जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय को ज्ञापन सौंपा और उनके न्यायिक कार्य वापस लिए जाने की मांग की। वहीं, उप जिलाधिकारी (न्यायिक) रिंकू सिंह राही ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि यदि किसी अधिवक्ता के पास आरोपों के समर्थन में कोई साक्ष्य है तो वह प्रस्तुत करे। उन्होंने कहा कि न्यायालय की पूरी कार्यवाही की प्रतिदिन वीडियोग्राफी होती है, जिससे सत्यता की जांच की जा सकती है।

जिला बार भवन में हुई बैठक

जानकारी के अनुसार, जिला बार भवन सभागार में 21 जुलाई को अधिवक्ताओं की एक बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला बार संघ के उपाध्यक्ष एवं कलेक्ट्रेट प्रभारी ओम नारायण निरंजन ने की। बैठक में बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने भाग लिया और उप जिलाधिकारी (न्यायिक) की कार्यप्रणाली पर गंभीर आपत्तियां जताईं। हालांकि, 22 जुलाई को इस बहिष्कार की जानकारी सार्वजनिक हुई क्योंकि 21 जुलाई को उप जिलाधिकारी (न्यायिक) की अदालत नहीं लगी थी।

बैठक में उपस्थित अधिवक्ताओं ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि उप जिलाधिकारी (न्यायिक) की अदालत का बहिष्कार किया जाएगा और इस संबंध में जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर कार्रवाई की मांग की जाएगी।

अधिवक्ताओं ने लगाए कई गंभीर आरोप

ज्ञापन में अधिवक्ताओं ने उप जिलाधिकारी (न्यायिक) पर कई गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि न्यायालय में अधिवक्ताओं को स्वतंत्र रूप से अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया जाता। अधिवक्ताओं के अनुसार, जब वे किसी वाद में अपने तर्क प्रस्तुत करते हैं तो न्यायालय असहमति व्यक्त करते हुए स्वयं ही अंतिम निष्कर्ष देने लगता है।

ज्ञापन में यह भी कहा गया कि वरिष्ठ और कनिष्ठ अधिवक्ताओं पर विभिन्न प्रकरणों, विशेषकर धारा 229-बी से जुड़े मामलों में अनावश्यक दबाव बनाया जाता है। अधिवक्ताओं का आरोप है कि कई बार उन्हें पूरी तरह सुने बिना ही न्यायालय अपनी राय थोप देता है, जिससे निष्पक्ष सुनवाई की भावना प्रभावित होती है।

अधिवक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि वादकारियों के सामने अधिवक्ताओं को अपमानित किया जाता है, जिससे उनकी पेशेवर गरिमा प्रभावित होती है। इसके अलावा, न्यायालय में लंबी-लंबी व्याख्यान शैली अपनाई जाती है, जिसके कारण अधिवक्ता अन्य न्यायालयों में समय पर उपस्थित नहीं हो पाते।

वीडियोग्राफी पर भी जताई आपत्ति

ज्ञापन में न्यायालय की कार्यवाही की लगातार वीडियोग्राफी कराए जाने पर भी आपत्ति जताई गई। अधिवक्ताओं का कहना है कि इस व्यवस्था से उन पर अनावश्यक दबाव बनाया जाता है और स्वतंत्र रूप से बहस करने का वातावरण प्रभावित होता है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि न्यायालय में बार-बार अपनी ईमानदारी, सत्यनिष्ठा और विधिक ज्ञान का उल्लेख किया जाता है, जिससे न्यायालय का माहौल असहज हो जाता है।

न्यायिक कार्य वापस लेने की मांग

अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी से मांग की कि उप जिलाधिकारी (न्यायिक) रिंकू सिंह राही से न्यायिक कार्य तत्काल वापस लिए जाएं। ज्ञापन में यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि 23 जुलाई तक उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो वे अनिश्चितकालीन बहिष्कार जारी रखेंगे और उप जिलाधिकारी (न्यायिक) की अदालत में कोई कार्य नहीं करेंगे।

एसडीएम न्यायिक ने आरोपों को बताया निराधार

दूसरी ओर, उप जिलाधिकारी (न्यायिक) रिंकू सिंह राही ने अधिवक्ताओं द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि आरोप पूरी तरह निराधार हैं और यदि किसी के पास कोई प्रमाण है तो उसे प्रस्तुत किया जाए।

उन्होंने कहा कि न्यायालय की प्रत्येक कार्यवाही की नियमित वीडियोग्राफी कराई जाती है। यदि किसी को किसी प्रकार की शिकायत है तो वीडियो रिकॉर्डिंग देखकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। उन्होंने जिला बार संघ के पदाधिकारियों से आग्रह किया कि वे बिंदुवार अपनी आपत्तियां लिखित रूप में बताएं, ताकि यदि कहीं कोई त्रुटि हो तो उसका परीक्षण किया जा सके।

हाईकोर्ट के नियमों का दिया हवाला

रिंकू सिंह राही ने कहा कि न्यायालय का संचालन उच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुरूप किया जाता है। कौन-सी मांग न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप है और कौन-सी नहीं, इसका निर्णय भी उन्हीं नियमों के आधार पर होगा।

उन्होंने बताया कि विरोध के बीच भी न्यायालय की कार्यवाही नियमानुसार जारी रही और सात मुकदमों की सुनवाई की गई। सभी मामलों में संबंधित पक्षकार न्यायालय में उपस्थित थे।

यूट्यूब पर उपलब्ध होती है कार्यवाही

एसडीएम (न्यायिक) ने कहा कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से न्यायालय की कार्यवाही की वीडियोग्राफी कराई जाती है। इसमें वादी, प्रतिवादी और न्यायालय की पूरी प्रक्रिया रिकॉर्ड होती है। उन्होंने बताया कि इन वीडियो को यूट्यूब चैनल पर भी अपलोड किया जाता है, जिससे कोई भी व्यक्ति न्यायालय की कार्यवाही देख सकता है। उनका कहना है कि यह व्यवस्था पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से लागू की गई है।

जिलाधिकारी ने दिया आश्वासन

अधिवक्ताओं का ज्ञापन प्राप्त होने के बाद जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने उन्हें आश्वस्त किया कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि जो भी कार्रवाई नियमों और तथ्यों के अनुसार उचित होगी, वही की जाएगी।

गतिरोध पर टिकी निगाहें

फिलहाल जिला बार संघ और उप जिलाधिकारी (न्यायिक) के बीच उत्पन्न विवाद प्रशासन के सामने चुनौती बन गया है। यदि 23 जुलाई तक कोई समाधान नहीं निकलता है तो अधिवक्ताओं द्वारा घोषित अनिश्चितकालीन बहिष्कार न्यायिक कार्यों को प्रभावित कर सकता है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन के अगले कदम और दोनों पक्षों के बीच संभावित समाधान पर टिकी हैं।